जबलपुर के शैल्बी अस्पताल में महिला की मौत पर हंगामा, एंजियोप्लास्टी के बाद हालत बिगड़ी, वेंटिलेटर पर रखा

जबलपुर के शैल्बी अस्पताल में महिला की मौत पर हंगामा, एंजियोप्लास्टी के बाद हालत बिगड़ी, वेंटिलेटर पर रखा

प्रेषित समय :14:51:26 PM / Thu, Oct 1st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी के जबलपुर में विजयनगर स्थित शैल्बी अस्पताल में 62 वर्षीय महिला की मौत के बाद परिजनों ने इलाज के करीब 3 लाख रुपए के बिल और अचानक तबीयत बिगडऩे को लेकर सवाल उठाए. परिजनों का कहना है कि महिला पेट और पीठ में दर्द के बाद खुद चलकर अस्पताल पहुंची थी. डॉक्टरों ने माइनर हार्ट अटैक बताया और एंजियोप्लास्टी के बाद जरूरत पडऩे पर स्टेंट डालने की बात कही थी. इलाज शुरू होने के कुछ देर बाद महिला की हालत गंभीर बताकर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और शाम करीब 4 बजे मौत की जानकारी दी गई. इसके बाद इलाज और बिल को लेकर परिजनों और अस्पताल प्रबंधन के बीच विवाद हो गया. अस्पताल ने लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए दोबारा अटैक से मौत होने की बात कही है.

पनागर के ग्राम बैहर निवासी जितेंद्र पटेल के के अनुसार बीती दोपहर करीब 2.30 बजे उनकी 62 वर्षीय मां भागवती पटेल को पेट और पीठ में दर्द हुआ था. इसके बाद वे उन्हें अहिंसा चौक स्थित शैल्बी अस्पताल लेकर पहुंचे. परिवार के मुताबिक, डॉक्टरों ने माइनर हार्ट अटैक बताया और कहा कि एंजियोप्लास्टी की जाएगी. जरूरत पडऩे पर स्टेंट डालने की बात भी कही गई थी. इलाज में करीब 3 लाख रुपए का खर्च बताया गया और परिवार को दूसरे कमरे में बैठा दिया गया. इलाज शुरू होने के कुछ ही देर बाद अस्पताल ने महिला की हालत गंभीर बताई और उसे वेंटिलेटर पर रखने की जानकारी दी.

शाम करीब 4 बजे परिजनों को महिला की मौत होने की बात बताई गई और बिल जमा करने के लिए कहा गया. महिला के भतीजे अधिवक्ता महेंद्र पटेल ने आरोप लगाया कि बाद में उन्हें पता चला कि महिला की मौत हो चुकी थी. उनका कहना है कि मरीज को पहले किसी गंभीर परेशानी की जानकारी नहीं दी गई थी. परिजनों ने महिला की अचानक हुई मौत और भारी बिल का विरोध किया. उन्होंने डॉक्टर आशीष तिवारी के व्यवहार पर भी सवाल उठाए. परिजनों का आरोप है कि महिला की मौत के बाद भारी बिल जमा करने का दबाव बनाया गया. जब उन्होंने अस्पताल प्रशासन से बात करने की कोशिश की तो अस्पताल के बाउंसर इक_ा हो गए. इसके बाद परिजनों की तरफ से जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य भी मौके पर पहुंचे, जिससे अस्पताल में गहमागहमी हो गई.

अस्पताल बोला- दोबारा अटैक आने से हुई मौत-

परिजनों ने महिला की मौत को इलाज में लापरवाही का नतीजा बताया है. वहीं अस्पताल के डिप्टी सीईओ अंकित जैन ने आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा, "मरीज की एंजियोप्लास्टी की गई थी. ऐसे मामलों में 24 घंटे का समय बेहद खतरनाक होता है. मरीज को दोबारा अटैक आया, इसकी वजह से उनकी मौत हो गई.
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-