बेटी के BITS दाखिले के नाम पर अहमदाबाद के डॉक्टर से 15.5 लाख की ठगी, आरोपी खुद को संस्थान का प्रतिनिधि बताकर रचते रहे जाल

बेटी के BITS दाखिले के नाम पर अहमदाबाद के डॉक्टर से 15.5 लाख की ठगी, आरोपी खुद को संस्थान का प्रतिनिधि बताकर रचते रहे जाल

प्रेषित समय :22:53:13 PM / Thu, Oct 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में बेटी के BITS पिलानी में दाखिले की उम्मीद एक डॉक्टर को महंगी पड़ गई। शाहिबाग निवासी डॉक्टर गोपाल ओमप्रकाश भाटिया ने माधवपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि कथित ठगों ने खुद को BITS पिलानी के प्रतिनिधि बताकर उनकी बेटी के हैदराबाद कैंपस में दाखिले का भरोसा दिया और अलग-अलग चरणों में उनसे कुल 15.50 लाख रुपये ले लिए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक ठगी का तरीका काफी योजनाबद्ध था। आरोपियों ने पहले वाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क किया, फिर सीट उपलब्ध होने का दावा करते हुए फीस बताई। इसके बाद टोकन राशि, पोस्ट डेटेड चेक, फर्जी दाखिले की जानकारी और अंत में एंगड़िया के माध्यम से नकद भुगतान कराया गया। जब परिवार ने दाखिले को लेकर सवाल पूछना शुरू किया तो कथित आरोपियों के जवाब टालमटोल वाले हो गए और बाद में उनके मोबाइल नंबर बंद हो गए।

BITSAT में अपेक्षित अंक नहीं आए तो शुरू हुआ संपर्क

डॉक्टर भाटिया की शिकायत के अनुसार उनकी बेटी मित्रा ने BITSAT प्रवेश परीक्षा दी थी, लेकिन उसके अंक कथित तौर पर दाखिले के लिए पर्याप्त नहीं थे। इसी दौरान 9 जनवरी को एक अज्ञात नंबर से उन्हें वाट्सएप कॉल आया।

कॉल करने वालों ने कथित तौर पर अपना नाम निहारिका शर्मा और प्रतीक गुप्ता बताया। उन्होंने दावा किया कि BITS में अभी सीट उपलब्ध है और 19 लाख रुपये में दाखिला कराया जा सकता है।

डॉक्टर ने शुरुआत में इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। शिकायत के अनुसार इसके बाद भी दोनों कथित आरोपी वाट्सएप संदेश और वॉयस कॉल के माध्यम से लगातार संपर्क करते रहे। बाद में उन्होंने सीट बुक कराने के नाम पर 50 हजार रुपये टोकन राशि देने को कहा।

पहले 50 हजार रुपये ट्रांसफर कराए

17 जनवरी को डॉक्टर को वाट्सएप के माध्यम से बैंक खाते की जानकारी भेजी गई। शिकायत के मुताबिक खाता एसबीआई में था और यह विशाल कुमार के नाम पर बताया गया।

डॉक्टर ने अपने एक्सिस बैंक खाते से उस खाते में 50 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके साथ ही उन्होंने अपनी बेटी के शैक्षणिक दस्तावेज भी कथित आरोपियों के साथ साझा कर दिए।

इसके बाद ठगों ने कथित तौर पर 16 लाख रुपये का पोस्ट डेटेड चेक मांगा। डॉक्टर को बताया गया कि दाखिला होने के बाद यह चेक वापस कर दिया जाएगा। शिकायत के मुताबिक 30 जून को डॉक्टर ने यह चेक पुणे के एक पते पर डीटीडीसी कूरियर के माध्यम से भेज दिया।

हैदराबाद बुलाकर दिखाया दाखिले का भरोसा

मामले में कथित ठगी का अगला चरण जुलाई में सामने आया। 6 जुलाई को एक महिला ने डॉक्टर से संपर्क किया और खुद को वेदिका बताया। उसने दावा किया कि डॉक्टर की पत्नी मौसमी के बैंक खाते से BITS पिलानी, हैदराबाद के नाम पर 4.17 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट तैयार हो चुका है।

इसके बाद परिवार को 12 जुलाई को हैदराबाद आने के लिए कहा गया।

अगले दिन डॉक्टर, उनकी पत्नी और बेटी कथित तौर पर हैदराबाद के एक शेरेटन होटल की लॉबी में विवान नाम के व्यक्ति से मिले। शिकायत के अनुसार विवान ने खुद को BITS की एडमिशन कमेटी का अधिकृत सदस्य बताया और दावा किया कि मित्रा का दाखिला हो गया है।

इसके बाद कथित तौर पर कॉलेज मैनेजमेंट के लिए 15 लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा गया।

नकद ले जाने से मना किया तो बताया एंगड़िया का रास्ता

डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें इतनी बड़ी रकम नकद लेकर आने के लिए कोई निर्देश नहीं दिया गया था। इसके बाद विवान ने उन्हें एंगड़िया फर्म के माध्यम से भुगतान करने को कहा।

