आज का दिन- 26 सितंबर 2026, पितरों के सम्मान में श्रद्धा से करें श्राद्ध!

आज का दिन- 26 सितंबर 2026, पितरों के सम्मान में श्रद्धा से करें श्राद्ध!

प्रेषित समय :21:00:44 PM / Fri, Sep 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

* प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963
श्राद्ध का श्रद्धा के साथ गहरा संबंध है इसीलिए कहा जाता है कि... पितरों के सम्मान में श्रद्धा से करें श्राद्ध! 
भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से पितरों के दिन प्रारंभ होते है जो अमावस्या तिथि तक रहते हैं.
पितरों का पितृ पक्ष के साथ विशेष संबंध माना गया है एवं धर्मग्रंथों के अनुसार अपराह्न व्यापिनी तिथि में ही श्राद्ध करना चाहिए.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध कर्म परलोक में सूक्ष्म शरीर धारी जीव की तृप्ति करता है और श्राद्ध कर्म से पितर तृप्त होकर शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं. 
* भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितरों का काल आरम्भ हो जाता है और यह सर्वपितृ अमावस्या तक रहता है.
* वैसे तो अमावस्या पितरों की तिथि है इसलिए अमावस्या पर श्राद्धकर्म किए जाते हैं.  
* सर्वपितृ अमावस्या, पितृ पक्ष का विशेष दिन है जब समस्त पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है.
* जो लोग पितृपक्ष के पन्द्रह दिनों तक श्राद्ध, तर्पण आदि नहीं कर पाते हैं और जिन पितरों के निधन की तिथि ज्ञात नहीं हो, किसी कारण से उनकी तिथि पर श्राद्ध नहीं किया गया हो, सर्वपितृ अमावस्या पर ऐसे पितरों का श्राद्ध होता है.
* कई लोग पूर्णिमा, चतुर्दशी आदि के दिन श्राद्ध नहीं करते हैं, वे सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करते हैं.  
* यह पितृपक्ष विदाई की अंतिम तिथि है, इसलिए श्राद्ध विषयक कोई  शंका हो तो अपने क्षेत्र के धर्मगुरु से मार्गदर्शन प्राप्त कर श्राद्धकर्म करें. 
* पितृपक्ष पूर्ण होने पर पितृ देवों की विदाई श्रद्धापूर्वक करें... हे पितृ देवों! हमारे परिवार में दाताओं, वेदों और संतानों की वृद्धि हो, हमारी आप में श्रद्धा कभी भी कम न हो, दान देने के लिए हमारे पास पर्याप्त संपत्ति हो!

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-