आज का दिन 11 अक्टूबर 2026, रविवार: शारदीय नवरात्र का शुभारंभ, घटस्थापना मुहूर्त और मां शैलपुत्री की आराधना

आज का दिन 11 अक्टूबर 2026, रविवार: शारदीय नवरात्र का शुभारंभ, घटस्थापना मुहूर्त और मां शैलपुत्री की आराधना

प्रेषित समय :21:58:48 PM / Sat, Oct 10th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इस पंचांग में घटस्थापना को प्रमुखता देते हुए मुख्य शीर्षक में मुहूर्त जोड़ा जाएगा। ग्रह गोचर खंड में केवल प्रमुख स्थितियां और पारंपरिक ज्योतिषीय संदर्भ रखेंगे, निश्चित फलादेश या डर पैदा करने वाले दावे नहीं।

एक जरूरी स्पष्टता: 11 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के लिए घटस्थापना का प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक है। वैकल्पिक अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक बताया गया है। इस दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का उल्लेख भी पंचांग में है, इसलिए मुहूर्त चुनते समय स्थानीय पंचांग और परंपरा को ध्यान में रखना उचित होगा।

-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963

रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर घरों और मंदिरों में घटस्थापना कर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना को विशेष महत्व दिया जाता है। यह नौ दिनों की साधना, शक्ति-उपासना और आध्यात्मिक संकल्प की शुरुआत का प्रतीक है।

घटस्थापना मुहूर्त

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, रविवार 11 अक्टूबर को घटस्थापना के लिए प्रमुख मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। यदि इस अवधि में स्थापना संभव न हो, तो अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक एक वैकल्पिक समय के रूप में बताया गया है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।इस दिन प्रतिपदा तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान रहेगी और रात लगभग 9:31 बजे तक रहेगी। घटस्थापना के समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग होने की जानकारी भी पंचांग में दी गई है। इसलिए श्रद्धालु अपने क्षेत्र के पंचांग और पारिवारिक पूजा-परंपरा के अनुसार उपयुक्त समय का चयन करें।

धार्मिक महत्व

घटस्थापना को नवरात्र की पूजा का प्रारंभिक संस्कार माना जाता है। पूजा स्थल पर कलश स्थापित करके मां दुर्गा और आदिशक्ति का आह्वान किया जाता है। कलश को मंगल, समृद्धि, पवित्रता और जीवनदायी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। कई परंपराओं में कलश के साथ मिट्टी में जौ बोए जाते हैं, जिनकी बढ़त को शुभता और नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार दीप प्रज्वलित करते हैं, मंत्र-जप, दुर्गा पाठ और आरती करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्र में संयम, भक्ति और नियमित साधना से मन को एकाग्र करने तथा सकारात्मक संकल्प लेने की प्रेरणा मिलती है।

आज का पंचांग

  • दिन: रविवार

  • मास: आश्विन

  • पक्ष: शुक्ल पक्ष

  • तिथि: प्रतिपदा, रात लगभग 9:31 बजे तक; इसके बाद द्वितीया

  • नक्षत्र: चित्रा, रात लगभग 10:33 बजे तक; इसके बाद स्वाती

  • योग: वैधृति, रात लगभग 9:06 बजे तक; इसके बाद विष्कुम्भ

  • करण: किंस्तुघ्न, सुबह लगभग 9:21 बजे तक; इसके बाद बव

  • सूर्योदय: सुबह लगभग 6:19 बजे

  • सूर्यास्त: शाम लगभग 5:56 बजे

  • चंद्रोदय: सुबह लगभग 6:47 बजे

  • चंद्रास्त: शाम लगभग 6:05 बजे

ये समय नई दिल्ली के संदर्भ में दिए गए हैं। स्थान बदलने पर सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है।

