* प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963
6 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है. इस दिन इंदिरा एकादशी और एकादशी श्राद्ध का संयोग है. पंचांग गणना के अनुसार एकादशी तिथि 7 अक्टूबर की मध्यरात्रि के बाद तक रहेगी.
पंचांग विवरण
दिन: मंगलवार
तारीख: 6 अक्टूबर 2026
मास: आश्विन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: एकादशी
एकादशी समाप्त: 7 अक्टूबर रात लगभग 12:34 बजे
नक्षत्र: आश्लेषा, रात लगभग 10:17 बजे तक, इसके बाद मघा
योग: सिद्ध, सुबह लगभग 7:20 बजे तक; इसके बाद साध्य
करण: बव, दोपहर लगभग 1:19 बजे तक; इसके बाद बालव
चंद्र राशि: कर्क
सूर्य राशि: कन्या
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
ऋतु: शरद
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: सुबह 6:17 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:01 बजे
चंद्रोदय: 7 अक्टूबर तड़के लगभग 2:48 बजे
चंद्रास्त: दोपहर लगभग 3:27 बजे
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से 12:32 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:06 से 2:53 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:01 से 6:26 बजे तक
अमृत काल: रात 8:44 से 10:17 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 6:17 बजे से रात 10:17 बजे तक
राहुकाल और अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 3:05 से 4:33 बजे तक
यमगंड: सुबह 9:13 से 10:41 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 12:09 से 1:37 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 8:38 से 9:25 बजे तक
वर्ज्य: सुबह 11:29 बजे से दोपहर 1:02 बजे तक आज का विशेष पर्व
इंदिरा एकादशी व्रत आज रखा जाएगा. यह एकादशी पितृपक्ष में आती है और भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए विशेष मानी जाती है. 6 अक्टूबर को एकादशी श्राद्ध भी है.
एकादशी पारण
इंदिरा एकादशी का व्रत 7 अक्टूबर 2026 को द्वादशी तिथि में पारण किया जाएगा. नई दिल्ली के लिए प्रकाशित पंचांग गणना में पारण का समय लगभग सुबह 6:16 बजे से 8:39 बजे के बीच दिया गया है. परिवार की परंपरा या स्थानीय पंचांग के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है.
नोट: पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदलते हैं. ऊपर दिए गए समय नई दिल्ली को आधार बनाकर हैं.
इंदिरा एकादशी का व्रत करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और नरक से मुक्ति मिलती है.
पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है!
॥ एकादशी माता की आरती ॥
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,
जय एकादशी माता.
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,
शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी...॥
तेरे नाम गिनाऊं देवी,
भक्ति प्रदान करनी.
गण गौरव की देनी माता,
शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,
विश्वतारनी जन्मी.
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,
मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी...॥
पौष के कृष्णपक्ष की,
सफला नामक है.
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,
आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी...॥
नाम षटतिला माघ मास में,
कृष्णपक्ष आवै.
शुक्लपक्ष में जया, कहावै,
विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी...॥
विजया फागुन कृष्णपक्ष में
शुक्ला आमलकी.
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,
चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी...॥
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,
धन देने वाली.
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में,
वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी...॥
शुक्ल पक्ष में होय
मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी.
नाम निर्जला सब सुख करनी,
शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी...॥
योगिनी नाम आषाढ में जानों,
कृष्णपक्ष करनी.
देवशयनी नाम कहायो,
शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥
कामिका श्रावण मास में आवै,
कृष्णपक्ष कहिए.
श्रावण शुक्ला होय
पवित्रा आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी...॥
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,
परिवर्तिनी शुक्ला.
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,
व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी...॥
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,
आप हरनहारी.
रमा मास कार्तिक में आवै,
सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी...॥
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,
दुखनाशक मैया.
पावन मास में करूं
विनती पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी...॥
परमा कृष्णपक्ष में होती,
जन मंगल करनी.
शुक्ल मास में होय
पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥
जो कोई आरती एकादशी की,
भक्ति सहित गावै.
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,
निश्चय वह पावै॥
ॐ जय एकादशी...॥

