शिक्षा डेस्क. 10वीं पास करने के बाद आर्थिक मजबूरियों, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य कारणों से पढ़ाई छोड़कर नौकरी करने वाले युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र से महत्वपूर्ण खबर सामने आई है. अब ऐसे कामकाजी लोग नौकरी छोड़े बिना तकनीकी डिप्लोमा की पढ़ाई कर सकेंगे. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद यानी AICTE ने कामकाजी पेशेवरों के लिए डिप्लोमा शिक्षा का रास्ता आसान करने की पहल की है.
इस व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों को आगे पढ़ने का अवसर देना है, जिन्होंने 10वीं के बाद इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, कंस्ट्रक्शन या दूसरे तकनीकी क्षेत्रों में काम शुरू कर दिया और अब अपने कौशल को औपचारिक शिक्षा से जोड़ना चाहते हैं. AICTE ने इसके लिए Working Professional श्रेणी के तहत प्रवेश व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
इस फैसले की खास बात यह है कि नौकरी कर रहे व्यक्ति को पढ़ाई के लिए अपनी वर्तमान नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं होगी. उनके काम के अनुभव को भी प्रवेश प्रक्रिया में महत्व दिया जाएगा. इससे उन लोगों के लिए तकनीकी शिक्षा का रास्ता खुल सकता है, जो नियमित कॉलेज जाने में सक्षम नहीं हैं.
10वीं के बाद काम शुरू करने वालों को मिलेगा मौका
देश में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो 10वीं या उसके आसपास की पढ़ाई के बाद परिवार की आर्थिक जरूरतों के कारण काम शुरू कर देते हैं. इनमें कोई इलेक्ट्रिशियन के साथ हेल्पर के रूप में काम करता है, कोई मशीन ऑपरेटर के तौर पर, तो कोई निर्माण क्षेत्र में तकनीकी काम सीखता है.
समय के साथ इनमें से कई लोग अपने काम में अनुभव हासिल कर लेते हैं, लेकिन उनके पास उस काम से संबंधित औपचारिक तकनीकी योग्यता नहीं होती. यही स्थिति आगे बढ़ने में बाधा बन सकती है.
AICTE की नई पहल इसी अंतर को कम करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है. अब काम के अनुभव के साथ तकनीकी डिप्लोमा हासिल करने का अवसर मिलने से ऐसे लोगों को अपने कौशल को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने का मौका मिलेगा.
एक साल का अनुभव होगा जरूरी
इस व्यवस्था के तहत केवल 10वीं पास होना पर्याप्त नहीं होगा. कामकाजी उम्मीदवार के पास संबंधित क्षेत्र में कम से कम एक वर्ष का कार्य अनुभव होना जरूरी होगा.
यानी जिस व्यक्ति ने इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, कंस्ट्रक्शन या संबंधित तकनीकी क्षेत्र में काम किया है, उसे अपने अनुभव का प्रमाण देना होगा. इसके लिए जिस संस्थान, कंपनी या MSME में वह काम कर रहा है, वहां से अनुभव प्रमाणपत्र लेना होगा.
इसके साथ ही उम्मीदवार को संस्थान या नियोक्ता की ओर से NOC यानी अनापत्ति प्रमाणपत्र भी देना होगा. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित व्यक्ति नौकरी के साथ पढ़ाई कर सके और उसके रोजगार पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
इस तरह प्रवेश प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता के साथ वास्तविक कार्य अनुभव को भी महत्व दिया जाएगा.
आसपास के पॉलीटेक्निक और तकनीकी संस्थानों में प्रवेश
कामकाजी लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अक्सर पढ़ाई और नौकरी के बीच तालमेल की होती है. दिन में नियमित कक्षाएं होने पर नौकरी करने वाले व्यक्ति के लिए कॉलेज जाना मुश्किल हो सकता है.
