चुनाव आयोग विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को तैयार

चुनाव आयोग विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को तैयार

प्रेषित समय :14:06:26 PM / Tue, Sep 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को एक नई याचिका को सूचीबद्ध करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार, दोनों चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति के बिना चुनाव आयोग की ओर से एकतरफा फैसला ले सकते हैं.

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की तरफ से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का जिक्र किया. वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वैधानिक योजना के तहत बहु-सदस्यीय आयोग के निर्णय सर्वसम्मति से या बहुमत से होना जरूरी है, और उन्होंने इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की. सिंह ने तर्क दिया कि जैसा कि कानून में कहा गया है, एक बहु-सदस्यीय आयोग के गठन का उद्देश्य यह है कि निर्णय सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के काम करने के तरीके को देखते हुए, इस पूरी एआईआर प्रक्रिया पर गंभीर संदेह है कि क्या चुनाव आयोग द्वारा कोई निर्णय लिया गया था या नहीं.

सिंह ने कहा, क्योंकि अगर आयोग ने एकमत से फैसला नहीं लिया है, तो यह... कोर्ट ने जो निर्णय दिया है वह भी इसी आधार पर है कि यह एक आयोग का निर्णय है. इसलिए, यह एक गंभीर मुद्दा है. मैं केवल अनुरोध कर रहा हूं. कार्यवाही की जानकारी रखने वाले एक वकील के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अगले हफ्ते इस मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है.

इस याचिका में सीजेआई ज्ञानेश कुमार को यह स्पष्ट करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है कि उन्होंने किस अधिकार के तहत व्यक्तिगत रूप से चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय लेने की शक्ति का इस्तेमाल किया, जबकि संविधान का अनुच्छेद 324(3) उन्हें सिर्फ आयोग का अध्यक्ष बनाता है और आयोग के सामूहिक अधिकार का उन्हें कोई व्यक्तिगत अधिकार नहीं देता है. याचिका में कहा गया कि अनुच्छेद 324(1) के अनुसार, मतदाता सूचियों की तैयारी और चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय में नहीं, बल्कि 'एक चुनाव आयोग में निहित है.

याचिका में कहा गया है, फॉर्म-6, निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित है. अगर, जैसा कि 16 मई 2026 को आयुक्त जोशी द्वारा फाइल पर दर्ज किया गया था और 19 मई 2026 को आयुक्त संधू द्वारा सहमति व्यक्त की गई थी, फॉर्म-6 में एसआईआर-लिंक्ड, गैर-वैकल्पिक फील्ड को शामिल करने के लिए नियमों में संशोधन की जरूरत थी, तो बिना किसी ऐसे संशोधन के उस जरूरत को लागू करने का कानूनी आधार अनिवार्य रूप से निर्धारण के लिए उत्पन्न होता है.

याचिका में कहा गया है कि जोशी और संधू द्वारा लगातार, उसी समय, ऑन-रिकॉर्ड असहमति जताए जाने के दौरान भी कुमार का पद पर बने रहना, उस अवधि के दौरान किए गए प्रत्येक मतदाता सूची अभ्यास और आयोजित चुनावों की अखंडता पर गंभीर संदेह पैदा करता है, जिसमें खुद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) भी शामिल है. याचिका में कहा गया कि एसआईआर के संबंध में इस अदालत के अपने आदेश इस प्रतिवेदन पर आगे बढ़े थे कि यह प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा एक सामूहिक निकाय के रूप में और उसकी ओर से की गई थी, न कि अकेले कुमार के कहने पर.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-