135 साल पुरानी लाइब्रेरी को जगह नहीं मिली तो सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान, 8.5 लाख किताबों के भविष्य पर सोमवार को सुनवाई

135 साल पुरानी लाइब्रेरी को जगह नहीं मिली तो सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान, 8.5 लाख किताबों के भविष्य पर सोमवार को सुनवाई

प्रेषित समय :16:45:38 PM / Sun, Oct 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. देश की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण सरकारी लाइब्रेरी में शामिल सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी (CSL) के भविष्य को लेकर उठे सवाल अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं. 1891 में स्थापित इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत शास्त्री भवन खाली करने का निर्देश दिया गया है. इसी बीच यह सवाल उठा कि शास्त्री भवन के बाद करीब 8.5 लाख पुस्तकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों वाले इस संस्थान के लिए नई जगह कहां होगी. मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है और सोमवार को जस्टिस संजय कुमार तथा जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ सुनवाई करेगी.

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दर्ज मामले का शीर्षक “In Re: 135-Yr-Old Library 8.5 Lakh Books - And No Room In The New Central Vista Plan” बताया गया है. रजिस्ट्री के अनुसार मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बाद नए स्वत: संज्ञान वाले रिट याचिका मामले के रूप में इसे दर्ज किया गया है. हालांकि अदालत ने अभी इस मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है.

17 सितंबर को मिला था भवन खाली करने का आदेश
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी फिलहाल दिल्ली के शास्त्री भवन परिसर में संचालित होती है. सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट यानी CPWD ने 17 सितंबर को शास्त्री भवन में मौजूद मंत्रालयों और विभागों को परिसर खाली करने का निर्देश दिया था.

निर्देश में फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दूसरी सामग्री हटाकर भवन को खाली कब्जे में देने को कहा गया था, ताकि मौजूदा भवन को हटाकर नए सचिवालय भवनों के निर्माण का रास्ता साफ किया जा सके. रिपोर्टों के मुताबिक लाइब्रेरी को भी सितंबर के अंत तक परिसर खाली करने की स्थिति का सामना करना पड़ा.

शास्त्री भवन की जगह सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नए Kartavya Bhawan 4 और 5 बनाए जाने हैं. दोनों भवनों का निर्माण सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के अगले चरण का हिस्सा है.

चार मंजिलों में फैली है लाइब्रेरी
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी शास्त्री भवन की चार मंजिलों में फैली हुई है और करीब 5,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में इसका संचालन होता है. यहां करीब 8.5 लाख किताबें और दस्तावेज होने की जानकारी सामने आई है.

यह सिर्फ सामान्य पुस्तकालय नहीं है. यहां पुराने सरकारी रिकॉर्ड, गजट, दुर्लभ पुस्तकें और प्रशासनिक इतिहास से जुड़ी सामग्री मौजूद है. सरकारी अधिकारी, शोधकर्ता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी भी इस संग्रह का इस्तेमाल करते हैं.

इसी वजह से लाइब्रेरी के स्थानांतरण का सवाल केवल एक कार्यालय को दूसरी जगह ले जाने तक सीमित नहीं है. इतनी बड़ी संख्या में पुस्तकों और पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए उचित भंडारण, संरक्षण और तापमान नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं की भी जरूरत होगी.

1891 में कोलकाता से शुरू हुई थी कहानी
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी का इतिहास ब्रिटिश भारत के प्रशासनिक इतिहास से जुड़ा है. इसकी स्थापना 1891 में हुई थी और उस समय इसे Imperial Secretariat Library के नाम से जाना जाता था.

1911 में ब्रिटिश सरकार ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने का फैसला किया. इसके बाद लाइब्रेरी भी दिल्ली लाई गई. शुरुआत में इसे दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित ओल्ड सेक्रेटेरिएट भवन में रखा गया.

बाद में रायसीना हिल क्षेत्र में नए सरकारी भवन तैयार होने के साथ लाइब्रेरी को नॉर्थ ब्लॉक और फिर शास्त्री भवन में स्थानांतरित किया गया. 1969 से यह शास्त्री भवन में संचालित हो रही है.

इस तरह वर्तमान विवाद सिर्फ एक पुराने भवन को खाली करने का मामला नहीं है, बल्कि 135 साल से अधिक पुराने संस्थान के भविष्य से जुड़ा हुआ है.