इसी वजह से इस व्यवस्था में कामकाजी उम्मीदवारों के लिए आसपास के पॉलीटेक्निक या AICTE से मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थानों में पढ़ाई का विकल्प रखा गया है. ऐसे संस्थानों में शाम, रात या वीकेंड के दौरान कक्षाएं संचालित किए जाने की व्यवस्था हो सकती है.
इसका सीधा फायदा यह होगा कि उम्मीदवार को नौकरी और पढ़ाई में से किसी एक को चुनने की मजबूरी कम होगी. वह अपनी नौकरी जारी रखते हुए निर्धारित समय के अनुसार डिप्लोमा की कक्षाओं में शामिल हो सकेगा.
हालांकि, अलग-अलग संस्थानों में उपलब्ध पाठ्यक्रम, कक्षा का समय और सीटों की स्थिति अलग हो सकती है. इसलिए उम्मीदवारों को प्रवेश से पहले संबंधित संस्थान की जानकारी और लागू नियमों की जांच करनी होगी.
प्रवेश में मेरिट और परीक्षा की व्यवस्था
AICTE की ओर से राज्यों को इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रवेश मेरिट और प्रवेश परीक्षा के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया के जरिए किया जा सकता है.
महत्वपूर्ण बात यह है कि संस्थान स्तर पर अलग से मनमानी प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जानी चाहिए. प्रवेश की प्रक्रिया राज्य स्तर पर निर्धारित व्यवस्था और केंद्रीय काउंसलिंग के माध्यम से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं.
इससे उम्मीदवारों को अलग-अलग संस्थानों में अलग नियमों के कारण होने वाली परेशानी कम हो सकती है. साथ ही प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है.
पॉलीटेक्निक और विश्वविद्यालयों को करना होगा नियमों का पालन
नई व्यवस्था सिर्फ चुनिंदा संस्थानों तक सीमित नहीं होगी. राज्यों को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले AICTE से स्वीकृत डिप्लोमा संस्थानों में नियम लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं.
इनमें पॉलीटेक्निक संस्थानों के साथ पात्र विश्वविद्यालय और अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थान भी शामिल हो सकते हैं. नए शैक्षणिक सत्र के दौरान प्रवेश प्रक्रिया में कामकाजी पेशेवरों के लिए निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य और संस्थानों की होगी.
इसका मतलब यह है कि उम्मीदवारों को किसी भी संस्थान में सीधे जाकर अपनी सुविधा के अनुसार प्रवेश लेने के बजाय राज्य की आधिकारिक प्रवेश प्रक्रिया और संबंधित संस्थान के नियमों का पालन करना होगा.
नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं
इस पूरी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नौकरी और पढ़ाई को एक साथ जारी रखने का अवसर है. आमतौर पर तकनीकी डिप्लोमा करने के लिए नियमित कक्षाओं में शामिल होना पड़ता है. ऐसे में नौकरी कर रहे लोगों के लिए आगे की पढ़ाई मुश्किल हो जाती है.
अब शाम, रात या वीकेंड बैच जैसे विकल्प कामकाजी उम्मीदवारों के लिए उपयोगी हो सकते हैं. हालांकि कक्षा का वास्तविक समय और उपलब्धता संबंधित संस्थान के अनुसार अलग हो सकती है.
इस मॉडल से उन लोगों को खास फायदा मिल सकता है जो पहले से किसी तकनीकी काम में दक्षता हासिल कर चुके हैं, लेकिन प्रमाणित डिप्लोमा नहीं होने के कारण बेहतर अवसरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.
करियर में आगे बढ़ने का रास्ता हो सकता है आसान
तकनीकी क्षेत्र में अनुभव के साथ औपचारिक योग्यता का अपना महत्व है. किसी कंपनी में लंबे समय से काम कर रहा व्यक्ति यदि संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा हासिल करता है, तो उसके लिए अपने कौशल को प्रमाणित करने का अवसर बढ़ सकता है.
