नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की आगामी बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर बाजार में चर्चा तेज हो गई है. अर्थशास्त्रियों के एक वर्ग का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का रास्ता अपना सकता है.
पहले ऐसी संभावना दिसंबर की बैठक के लिए जताई जा रही थी, लेकिन अब अक्टूबर में ही 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान सामने आया है.
महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा की कीमतों में तेजी, खाद्य महंगाई और व्यापक महंगाई के दबाव के कारण RBI के सामने दरों को सख्त करने का विकल्प मजबूत हुआ है.
BofA के अनुमान के मुताबिक, केंद्रीय बैंक अक्टूबर की MPC बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि कर सकता है. रिपोर्ट में लंबे समय तक चली मौद्रिक नरमी के बाद नीति समर्थन वापस लेने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है.
SBI रिसर्च ने भी जताई दर बढ़ने की संभावना
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में भी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का जोखिम पहले की तुलना में अधिक बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई का बढ़ता दबाव, वैश्विक परिस्थितियां, बाजार में नकदी की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय जोखिमों में बदलाव RBI के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं.
इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित तेजी भी केंद्रीय बैंक के लिए चुनौती बनी हुई है.
महंगाई के आंकड़ों पर भी नजर
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, CPI आधारित महंगाई जुलाई के 4.45 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.82 प्रतिशत हो गई. वहीं, मौसम और बारिश से जुड़ी अनिश्चितताएं आगे खाद्य कीमतों पर असर डाल सकती हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी से भी भारत के आर्थिक माहौल पर दबाव बढ़ सकता है.
अगर रेपो रेट बढ़ा तो आम लोगों पर क्या असर होगा?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए पैसा उपलब्ध कराता है. इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों के लिए फंडिंग महंगी हो सकती है और इसका असर आगे चलकर लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है.
ऐसी स्थिति में होम लोन, कार लोन या अन्य फ्लोटिंग-रेट कर्ज की EMI बढ़ने की संभावना रहती है. हालांकि वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक अपनी ब्याज दरों में कितना बदलाव करते हैं.
कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद?
नोमुरा के विश्लेषकों के अनुसार मौजूदा चक्र में RBI की संभावित दर वृद्धि सीमित रह सकती है. उनके अनुमान में कुल बढ़ोतरी करीब 25 से 50 बेसिस पॉइंट के दायरे में रह सकती है.
बाजार में इससे अधिक सख्ती की चर्चाओं के बावजूद नोमुरा ने सीमित दर वृद्धि की संभावना को अधिक माना है.
क्या होता है 25 बेसिस पॉइंट?
100 बेसिस पॉइंट = 1 प्रतिशत अंक के बराबर होते हैं. इसलिए 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का मतलब ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत अंक की वृद्धि है.
अब सबकी नजर MPC की बैठक पर है. RBI का वास्तविक फैसला महंगाई, तेल की कीमतों, घरेलू आर्थिक गतिविधियों और वैश्विक परिस्थितियों समेत कई आर्थिक संकेतकों के आकलन के बाद सामने आएगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