सरकार ने कहा नई जगह का प्रावधान है
लाइब्रेरी को लेकर खबरें सामने आने के बाद केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय यानी MoHUA ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की. मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि उन खबरों के विपरीत, जिनमें लाइब्रेरी के लिए नई जगह नहीं होने की बात कही गई थी, Kartavya Path redevelopment plan में Central Secretariat Library के लिए जगह का प्रावधान किया गया है.

मंत्रालय के अनुसार लाइब्रेरी के निर्माण से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया चल रही है. हालांकि मंत्रालय की ओर से उस समय नई लाइब्रेरी का विस्तृत पता या पूरी सुविधा का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया था.

यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को जटिल बनाया है. एक तरफ सरकार कह रही है कि नई जगह का प्रावधान है, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा भवन खाली कराने की प्रक्रिया और नई सुविधा के पूरी तरह तैयार होने के बीच का अंतर सवाल पैदा कर रहा है.

चार मंजिल की जगह कितनी जगह मिलेगी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक लाइब्रेरी के लिए Kartavya Bhawan-2 परिसर में सीमित जगह उपलब्ध कराने की बात सामने आई थी. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मौजूदा लाइब्रेरी चार मंजिलों में फैली है, जबकि नई जगह को लेकर पर्याप्तता पर सवाल उठे हैं.

यही वजह है कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है. अदालत के सामने यह सवाल महत्वपूर्ण हो सकता है कि इतनी बड़ी ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व की लाइब्रेरी के संग्रह को सुरक्षित रखने के लिए प्रस्तावित नई व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं.

पहले भी किताबों के अटकने का मामला सामने आया
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के सामने मौजूदा संकट के बीच इसके क्षेत्रीय भाषा अनुभाग की किताबों का पुराना मामला भी चर्चा में आया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार लाइब्रेरी की दो लाख से अधिक क्षेत्रीय भाषा की किताबें 2011 में दिल्ली मेट्रो निर्माण के कारण स्थानांतरण के बाद लंबे समय से बक्सों में पड़ी हैं.

यह उदाहरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी लाइब्रेरी को अस्थायी तौर पर स्थानांतरित करने के बाद यदि स्थायी व्यवस्था समय पर नहीं बनती, तो किताबों और दस्तावेजों के संरक्षण पर असर पड़ सकता है.

सेंट्रल विस्टा में तेजी से बदल रहा सरकारी ढांचा
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत दिल्ली के प्रशासनिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव किया जा रहा है. शास्त्री भवन और कृषि भवन को हटाकर नए सचिवालय भवनों के निर्माण की योजना है.

Kartavya Bhawan 1, 2 और 3 पहले ही तैयार होकर उपयोग में आ चुके हैं. अब Kartavya Bhawan 4 और 5 के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. शास्त्री भवन और कृषि भवन की जगह इन्हीं भवनों को विकसित किया जाना है.

सरकार का उद्देश्य मंत्रालयों को आधुनिक और एकीकृत कार्यालय परिसरों में स्थानांतरित करना है. लेकिन इसी पुनर्विकास के बीच ऐतिहासिक संस्थानों और उनके रिकॉर्ड के सुरक्षित स्थानांतरण की चुनौती भी सामने आ रही है.

सोमवार की सुनवाई पर टिकी नजर
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई तय की है. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ मामले को सुनेगी.

अदालत के सामने लाइब्रेरी की मौजूदा स्थिति, भवन खाली कराने की प्रक्रिया, वैकल्पिक स्थान और करीब 8.5 लाख पुस्तकों तथा ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण से जुड़े सवाल आ सकते हैं.

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या निर्देश देगा. लेकिन 135 साल पुराने इस संस्थान के मामले में स्वत: संज्ञान लिए जाने से यह स्पष्ट है कि सेंट्रल विस्टा के निर्माण के बीच एक ऐतिहासिक लाइब्रेरी के भविष्य का सवाल अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है.

सरकार का कहना है कि लाइब्रेरी के लिए नई जगह का प्रावधान किया गया है और निर्माण की प्रक्रिया चल रही है. दूसरी ओर, अदालत अब इस पूरे मामले को सुनने जा रही है. ऐसे में सोमवार की सुनवाई से यह साफ होने की उम्मीद है कि सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी और उसके विशाल ऐतिहासिक संग्रह के सुरक्षित भविष्य के लिए आगे क्या व्यवस्था की जाती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-