ग्रह गोचर: प्रमुख स्थितियां और ज्योतिषीय संदर्भ

11 अक्टूबर के पंचांग में सूर्य की स्थिति कन्या राशि में बताई गई है। चंद्रमा की राशि और दिन के दौरान उसकी स्थिति के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार गणना देखना उचित रहेगा। ग्रहों की स्थिति को लेकर अलग-अलग पंचांगों में गणना-पद्धति और समय के कारण कुछ अंतर दिखाई दे सकता है।

इस अवधि के ज्योतिषीय विवरणों में शुक्र और शनि की वक्री स्थिति तथा मंगल की स्थिति का भी उल्लेख मिलता है। पारंपरिक ज्योतिष में वक्री ग्रहों को समीक्षा, पुराने विषयों पर पुनर्विचार और अधूरे कार्यों पर ध्यान देने से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन स्थितियों के आधार पर किसी व्यक्ति या समाज के लिए निश्चित परिणाम घोषित करना उचित नहीं है।

नवरात्र के आरंभ का मुख्य धार्मिक संदेश शक्ति, साधना, आत्मसंयम और नए संकल्प से जुड़ा है। ग्रह गोचर को ज्योतिषीय परंपरा के संदर्भ में देखा जा सकता है, जबकि दैनिक निर्णय व्यावहारिक परिस्थितियों, विवेक और उपलब्ध जानकारी के आधार पर लेने चाहिए।

शुभ और अशुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 4:40 से 5:29 बजे तक

  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक

  • राहुकाल: शाम लगभग 4:28 से 5:56 बजे तक

  • यमगण्ड: दोपहर लगभग 12:07 से 1:34 बजे तक

  • गुलिक काल: दोपहर लगभग 3:01 से 4:28 बजे तक

परंपरागत मान्यता के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त को ध्यान, जप और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए उपयुक्त माना जाता है। राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल में कुछ लोग नए मांगलिक कार्य शुरू करने से बचते हैं। इन अवधियों को धार्मिक परंपरा के रूप में समझना चाहिए।

रविवार का चौघड़िया

दिन का चौघड़िया:

  • उद्वेग: सुबह 6:19 से 7:46 बजे तक

  • चर: सुबह 7:46 से 9:13 बजे तक

  • लाभ: सुबह 9:13 से 10:40 बजे तक

  • अमृत: सुबह 10:40 से दोपहर 12:07 बजे तक

  • काल: दोपहर 12:07 से 1:34 बजे तक

  • शुभ: दोपहर 1:34 से 3:01 बजे तक

  • रोग: दोपहर 3:01 से 4:28 बजे तक

  • उद्वेग: शाम 4:28 से 5:56 बजे तक

रात का चौघड़िया:

  • शुभ: शाम 5:56 से 7:29 बजे तक

  • अमृत: शाम 7:29 से 9:02 बजे तक

  • चर: रात 9:02 से 10:35 बजे तक

  • रोग: रात 10:35 बजे से 12:08 बजे तक

  • काल: रात 12:08 से 1:41 बजे तक

  • लाभ: रात 1:41 से 3:14 बजे तक

  • उद्वेग: रात 3:14 से 4:47 बजे तक

  • शुभ: सुबह 4:47 से 6:20 बजे तक

चौघड़िया परंपरागत समय-विभाजन है। घटस्थापना जैसे अनुष्ठान के लिए केवल चौघड़िया देखकर निर्णय लेने के बजाय निर्धारित घटस्थापना मुहूर्त और स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित है।

आज का आध्यात्मिक संदेश

शारदीय नवरात्र का पहला दिन श्रद्धा, अनुशासन और नई शुरुआत का संदेश देता है। घटस्थापना के साथ साधक मां दुर्गा की आराधना का संकल्प लेते हैं और नौ दिनों तक पूजा, जप, पाठ या अपनी परंपरा के अनुसार साधना करते हैं। मां शैलपुत्री की पूजा के साथ आरंभ होने वाला यह पर्व आत्मबल, धैर्य और सद्कर्मों की प्रेरणा का अवसर है।

नोट: घटस्थापना का समय और ग्रह-गोचर स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकते हैं। 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-