पश्चिम दिशा की ओर मुख्य द्वार वाले मकान को लेकर अक्सर लोगों के मन में वास्तु दोष का डर रहता है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार पश्चिम मुखी घर अपने आप में अशुभ नहीं माना जाता. घर का मुख्य द्वार, कमरों की स्थिति, पानी की व्यवस्था और खुली जगह जैसी चीजों का सही संतुलन महत्वपूर्ण माना जाता है. आइए जानते हैं पश्चिम मुखी मकान से जुड़े प्रमुख वास्तु नियम और आसान उपाय.
पश्चिम मुखी मकान के लिए मुख्य वास्तु नियम
1. मुख्य द्वार की दिशा
वास्तु मान्यताओं के अनुसार पश्चिमी दीवार पर मुख्य द्वार की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है.
मुख्य द्वार को बिल्कुल बीच में रखने के बजाय उत्तर या दक्षिण की ओर कुछ स्थान पर रखने की सलाह दी जाती है.
दक्षिण-पश्चिम कोने में मुख्य द्वार बनाने से बचने की मान्यता है.
मुख्य दरवाजा मजबूत और साफ-सुथरा रखने की सलाह दी जाती है.
दरवाजे पर धार्मिक आस्था के अनुसार ॐ या स्वस्तिक लगाया जा सकता है.
शाम के समय मुख्य द्वार के पास दीपक जलाने की परंपरा भी कई घरों में है.
2. मास्टर बेडरूम कहां हो
मास्टर बेडरूम के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना जाता है.
वास्तु मान्यता के अनुसार सोते समय सिर दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर रखा जा सकता है.
इस दिशा को स्थिरता और आराम से जोड़कर देखा जाता है.
3. रसोई की सही जगह
रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व यानी अग्नि कोण को प्राथमिकता दी जाती है.
यदि पश्चिम दिशा में रसोई बनानी हो तो उत्तर-पश्चिम हिस्से को उपयुक्त माना जाता है.
खाना बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुंह रखने की सलाह वास्तु परंपरा में दी जाती है.
4. पूजा घर के लिए ईशान कोण
पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को सबसे उपयुक्त माना जाता है.
वास्तु मान्यताओं के अनुसार पूजा स्थल को साफ, शांत और व्यवस्थित रखना चाहिए.
पश्चिम दिशा में पूजा घर बनाने से बचने की सलाह कुछ वास्तु परंपराओं में दी जाती है.
5. पढ़ाई और ऑफिस के लिए पश्चिम दिशा
स्टडी रूम या ऑफिस के लिए पश्चिम दिशा को भी उपयुक्त माना जाता है.
वास्तु मान्यता के अनुसार इस स्थान पर पढ़ाई या काम करने से एकाग्रता और कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है.
कार्यस्थल को व्यवस्थित और पर्याप्त रोशनी वाला रखना जरूरी माना जाता है.
6. टॉयलेट और बाथरूम की स्थिति
टॉयलेट या बाथरूम के लिए उत्तर-पश्चिम या दक्षिण दिशा को उपयुक्त माना जाता है.
उत्तर-पूर्व और घर के बीच के हिस्से यानी ब्रह्म स्थान में टॉयलेट बनाने से बचने की सलाह दी जाती है.
पानी और खुली जगह से जुड़े नियम
7. बोरवेल और पानी की टंकी
वास्तु मान्यताओं में बोरवेल और जल स्रोत के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है.
पानी से जुड़ी व्यवस्था को साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है.
8. भारी सामान कहां रखें
भारी अलमारी, तिजोरी और अन्य सामान को पश्चिम या दक्षिण दिशा में रखने की परंपरा है.
घर के उत्तर और पूर्व हिस्से को अपेक्षाकृत हल्का और खुला रखने की सलाह दी जाती है.
9. घर में खुली जगह
वास्तु के अनुसार उत्तर और पूर्व दिशा में अधिक खुली जगह रखना बेहतर माना जाता है.
पश्चिम और दक्षिण दिशा में अपेक्षाकृत ऊंची दीवार या भारी निर्माण को उचित माना जाता है.
पश्चिममुखी घर के आसान वास्तु उपाय
10. मुख्य द्वार बीच में हो तो
यदि मुख्य गेट पश्चिमी दीवार के बिल्कुल बीच में बना है तो कुछ वास्तु परंपराओं में विशेष उपाय बताए जाते हैं.
धार्मिक आस्था के अनुसार दरवाजे के आसपास पंचमुखी हनुमान या वरुण से जुड़े प्रतीक लगाए जा सकते हैं.
11. पश्चिमी दीवार का रंग
पश्चिमी दीवार के लिए सफेद, क्रीम या हल्के नीले जैसे रंगों को उपयुक्त माना जाता है.
बहुत गहरे रंगों से बचने की सलाह दी जाती है.
12. धातु और जल का उपाय
कुछ वास्तु मान्यताओं में पश्चिम दिशा में चांदी या स्टील के कलश में पानी रखने का सुझाव दिया जाता है.
कलश का पानी समय-समय पर बदलने की सलाह दी जाती है.
13. तुलसी का पौधा
उत्तर-पूर्व दिशा में तुलसी का पौधा लगाने की धार्मिक परंपरा है.
तुलसी को घर की सकारात्मकता और धार्मिक वातावरण से जोड़कर देखा जाता है.
14. रसोई में शीशे का इस्तेमाल
यदि रसोई पश्चिम दिशा में है तो गैस के ठीक पीछे शीशा लगाने से बचने की सलाह दी जाती है.
वास्तु मान्यताओं में आग के प्रतिबिंब को उचित नहीं माना जाता.
पश्चिममुखी घर को लेकर तीन जरूरी बातें
15. पश्चिम दिशा को अशुभ मानना जरूरी नहीं
पश्चिममुखी मकान को केवल दिशा के आधार पर अशुभ नहीं माना जाना चाहिए.
वास्तु परंपरा में घर के पूरे नक्शे और अलग-अलग हिस्सों की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है.
16. शाम के समय घर की व्यवस्था
पश्चिम दिशा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में शाम के समय दीपक जलाने और घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की परंपरा बताई जाती है.
पूजा, शंख या अन्य धार्मिक गतिविधियां पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं.
17. घर का बीच वाला हिस्सा रखें हल्का
घर के बीच के हिस्से को ब्रह्म स्थान कहा जाता है.
वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर भारी सामान, अनावश्यक निर्माण या बड़े अवरोध से बचना चाहिए.
इसे साफ और अपेक्षाकृत खुला रखने की सलाह दी जाती है.
क्या पश्चिममुखी घर में सुख-समृद्धि नहीं होती
वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में पश्चिम दिशा को अपने आप में खराब नहीं माना जाता. घर का नक्शा, मुख्य द्वार की स्थिति, कमरे, जल स्रोत, खुली जगह और निर्माण की स्थिति को मिलाकर वास्तु का आकलन करने की परंपरा है.
इसलिए केवल यह देखकर कि मकान पश्चिममुखी है, उसे दोषपूर्ण मानना उचित नहीं है. वास्तविक जीवन में घर की गुणवत्ता, रोशनी, वेंटिलेशन, सुरक्षा और सुविधाओं जैसे व्यावहारिक पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं.
नोट: ऊपर बताए गए नियम वास्तु और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इनके वैज्ञानिक रूप से सिद्ध होने का दावा नहीं किया जा सकता. अलग-अलग वास्तु परंपराओं में नियम और उपाय अलग हो सकते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

