PVR को 17 मिनट देरी से फिल्म शुरू करना पड़ा भारी, कंज्यूमर कोर्ट ने ठोका भारी भरकम जुर्माना

PVR को 17 मिनट देरी से फिल्म शुरू करना पड़ा भारी, कंज्यूमर कोर्ट ने ठोका भारी भरकम जुर्माना

प्रेषित समय :17:36:01 PM / Sun, Sep 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

हैदराबाद. सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले दिखाए जाने वाले लंबे-चौड़े विज्ञापनों और ट्रेलर्स से परेशान दर्शकों के लिए एक बेहद राहत भरी और नजीर पेश करने वाली खबर सामने आई है. हैदराबाद के एक वकील ने फिल्म 17 मिनट देरी से शुरू करने पर देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन पीवीआर को अदालत में घसीट लिया. मामले की सुनवाई करते हुए हैदराबाद जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे अनुचित व्यापारिक गतिविधि मानते हुए पीवीआर पर 75,000 रुपये का भारी जुर्माना ठोक दिया है.

10:35 का शो 17 मिनट लेट, कमर्शियल विज्ञापनों की भरमार ने बिगाड़ा शेड्यूल

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब वकील ने रात 10:35 बजे के शो के लिए दो टिकट बुक किए थे. वह तय समय पर अपनी सीट पर बैठ गए ताकि फिल्म का पूरा आनंद ले सकें. हालांकि, पर्दे पर फिल्म शुरू होने के बजाय लगातार कमर्शियल विज्ञापन और ट्रेलर्स चलते रहे और फिल्म तय समय से 17 मिनट की देरी से शुरू हुई. इस देरी का खामियाजा यह हुआ कि जो शो रात 2 बजे खत्म होना था, उसकी वजह से वे तड़के 3 बजे घर पहुंच पाए. रात के समय ट्रैवलिंग और शेड्यूल बिगडऩे के कारण मानसिक परेशानी झेलने के बाद उन्होंने इसे सेवा में कमी मानते हुए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया.

पीवीआर की दलील- विज्ञापन दिखाना कारोबार का अधिकार

शिकायत के जवाब में पीवीआर ने देरी की बात तो स्वीकार की, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 19(1)(द्द) के तहत व्यापार करने की स्वतंत्रता का हवाला देकर अपना बचाव करने की कोशिश की. सिनेमा चेन ने तर्क दिया कि सिनेमा हॉल एक निजी संपत्ति है और दर्शकों को सामाजिक जागरूकता, स्वच्छता और महिला कल्याण से जुड़े संदेश दिखाना जनहित का हिस्सा है. हालांकि, आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के स्पष्ट नियमों का हवाला देते हुए पीवीआर की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ऐसे जन-कल्याणकारी विज्ञापनों की अवधि तय सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए और व्यावसायिक फायदे के लिए दर्शकों के समय का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता.

आयोग का सख्त रुख- 75,000 की पेनल्टी, मनमानी रोकने के निर्देश

उपभोक्ता आयोग ने माना कि दर्शकों को जबरन लंबे विज्ञापन दिखाना अनुचित व्यापारिक आचरण है, जिसका एकमात्र मकसद दर्शकों की जेब और समय की कीमत पर व्यावसायिक मुनाफा कमाना था. आयोग ने पीवीआर को शिकायतकर्ता को मानसिक प्रताडऩा के लिए 20,000 रुपये मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 5,000 रुपये चुकाने का आदेश दिया. इसके अलावा, सिनेमा चेन पर 50,000 रुपये का दंडात्मक हर्जाना लगाया गया, जिसे जिला उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का निर्देश दिया गया है. आयोग ने सिनेमा प्रबंधन को भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने की कड़ी हिदायत भी दी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-