NDA में चिराग पासवान का दबाव बढ़ा, बोले समर्थन है समर्पण नहीं लंबित मांगों पर सरकार को संदेश

NDA में चिराग पासवान का दबाव बढ़ा, बोले समर्थन है समर्पण नहीं लंबित मांगों पर सरकार को संदेश

प्रेषित समय :16:17:49 PM / Sun, Oct 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

पटना. बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA की सरकार के बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान के तेवर ने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है. राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी ही गठबंधन सरकार पर सवाल उठाने के बाद चिराग पासवान अब सहयोगी दल की भूमिका, उसकी मांगों और सरकार के साथ रिश्तों को लेकर भी चर्चा के केंद्र में हैं.

चिराग पासवान ने हालिया बातचीत में बिहार में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा कि सरकार का हिस्सा होने के कारण वह इस स्थिति से खुद को अलग नहीं कर सकते. उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसी घटनाओं के बीच सरकार का हिस्सा होने पर उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है. उनका यह बयान जमुई और समस्तीपुर समेत कई जिलों में महिलाओं से जुड़ी घटनाओं के बाद सामने आया.

राजनीतिक विश्लेषण में चिराग के इन बयानों को केवल कानून-व्यवस्था पर नाराजगी के तौर पर नहीं देखा जा रहा. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, LJP (रामविलास) की कुछ पुरानी मांगें भी बिहार सरकार के स्तर पर लंबित हैं. इनमें चौकीदार-दफादार की भर्ती, दिवंगत राम विलास पासवान की प्रतिमा स्थापित करने और पटना की किसी प्रमुख सड़क का नाम उनके नाम पर रखने जैसी मांगें शामिल हैं. पार्टी के पास बिहार विधानसभा में 19 विधायक और लोकसभा में पांच सांसद हैं.

कानून-व्यवस्था पर खुलकर सरकार को घेरा
चिराग पासवान ने बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर जिस तरह खुलकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, उसने गठबंधन की राजनीति में चर्चा पैदा की है. उनका कहना है कि राज्य में आम लोग, खासकर महिलाएं, खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार में सहयोगी होने के नाते वह इस सवाल से बच नहीं सकते. उनके मुताबिक, यदि सरकार नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा नहीं दे पा रही है तो सहयोगी दल के नेता के तौर पर सवाल उठाना जरूरी है.

चिराग के इस रुख को लेकर विपक्ष ने भी उन्हें घेरने की कोशिश की. RJD की ओर से सवाल उठाया गया कि यदि वह सरकार की कार्यप्रणाली से इतने असंतुष्ट हैं तो फिर सरकार का हिस्सा क्यों बने हुए हैं. इस तरह चिराग की आलोचना अब NDA के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का विषय बन गई है.

लंबित मांगों का मुद्दा भी चर्चा में
चिराग पासवान की नाराजगी के बीच उनकी पार्टी की उन मांगों की चर्चा भी तेज हुई है, जिन पर लंबे समय से फैसला नहीं होने की बात कही जा रही है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, LJP (रामविलास) की ओर से चौकीदार और दफादार के पदों पर भर्ती की मांग उठाई जाती रही है. पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि इन पदों की मांग करने वाले लोगों में उसके समर्थकों की संख्या भी महत्वपूर्ण है. इसके अलावा राम विलास पासवान की प्रतिमा लगाने और पटना में किसी प्रमुख सड़क का नाम उनके नाम पर रखने की मांग भी बताई गई है.

पार्टी के भीतर यह तर्क दिया जा रहा है कि सरकार में शामिल होने के बावजूद यदि समर्थकों से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो उसका राजनीतिक असर पड़ सकता है. हालांकि इन मांगों पर सरकार की ओर से अंतिम निर्णय या समयसीमा को लेकर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.

चौकीदार-दफादार भर्ती क्यों अहम
चौकीदार और दफादार की भर्ती का मुद्दा केवल सरकारी नियुक्ति तक सीमित नहीं माना जा रहा. LJP (रामविलास) से जुड़े नेताओं के अनुसार इन पदों को लेकर पार्टी के समर्थकों के बीच लंबे समय से उम्मीद बनी हुई है.

पार्टी के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका संबंध उसके सामाजिक और राजनीतिक आधार से जोड़ा जाता है. ऐसे में चिराग पासवान के लिए सरकार के भीतर रहते हुए अपने समर्थकों से जुड़े मुद्दों को उठाना संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

हालांकि यह कहना कि कानून-व्यवस्था पर चिराग का पूरा रुख केवल इन मांगों को मनवाने के लिए है, एक राजनीतिक व्याख्या होगी. उनके सार्वजनिक बयानों में महिला सुरक्षा और अपराध को लेकर वास्तविक चिंता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है.

