घर बनवाते समय कमरों की दिशा, मुख्य दरवाजे, रसोई और पूजा स्थल के साथ सीढ़ियों की बनावट पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों की दिशा, उनका आकार, ऊंचाई और उनकी कुल संख्या को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें सबसे चर्चित मान्यता सीढ़ियों की संख्या विषम रखने की है। वास्तु से जुड़े कई जानकार 15, 17, 19 और 21 जैसी संख्याओं को प्राथमिकता देते हैं, जबकि सम संख्या वाली सीढ़ियों को लेकर कुछ परंपरागत धारणाएं भी प्रचलित हैं।
लेकिन क्या सीढ़ियों की संख्या का शुभ-अशुभ होना केवल वास्तु मान्यता का विषय है, या इसके पीछे कोई व्यावहारिक पहलू भी है? घर बनवाने की योजना बना रहे लोगों और वास्तुविदों के लिए यह समझना जरूरी है कि पारंपरिक मान्यताओं के साथ सीढ़ियों की सुरक्षा, आराम और भवन निर्माण के तकनीकी नियमों को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए।
सीढ़ियों की विषम संख्या को क्यों माना जाता है शुभ
वास्तु से जुड़ी लोकप्रिय मान्यताओं के अनुसार, घर की सीढ़ियों की कुल संख्या विषम रखना शुभ माना जाता है। इसके लिए 15, 17, 19, 21 और 23 जैसी संख्याओं के उदाहरण दिए जाते हैं। कुछ वास्तु सलाहकार 27 सीढ़ियों को भी इसी श्रेणी में रखते हैं। इस परंपरा के पीछे एक प्रचलित तर्क यह है कि व्यक्ति सीढ़ियां चढ़ते समय दायां पैर आगे रखता है और अंतिम सीढ़ी पर भी दायां पैर पड़ना शुभ माना जाता है।
इसी धारणा के आधार पर विषम संख्या को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि दाएं पैर से शुरुआत और उसी पैर पर समाप्ति को लेकर किया जाने वाला यह दावा पारंपरिक वास्तु विश्वास का हिस्सा है। इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नियम या हर व्यक्ति पर लागू होने वाला तथ्य नहीं माना जा सकता।
वास्तु के जानकार इस नियम को घर की बनावट और सकारात्मकता से जोड़कर देखते हैं। वहीं, भवन निर्माण विशेषज्ञों के अनुसार सीढ़ियों की संख्या तय करते समय सबसे पहले यह देखना चाहिए कि हर सीढ़ी की ऊंचाई और चौड़ाई आरामदायक हो, चढ़ने-उतरने में संतुलन बना रहे और सीढ़ियों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को परेशानी न हो।
सम संख्या को लेकर क्या है मान्यता
वास्तु संबंधी चर्चाओं में 10, 18 और 20 जैसी सम संख्याओं वाली सीढ़ियों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। कुछ परंपरागत व्याख्याओं में सम संख्या को यम, ठहराव या रुकावट से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से वास्तु परामर्श के दौरान कई लोग सम संख्या के बजाय विषम संख्या का विकल्प चुनना पसंद करते हैं।
हालांकि, अलग-अलग वास्तु परंपराओं और सलाहकारों की व्याख्याओं में अंतर हो सकता है। सम संख्या वाली सीढ़ियां अपने आप में अशुभ हैं, ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए कोई स्थापित वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए केवल संख्या के आधार पर किसी घर को शुभ या अशुभ ठहराना उचित नहीं होगा।
यदि कोई परिवार वास्तु मान्यताओं का पालन करना चाहता है, तो सीढ़ियों की संख्या तय करते समय इस पसंद को डिजाइन में शामिल किया जा सकता है। लेकिन ऐसा बदलाव तभी किया जाना चाहिए, जब उससे सीढ़ियों की ऊंचाई, ढलान, उपयोगिता और सुरक्षा प्रभावित न हो।
क्या है 3n+1 का फॉर्मूला
