जबलपुर. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में प्रशासन और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी संघ के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारी संघ के अध्यक्ष को सोशल मीडिया पर कुलगुरु से संबंधित आपत्तिजनक टिप्पणी और पोस्ट साझा करने के आरोप में लगातार चार कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. नोटिसों में अनुशासनहीनता और सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए निर्धारित समयसीमा में स्पष्टीकरण मांगा गया है.
प्रशासन की कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय में कर्मचारी संगठनों के बीच भी हलचल बढ़ गई है. कर्मचारी संघ की ओर से कार्रवाई को लेकर आपत्ति जताई गई है. संघ से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े लंबित मुद्दों के बीच इस तरह के नोटिस जारी किया जाना उचित नहीं है. हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम स्थिति प्रशासन और संबंधित कर्मचारी के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी.
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार कर्मचारी संघ अध्यक्ष की ओर से सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय की आंतरिक कार्यप्रणाली और कुलगुरु से संबंधित कुछ टिप्पणियां और पोस्ट साझा की गईं. प्रशासन ने इन्हें विश्वविद्यालय की गरिमा और पद की प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं माना.
इन पोस्ट और टिप्पणियों को लेकर कुलसचिव कार्यालय की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. प्रशासन ने संबंधित कर्मचारी से यह स्पष्ट करने को कहा कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के संबंध में उनका पक्ष क्या है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए.
लगातार जारी हुए चार नोटिस
मामले में प्रशासन की ओर से अब तक चार नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है. शुरुआती नोटिस के बाद स्पष्टीकरण मांगा गया था. इसके बाद प्रशासन की ओर से दो और नोटिस जारी किए गए और अंत में चौथा नोटिस स्मरण-सह-अंतिम नोटिस के रूप में दिए जाने की जानकारी है.
नोटिस में निर्धारित समयसीमा में बिंदुवार जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जवाब नहीं मिलने अथवा स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
सेवा आचरण नियमों का दिया गया हवाला
कुलसचिव कार्यालय की ओर से जारी नोटिसों में सेवा आचरण से संबंधित नियमों का उल्लेख किए जाने की जानकारी है. प्रशासन का पक्ष है कि विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारी सार्वजनिक मंच पर ऐसी टिप्पणी नहीं कर सकते, जिससे संस्था या उसके पदाधिकारियों की प्रतिष्ठा प्रभावित हो.
अब कर्मचारी संघ अध्यक्ष की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी. यदि प्रशासन को जवाब संतोषजनक नहीं लगता है तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है.
कर्मचारी संघ ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
दूसरी ओर कर्मचारी संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि कर्मचारियों की पदोन्नति, समयमान वेतनमान और भत्तों समेत कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं. संघ पदाधिकारियों का आरोप है कि इन मुद्दों के बीच सोशल मीडिया गतिविधियों को आधार बनाकर कर्मचारी नेतृत्व पर दबाव बनाया जा रहा है.
कर्मचारी पक्ष की ओर से इसे प्रशासनिक कार्रवाई बताया जा रहा है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नोटिस को सेवा नियमों और अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है. दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक स्थिति संबंधित कर्मचारी के जवाब और प्रशासन के अगले निर्णय के बाद स्पष्ट होगी.
आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर
चार नोटिस जारी होने के बाद अब विश्वविद्यालय में सबकी नजर कर्मचारी संघ अध्यक्ष के जवाब पर है. तय समयसीमा में जवाब मिलने के बाद प्रशासन उसके तथ्यों और स्पष्टीकरण का परीक्षण करेगा. इसके बाद मामले में आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी.
दूसरी ओर कर्मचारी संगठन भी मामले को लेकर बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहा है. यदि प्रशासन की ओर से कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है तो कर्मचारी संघ की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी.
फिलहाल रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में विवाद का केंद्र सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणियां और उनके आधार पर जारी किए गए चार कारण बताओ नोटिस हैं. प्रशासन और कर्मचारी संगठन के अलग-अलग रुख के कारण मामला आगे भी चर्चा में रहने की संभावना है.