-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
इंदिरा एकादशी- 6 अक्टूबर 2026
अच्युतम केशवम रामनारायणम, कृष्ण दामोदरम् वासुदेवम् हरे.
श्रीधरम् माधवम् गोपिकावल्लभम, जानकी नायकम श्रीरामचन्द्रम् भजे..
आज का पंचांग
वार- सोमवार
तिथि- आश्विन कृष्ण पक्ष दशमी, जो 6 अक्टूबर की देर रात तक रहेगी और इसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ होगी.
नक्षत्र- पुष्य
योग- शिव
करण- वणिज
पक्ष- कृष्ण पक्ष
विक्रम संवत- 2083
शक संवत- 1948
ऋतु- शरद
अयन- दक्षिणायन
चंद्र राशि- कर्क
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय- लगभग सुबह 6:15 बजे
सूर्यास्त- लगभग शाम 6:03 बजे
ब्रह्म मुहूर्त- लगभग सुबह 4:30 से 5:18 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- लगभग सुबह 11:40 से दोपहर 12:28 बजे तक
राहुकाल- लगभग सुबह 7:35 से 9:05 बजे तक
आज का चौघड़िया
अमृत- सुबह 6:15 से 7:43 बजे तक
काल- सुबह 7:43 से 9:12 बजे तक
शुभ- सुबह 9:12 से 10:41 बजे तक
रोग- सुबह 10:41 से दोपहर 12:10 बजे तक
उद्वेग- दोपहर 12:10 से 1:38 बजे तक
चर- दोपहर 1:38 से 3:07 बजे तक
लाभ- दोपहर 3:07 से 4:35 बजे तक
अमृत- शाम 4:35 से 6:03 बजे तक
रात्रि चौघड़िया
चर- शाम 6:03 से 7:35 बजे तक
रोग- शाम 7:35 से 9:06 बजे तक
काल- रात 9:06 से 10:38 बजे तक
लाभ- रात 10:38 से मध्यरात्रि 12:10 बजे तक
उद्वेग- रात 12:10 से 1:42 बजे तक
शुभ- रात 1:42 से 3:14 बजे तक
अमृत- रात 3:14 से 4:45 बजे तक
चर- सुबह 4:45 से 6:16 बजे तक
जीवन में कामयाबी के लिए नियमित रूप से विष्णुदेव की पूजा करें.
धर्मग्रंथों में... जीवन में सुख के लिए एकादशी व्रत-पूजा को उत्तम मार्ग बताया है.
जो श्रद्धालु यह व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें दशमी को एक बार भोजन करना चाहिए.
एकादशी के दिन पवित्र स्नानादि के पश्चात गंगा जल, तुलसी दल, तिल, फूल, पंचामृत आदि से भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए.
इस व्रत में व्रत रखने वाले श्रद्धालु को यथासंभव बिना जल के रहना चाहिए.
अगर व्रती श्रद्धालु चाहें तो संध्याकाल में दीपदान के पश्चात फलाहार ग्रहण कर सकते हैं.
क्योंकि सुख के लिए यह व्रत है इसलिए यथासंभव पति-पत्नी, दोनों को व्रत रखना चाहिए.
इंदिरा एकादशी पितृपक्ष में आने वाली महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों के स्मरण, तर्पण और श्रद्धानुसार धार्मिक कर्म किए जाते हैं. 6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा.
आज दशमी तिथि होने के कारण एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए दशमी के दिन सात्विक भोजन करने और संयम बरतने की परंपरा है.
यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रंथों से साभार ली गई हैं. स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिषविद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

