बिलासपुर. भारतीय रेलवे में टिकटों की कालाबारी और दलाली के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. बिलासपुर मंडल के करगीरोड स्थित रेलवे आरक्षण केंद्र (PRS) में दबिश देकर आरपीएफ ने मुख्य वाणिज्य लिपिक (Chief Commercial Clerk) को दलाली के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. आरोपी कर्मचारी बिना किसी आरक्षण फॉर्म (Requisition Slip) के टिकट जारी कर बाहर के एजेंटों को बेच रहा था.
प्रति यात्री 200 से 300 रुपये का कमीशन
शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार क्लर्क लंबे समय से टिकट दलाली के सिंडिकेट से जुड़ा हुआ था. वह बाहरी एजेंटों के कहने पर तुरंत कन्फर्म टिकट तैयार करता था और इसके एवज में प्रति यात्री 200 से 300 रुपये तक की अवैध दलाली वसूलता था. आरपीएफ ने आरोपी के पास से एक काउंटर टिकट के साथ-साथ उसके मोबाइल से व्हाट्सएप के जरिए भेजे गए 14 अन्य डिजिटल टिकट जब्त किए हैं. कुल 76 हजार रुपये से अधिक के 15 टिकट और मोबाइल फोन जब्त कर आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है.
व्हाट्सएप चैट से हुआ खुलासा
कार्रवाई के दौरान आरपीएफ की टीम ने आरोपी क्लर्क का मोबाइल फोन खंगाला, जिसमें टिकट बुकिंग से जुड़े लेनदेन और सीटों के आदान-प्रदान से संबंधित कई व्हाट्सएप चैट मिले. आरोपी जैतहरी क्षेत्र के एक एजेंट के लिए लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन का टिकट तैयार कर रहा था. पुलिस ने व्हाट्सएप संदेशों के 14 पन्नों का प्रिंटआउट बतौर सबूत तैयार किया है और आरोपी के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत मामला दर्ज कर लिया है.
ओपनिंग डेट और अग्रिम बुकिंग में बड़ी सांठगांठ
हाल ही में रेलवे द्वारा अग्रिम आरक्षण की समय-सीमा 120 दिन से घटाकर 60 दिन किए जाने के बाद से ही दलालों की सक्रियता काफी बढ़ गई है. ओपनिंग डेट पर आम यात्रियों को बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही सेकंड में वेटिंग लिस्ट का सामना करना पड़ता था. इस कार्रवाई से यह बात साफ हो गई है कि आरक्षण केंद्रों के भीतर बैठे कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत के कारण ही आम जनता को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पा रहा था. आरपीएफ अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई अन्य एजेंटों की गिरफ्तारी की संभावना है.