हैदराबाद से अहमदाबाद लौटने के बाद डॉक्टर को विवान की ओर से फिर वाट्सएप कॉल आया। शिकायत के मुताबिक इस कॉल के दौरान उन्हें एंगड़िया के जरिए भुगतान करने की जानकारी दी गई।

इसके बाद डॉक्टर ने शाहिबाग स्थित एक एंगड़िया फर्म के माध्यम से कथित तौर पर 15 लाख रुपये सौंप दिए। उन्हें बताया गया कि रकम कॉलेज मैनेजमेंट तक पहुंचा दी गई है।

यहीं से ठगी की रकम बढ़कर 15.50 लाख रुपये हो गई। इसमें शुरुआती 50 हजार रुपये का बैंक ट्रांसफर और बाद में दिए गए 15 लाख रुपये शामिल हैं।

दाखिले के बारे में पूछने पर मिलने लगे टालमटोल वाले जवाब

15 लाख रुपये देने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही बेटी के दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। लेकिन 14 जुलाई से 27 जुलाई के बीच जब डॉक्टर और उनके परिवार ने कथित आरोपियों से संपर्क किया तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिले।

शिकायत के अनुसार आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे। बाद में डॉक्टर ने पुलिस से शिकायत करने की बात कही तो कथित आरोपियों ने जवाब देना बंद कर दिया।

इसके बाद जिन मोबाइल नंबरों से संपर्क किया जा रहा था, वे भी बंद हो गए। परिवार को तब दाखिले के नाम पर ठगी होने का संदेह गहराने लगा।

4.17 लाख का डिमांड ड्राफ्ट भी वापस आया

मामले में एक और महत्वपूर्ण कड़ी 13 अगस्त को सामने आई। डॉक्टर की पत्नी के नाम से BITS पिलानी, हैदराबाद के पक्ष में तैयार बताया गया 4.17 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट डीटीडीसी के माध्यम से पुणे से वापस भेज दिया गया।

डिमांड ड्राफ्ट वापस आने और दाखिले की कोई पुष्टि नहीं होने के बाद परिवार को कथित ठगी का पूरा अंदेशा हुआ।

इसके बाद डॉक्टर ने माधवपुरा पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड खंगालेगी

माधवपुरा पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में उन बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनमें शुरुआती रकम ट्रांसफर की गई थी।

इसके अलावा वाट्सएप पर हुई बातचीत, कॉल डिटेल, मोबाइल नंबर, साझा किए गए दस्तावेज और एंगड़िया के जरिए किए गए 15 लाख रुपये के भुगतान की जानकारी भी जांच का हिस्सा होगी।

पुलिस एंगड़िया फर्म के प्रतिनिधियों से भी पूछताछ कर सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रकम किसने जमा की, किसके निर्देश पर आगे भेजी गई और भुगतान की पूरी कड़ी कहां तक जाती है।

BITS के नाम का इस्तेमाल कर बनाया भरोसा

इस मामले में कथित ठगी का तरीका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपियों ने सीधे पैसे मांगने के बजाय पहले संस्थान के नाम और दाखिले की प्रक्रिया का इस्तेमाल कर भरोसा बनाने की कोशिश की।

पहले सीट उपलब्ध होने की बात कही गई, फिर टोकन राशि ली गई। इसके बाद पोस्ट डेटेड चेक लिया गया और परिवार को हैदराबाद बुलाकर कथित तौर पर दाखिला होने की जानकारी दी गई। इसके बाद कॉलेज मैनेजमेंट के नाम पर 15 लाख रुपये का भुगतान एंगड़िया के जरिए कराया गया।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे कितने लोग शामिल थे और क्या इसी तरीके से अन्य छात्रों या अभिभावकों को भी निशाना बनाया गया है।

पुलिस जांच के बाद साफ होगी पूरी साजिश

फिलहाल डॉक्टर की शिकायत के आधार पर आरोप लगाए गए हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपियों की पहचान, बैंक खातों का इस्तेमाल, मोबाइल नंबरों की वास्तविक जानकारी और एंगड़िया के जरिए रकम के अंतिम गंतव्य की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस अब कथित आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए नामों और संपर्क माध्यमों की भी जांच करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि BITS के नाम पर भेजे गए दस्तावेज और दाखिले से संबंधित दावे वास्तविक थे या पूरी तरह फर्जी।

इस मामले ने एक बार फिर उच्च शिक्षा में दाखिले के नाम पर होने वाली ऑनलाइन और ऑफलाइन ठगी के जोखिम को सामने ला दिया है। खासतौर पर तब, जब ठग किसी प्रतिष्ठित संस्थान का नाम लेकर अभिभावकों को सीट और प्रवेश का भरोसा देते हैं। इस मामले में पुलिस की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि 15.50 लाख रुपये की रकम किस नेटवर्क तक पहुंची और कथित ठगी की पूरी योजना कैसे तैयार की गई।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-