आज का दिन- 7 अक्टूबर 2026, एकादशी व्रत का पारण हरिवासर की अवधि में नहीं होता है!

आज का दिन- 7 अक्टूबर 2026, एकादशी व्रत का पारण हरिवासर की अवधि में नहीं होता है!

प्रेषित समय :21:25:59 PM / Tue, Oct 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
7 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है. 6 अक्टूबर को मनाई गई इंदिरा एकादशी के बाद 7 अक्टूबर को द्वादशी तिथि रहेगी. पंचांग गणना के अनुसार द्वादशी तिथि रात करीब 11:17 बजे तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी. इस दिन चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा और मघा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा.

पंचांग विवरण

दिन: बुधवार
तारीख: 7 अक्टूबर 2026
मास: आश्विन
पक्ष: कृष्ण पक्ष

* पारण का समय- 06:26 एएम से 08:48 एएम (7 अक्टूबर 2026) 
तिथि: द्वादशी
द्वादशी समाप्त: रात लगभग 11:17 बजे
इसके बाद: त्रयोदशी
नक्षत्र: मघा, रात लगभग 9:40 बजे तक
योग: शुभ
करण: कौलव
चंद्र राशि: सिंह
सूर्य राशि: कन्या
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
ऋतु: शरद
अयन: दक्षिणायन

सूर्योदय और सूर्यास्त

सूर्योदय: सुबह 6:17 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:00 बजे
चंद्रोदय: तड़के लगभग 2:46 बजे
चंद्रास्त: शाम लगभग 4:02 बजे

शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:39 से 5:28 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 से दोपहर 12:32 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर लगभग 2:05 से 2:51 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम लगभग 5:36 से 6:24 बजे तक
अमृत काल: शाम 7:20 से 8:54 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:44 से 12:33 बजे तक

राहुकाल और अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 12:08 से 1:36 बजे तक
यमगंड: सुबह 7:45 से 9:13 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:40 से दोपहर 12:08 बजे तक
दिशाशूल: उत्तर दिशा
गोधूलि: शाम 5:36 से 6:24 बजे तक

आज का विशेष पर्व

7 अक्टूबर को कोई प्रमुख व्रत या बड़ा पर्व नहीं है. यह दिन इंदिरा एकादशी के अगले दिन आने वाली द्वादशी का है. पितृपक्ष 2026 में 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा.

इंदिरा एकादशी के बाद द्वादशी

6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी और एकादशी श्राद्ध का संयोग था. एकादशी तिथि 7 अक्टूबर की मध्यरात्रि के बाद तक चलने की वजह से तिथि परिवर्तन रात में हुआ. 7 अक्टूबर के सूर्योदय के समय द्वादशी तिथि मानी जाएगी.

द्वादशी का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत के अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाता है. पारण का सही समय व्रत की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए. 7 अक्टूबर को द्वादशी तिथि रात लगभग 11:17 बजे तक रहने की गणना है.

चंद्रमा की स्थिति

7 अक्टूबर को चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा और मघा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा. मघा नक्षत्र लगभग रात 9:40 बजे तक रहने के बाद अगला नक्षत्र शुरू होगा.

स्रोत: नई दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग गणना एवं प्रकाशित पंचांग विवरण.

अच्युतम केशवम रामनारायणम, कृष्ण दामोदरम् वासुदेवम् हरे.
श्रीधरम् माधवम् गोपिकावल्लभम, जानकी नायकम श्रीरामचन्द्रम् भजे..

पारण, व्रत को पूरा करने को कहा जाता है. एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं.
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी माना जाता है. एकादशी व्रत का पारण हरिवासर की अवधि में भी नहीं होता है.
हरिवासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई समयावधि होती है.
व्रत पूर्ण हो जाने के बाद पहले भोजन के लिए सबसे सही समय सवेरे होता है.
मध्याह्नकाल में पारण से बचें लेकिन सवेरे किसी कारण से पारण नहीं हो पाए तो मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए.
कभी-कभी एकादशी व्रत दो दिनों के लिए लगातार हो जाता है तब स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पहली या दूजी एकादशी करनी चाहिए.
श्रीविष्णुभक्त ऐसे अवसर पर दोनों एकादशी करते हैं.
सन्यासी और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रीनारायणभक्तों को दूजी एकादशी का व्रत करना चाहिए.
यथासंभव व्रत नियमों का पालन करना चाहिए तथा किसी भी प्रकार की उलझन होने पर स्थानीय धर्मगुरु के निर्देशानुसार निर्णय करना चाहिए.
जानबूझ कर नियमों के उल्लंघन से ही व्रतभंग होता है इसलिए अनजाने में हुई गलती के लिए मन में आशंकाएं नहीं पालें और व्रत के अंत में पारण के समय जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए अपनी भाषा और भाव में श्रीविष्णुदेव से क्षमा प्रार्थना कर भोजन ग्रहण करें!

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-