‘समर्थन है, समर्पण नहीं’ का संदेश
चिराग पासवान के मौजूदा तेवर को समझने के लिए NDA में सहयोगी दल की भूमिका का सवाल महत्वपूर्ण है. LJP (रामविलास) भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन पार्टी नेतृत्व लगातार यह संकेत देता रहा है कि गठबंधन में शामिल होना अपनी राजनीतिक पहचान और मुद्दों को छोड़ देना नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में LJP (रामविलास) के रुख को इस विचार से जोड़ा गया है कि सहयोगी दलों से समर्थन की अपेक्षा की जा सकती है, लेकिन उनसे अपने राजनीतिक मुद्दों पर पूरी तरह समर्पण की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए.

यही वजह है कि चिराग का मौजूदा रुख केवल सरकार की आलोचना के तौर पर नहीं, बल्कि NDA के भीतर अपनी पार्टी की भूमिका और प्रभाव को रेखांकित करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है.

पांच सांसद और 19 विधायक वाली पार्टी
LJP (रामविलास) के पास लोकसभा में पांच सांसद हैं. बिहार विधानसभा में पार्टी के 19 विधायक हैं. इस संख्या के कारण बिहार की सत्ता संरचना में पार्टी की भूमिका को नजरअंदाज करना आसान नहीं है.

चिराग के सार्वजनिक बयानों से यह संकेत जरूर मिलता है कि वह सरकार में रहते हुए भी अपनी पार्टी की अलग राजनीतिक आवाज बनाए रखना चाहते हैं. यही वजह है कि कानून-व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उनकी आलोचना को सामान्य प्रशासनिक टिप्पणी से आगे राजनीतिक महत्व दिया जा रहा है.

हालांकि, इन बयानों से गठबंधन में तत्काल किसी टूट या अलगाव का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगा. चिराग पासवान ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि उनकी पार्टी NDA से अलग हो रही है.

सरकार से टकराव या दबाव की रणनीति
चिराग के तेवर को लेकर दो तरह की राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं. एक तरफ इसे बिहार में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर वास्तविक असंतोष के रूप में देखा जा रहा है. दूसरी तरफ इसे गठबंधन सरकार के भीतर अपनी पार्टी की मांगों को अधिक मजबूती से रखने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से कहा गया है कि छोटे सहयोगी दलों को अपने मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए मुखर रहना पड़ता है और सरकार में उनकी भूमिका के अनुरूप उन्हें अपनी बात रखने की जगह चाहिए.

इससे साफ है कि चिराग की राजनीति में सरकार के भीतर रहते हुए सरकार से सवाल पूछने की रणनीति दिखाई दे रही है.

महिलाओं की सुरक्षा बनी तत्काल वजह
चिराग पासवान की मौजूदा नाराजगी का तत्काल कारण बिहार में महिलाओं और बच्चियों से जुड़ी घटनाएं हैं. उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही घटनाओं से महिलाओं के बीच असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है.

उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों में कानून का डर होना चाहिए. उनका कहना था कि यदि पुलिस का भय ही समाप्त हो जाए तो कानून-व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

उनका यह बयान ऐसे समय आया जब बिहार में महिलाओं से जुड़ी कई घटनाओं को लेकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा हुआ है.

NDA के भीतर आगे की तस्वीर पर नजर
चिराग पासवान के बयानों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार सरकार और NDA नेतृत्व उनकी आपत्तियों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है. खास तौर पर कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और उनकी पार्टी की लंबित मांगों को लेकर सरकार क्या कदम उठाती है, इस पर नजर रहेगी.

फिलहाल उपलब्ध संकेतों से इतना स्पष्ट है कि चिराग पासवान सरकार के सहयोगी बने हुए हैं, लेकिन अपनी पार्टी के मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाने से पीछे नहीं हट रहे हैं. उनकी पार्टी की राजनीतिक स्थिति भी उन्हें गठबंधन के भीतर अपनी बात मजबूती से रखने का आधार देती है.

ऐसे में चिराग का मौजूदा रुख NDA से दूरी बनाने के बजाय गठबंधन के भीतर अपनी राजनीतिक जगह और प्रभाव को स्पष्ट करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है. हालांकि आगे यह रणनीति किस दिशा में जाती है, यह सरकार की प्रतिक्रिया और LJP (रामविलास) की लंबित मांगों पर होने वाली कार्रवाई से काफी हद तक स्पष्ट होगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-