इससे निजी क्षेत्र में बेहतर पदों के लिए आवेदन करने, जिम्मेदारी वाले काम पाने या कंपनी के भीतर करियर ग्रोथ के अवसरों में मदद मिल सकती है. हालांकि नौकरी, प्रमोशन या वेतन में बढ़ोतरी किसी डिप्लोमा से स्वतः सुनिश्चित नहीं होती. यह संबंधित कंपनी की भर्ती नीति और उम्मीदवार की योग्यता पर निर्भर करेगा.
इसी तरह सरकारी नौकरी के मामले में भी संबंधित भर्ती विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा.
आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने वालों के लिए अहम अवसर
AICTE की यह पहल खास तौर पर उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जिन्होंने पढ़ाई जारी रखने के बजाय कम उम्र में नौकरी शुरू कर दी थी. कई परिवारों में 10वीं के बाद बच्चों को कमाई में हाथ बंटाना पड़ता है.
ऐसे युवाओं के सामने अक्सर दो विकल्प होते हैं—नौकरी जारी रखें या फिर पढ़ाई के लिए नौकरी छोड़ दें. दोनों को एक साथ संभालना सामान्य शिक्षा व्यवस्था में आसान नहीं होता.
वर्किंग प्रोफेशनल श्रेणी इस समस्या का एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध करा सकती है. उम्मीदवार नौकरी जारी रखते हुए अपने काम से जुड़े तकनीकी क्षेत्र में डिप्लोमा हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है.
किन बातों का रखना होगा ध्यान
इस अवसर का लाभ लेने से पहले उम्मीदवारों को कुछ जरूरी बातों की जानकारी हासिल करनी होगी. सबसे पहले यह देखना होगा कि उनका कार्य अनुभव संबंधित डिप्लोमा पाठ्यक्रम से जुड़ा है या नहीं. इसके बाद अनुभव प्रमाणपत्र और NOC जैसे दस्तावेज तैयार रखने होंगे.
साथ ही संबंधित राज्य की प्रवेश प्रक्रिया, काउंसलिंग कार्यक्रम, उपलब्ध सीटें, पाठ्यक्रम, फीस और कक्षा के समय की जानकारी भी जांचनी होगी.
सिर्फ सोशल मीडिया या अनौपचारिक जानकारी के आधार पर प्रवेश लेने के बजाय उम्मीदवारों को AICTE, संबंधित राज्य तकनीकी शिक्षा विभाग और संस्थान की आधिकारिक सूचना को आधार बनाना चाहिए.
10वीं के बाद रुकी पढ़ाई को मिल सकता है नया मोड़
AICTE की वर्किंग प्रोफेशनल व्यवस्था उन लोगों के लिए शिक्षा का दूसरा मौका बन सकती है, जिनकी पढ़ाई 10वीं के बाद किसी कारण से रुक गई थी. खासकर तकनीकी काम कर रहे युवाओं के लिए यह व्यवस्था उनके मौजूदा अनुभव को औपचारिक शिक्षा के साथ जोड़ने का अवसर देती है.
नौकरी के साथ डिप्लोमा हासिल करने की संभावना उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई छोड़ चुके हैं लेकिन अब अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं.
हालांकि इस व्यवस्था की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्यों और तकनीकी संस्थानों में इसे कितनी प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाता है. उम्मीदवारों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे अपनी पात्रता, अनुभव, दस्तावेज और राज्य स्तर की प्रवेश प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी जुटाएं.
कुल मिलाकर, 10वीं के बाद तकनीकी क्षेत्र में काम शुरू कर चुके युवाओं के लिए यह पहल काम के अनुभव और औपचारिक तकनीकी शिक्षा के बीच एक नया पुल तैयार करने की कोशिश है. नौकरी छोड़े बिना आगे की पढ़ाई का रास्ता खुलने से उन कामकाजी लोगों को अपने कौशल को नई दिशा देने का अवसर मिल सकता है, जिन्होंने कभी परिस्थितियों के कारण अपनी शिक्षा बीच में रोक दी थी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

