राकेश टिकैत की बिहार सरकार को चेतावनी, सर्किल रेट बढ़े बिना किसानों की जमीन नहीं लेने देंगे

राकेश टिकैत की बिहार सरकार को चेतावनी, सर्किल रेट बढ़े बिना किसानों की जमीन नहीं लेने देंगे

प्रेषित समय :20:17:51 PM / Wed, Oct 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र
पटना.
बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण का मुद्दा अब गरमाता जा रहा है. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार को बिहार सरकार को साफ चेतावनी दी कि किसानों की जमीन पुराने सर्किल रेट पर लेने की कोशिश की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पहले सर्किल रेट बढ़ाया जाए और उसके बाद ही टाउनशिप के लिए किसानों की जमीन लेने की प्रक्रिया आगे बढ़े.

नवादा जिले के नारदीगंज स्थित मधुवन-मोतनाजे में आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि बिहार में लंबे समय से सर्किल रेट में बढ़ोतरी नहीं हुई है. ऐसे में पुराने रेट के आधार पर किसानों की जमीन का मूल्य तय करना उनके साथ न्याय नहीं होगा. उन्होंने अधिकारियों और सरकार के सामने मांग रखी कि सर्किल रेट को पहले दोगुना किया जाए. इसके बाद बढ़े हुए सर्किल रेट या बाजार भाव में जो भी अधिक हो, उसके चार गुना के हिसाब से किसानों को मुआवजा दिया जाए.

टिकैत ने कहा कि किसान विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत किसान की जमीन से ही क्यों चुकाई जाए, इसका जवाब सरकार को देना होगा. उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर किसान पीढ़ियों से खेती कर परिवार चला रहा है, वही जमीन यदि किसी परियोजना के लिए ली जाती है तो उसे वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा मिलना चाहिए.

किसान महापंचायत में टिकैत ने आरोप लगाया कि किसानों को लगातार यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि खेती अब लाभ का काम नहीं है और जमीन बेचकर शहर चले जाना ही बेहतर विकल्प है. उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ बड़े शहरों और कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े लोग ग्रामीण इलाकों में जमीन खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं. उनके मुताबिक इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन स्थानीय किसानों को होगा, जिनकी आजीविका सीधे खेती पर निर्भर है.

टिकैत ने कहा कि गांव की जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि किसान के परिवार की आजीविका और भविष्य की सुरक्षा है. यदि किसान अपनी जमीन बेच देता है तो उसके पास आय का स्थायी साधन खत्म हो सकता है. उन्होंने सरकार से कहा कि किसी भी विकास परियोजना में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

महापंचायत में उन्होंने बिहार की कृषि व्यवस्था और किसानों को फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया. टिकैत ने दावा किया कि बिहार में धान और मक्का समेत कई फसलों की खरीद किसानों से कम कीमत पर हो रही है. उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य का पर्याप्त लाभ नहीं मिलने के कारण राज्य के किसानों को हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

टिकैत ने प्रशासन और सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि दिल्ली और पटना में बैठकर नीतियां बनाने वालों को गांव की वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए. किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा बताने के बजाय सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और जमीन का भी सही दाम मिले.

सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर टिकैत ने किसानों से भी सतर्क रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि जब तक जमीन का उचित मूल्य और मुआवजे की शर्तें स्पष्ट नहीं हो जातीं, तब तक किसान अपनी जमीन पर प्रशासन को काम शुरू नहीं करने दें. उन्होंने किसानों से संगठित होकर अपनी मांग रखने और बातचीत के साथ-साथ आंदोलन के लिए भी तैयार रहने को कहा.

महापंचायत में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने पर भी टिकैत ने जोर दिया. उन्होंने आंदोलन को मजबूत करने के लिए महिलाओं को ट्रैक्टर चलाने की ट्रेनिंग देने की बात कही. उनका कहना था कि किसान आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से संघर्ष और मजबूत होगा.

टिकैत ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में जमीन और किसान अधिकारों की लड़ाई में ट्रैक्टर, जेसीबी और भारी मशीनरी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. उन्होंने किसानों से एकजुट रहने और अपनी जमीन व अधिकारों की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करने की अपील की.

बिहार सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती सैटेलाइट टाउनशिप जैसी विकास परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने और किसानों की आपत्तियों के बीच संतुलन बनाने की होगी. किसानों की मुख्य मांग जमीन के मूल्य और मुआवजे को लेकर है. वहीं टिकैत ने स्पष्ट कर दिया है कि पुराने सर्किल रेट के आधार पर जमीन अधिग्रहण का विरोध किया जाएगा.

नवादा की किसान महापंचायत में दिए गए टिकैत के बयान से संकेत है कि यदि सरकार ने सर्किल रेट और मुआवजे को लेकर किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है. अब निगाहें बिहार सरकार के अगले कदम पर हैं कि टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया किस दर और किस मुआवजा व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाई जाती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-