जमीन के मालिकाना हक पर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, 48 साल पुराना फैसला निरस्त

जमीन के मालिकाना हक पर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, 48 साल पुराना फैसला निरस्त

प्रेषित समय :17:04:59 PM / Sat, Sep 26th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिलासपुर. जमीन के मालिकाना हक से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राजनांदगांव कलेक्टर के वर्ष 2022 के आदेश को निरस्त कर दिया है. अदालत ने कलेक्टर को निर्देश दिया है कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 57(2) के तहत प्रस्तुत आवेदन पर सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार फैसला करें.

1978 के एकतरफा आदेश को दी गई चुनौती
मामला राजनांदगांव के बांसपाईपारा निवासी बसंत लाल से जुड़ा है. उनके निधन के बाद उनके कानूनी वारिसों शशि बाला लाल, शिशिर लाल, कीर्ति लाल और शिरीष लाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 3 नवंबर 1978 को उनके खिलाफ एकतरफा आदेश पारित किया गया था. उनका दावा था कि इस कार्रवाई से पहले उन्हें न तो नोटिस दिया गया और न ही सार्वजनिक सूचना जारी की गई.

बाद में वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों के निर्देश के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने राज्य शासन और निजी पक्ष के बीच जमीन के स्वामित्व से संबंधित विवाद के निराकरण के लिए धारा 57(2) के तहत राजनांदगांव कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया.

कलेक्टर ने आवेदन पर सुनवाई से किया था इनकार
कलेक्टर ने 13 जून 2022 को आवेदन पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी.

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कलेक्टर के आदेश को निरस्त कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित आवेदन पर कानून के अनुसार सुनवाई की जानी चाहिए.

15 दिन में कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आदेश की प्रति के साथ 15 दिनों के भीतर राजनांदगांव कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है.

कलेक्टर को याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य आवश्यक पक्षकारों को भी अपना पक्ष रखने और सुनवाई का पर्याप्त अवसर देना होगा. इसके बाद धारा 57(2) के तहत प्रस्तुत आवेदन का 60 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निराकरण करना होगा.

हालांकि, हाई कोर्ट ने जमीन के मालिकाना हक से जुड़े मूल विवाद के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है. अदालत का आदेश फिलहाल कलेक्टर द्वारा आवेदन पर सुनवाई और उसके कानूनी निराकरण का रास्ता खोलता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-