सीढ़ियों की संख्या को लेकर वास्तु सलाह में एक और गणना का उल्लेख किया जाता है, जिसे सामान्य तौर पर 3n+1 के फॉर्मूले के रूप में बताया जाता है। इस नियम के अनुसार कुल संख्या को तीन से भाग देने पर शेषफल एक आना चाहिए। उदाहरण के लिए 19 को तीन से भाग देने पर शेषफल एक आता है। इसी तरह 22 भी इस गणना में फिट बैठती है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 3n+1 का नियम और विषम संख्या का नियम एक ही बात नहीं हैं। 19 दोनों मानदंडों पर खरी उतरती है, लेकिन 22 सम संख्या है और फिर भी 3n+1 के गणितीय नियम का पालन करती है। इसलिए इन दोनों मान्यताओं को एक-दूसरे का पर्याय नहीं समझना चाहिए।
वास्तु से जुड़े कुछ सलाहकार विषम संख्या को सरल और प्रचलित नियम बताते हैं, जबकि कुछ 3n+1 की गणना का भी उल्लेख करते हैं। ऐसे में किसी एक सूत्र को सभी वास्तु परंपराओं का सर्वमान्य नियम बताने से बचना चाहिए। घर बनवाने वाले लोगों को अपने वास्तु सलाहकार से यह स्पष्ट पूछना चाहिए कि वह किस परंपरा या गणना के आधार पर सुझाव दे रहे हैं।
सीढ़ियां गिनते समय किस बात का रखें ध्यान
सीढ़ियों की संख्या तय करते समय सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि गिनती किस चीज की हो रही है। भवन निर्माण में सामान्य तौर पर फर्श से अगले फर्श तक पहुंचने के लिए जितने ऊर्ध्वाधर स्तर बदलते हैं, उन्हें राइजर (Riser) की संख्या से समझा जाता है। वास्तु संबंधी सलाह में भी अक्सर इसी कुल संख्या पर चर्चा होती है।
लैंडिंग यानी बीच में बना समतल विश्राम स्थल सीढ़ी की तरह दिखाई दे सकता है, लेकिन उसे सामान्य सीढ़ी के पायदान की तरह गिनना सही नहीं होगा। हालांकि, वास्तविक गणना भवन के डिजाइन और सीढ़ियों के विन्यास पर निर्भर करती है। इसलिए निर्माण के नक्शे में राइजर, ट्रेड यानी पैर रखने की सतह और लैंडिंग को अलग-अलग स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर, यदि भूतल से पहली मंजिल तक पहुंचने के लिए 17 राइजर रखे गए हैं, तो वास्तु की विषम संख्या वाली मान्यता के अनुसार यह संख्या उपयुक्त मानी जा सकती है। लेकिन केवल 17 की संख्या हासिल करने के लिए राइजर की ऊंचाई असमान कर देना या सीढ़ियों को असुविधाजनक बना देना सही तरीका नहीं है।
21 सीढ़ियों को लेकर क्यों होती है चर्चा
वास्तु संबंधी लोकप्रिय सलाह में 21 सीढ़ियों को अक्सर अच्छा विकल्प बताया जाता है। इसी तरह 15 और 17 की संख्या का भी उल्लेख किया जाता है। इन संख्याओं को प्राथमिकता देने की वजह मुख्य रूप से विषम संख्या वाली परंपरागत मान्यता है।
फिर भी, 21 सीढ़ियां हर घर के लिए सबसे अच्छा विकल्प होंगी, यह जरूरी नहीं है। किसी भवन की कुल ऊंचाई, उपलब्ध जगह, मंजिलों के बीच की दूरी, सीढ़ियों की चौड़ाई और उपयोग करने वालों की जरूरत के आधार पर राइजर की संख्या तय होती है। छोटे मकान, डुप्लेक्स, बड़े घर और व्यावसायिक इमारतों में परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं।
यदि डिजाइन में 21 राइजर रखने से सीढ़ियों की ऊंचाई असुविधाजनक हो रही हो, तो केवल वास्तु की मान्यता पूरी करने के लिए ऐसा करना उचित नहीं है। पहले सुरक्षित और आरामदायक डिजाइन तैयार किया जाना चाहिए। उसके बाद, जहां संभव हो, वास्तु संबंधी पसंद को शामिल किया जा सकता है।
20 सीढ़ियां बन रही हों तो क्या करें
वास्तु संबंधी कुछ सलाहों में कहा जाता है कि यदि सीढ़ियों की संख्या 20 हो रही है, तो एक अतिरिक्त छोटा स्टेप जोड़कर संख्या 21 कर दी जाए। कुछ सुझावों में इसके लिए लगभग एक इंच ऊंचा अतिरिक्त स्तर बनाने की बात भी कही जाती है।
लेकिन भवन निर्माण के नजरिए से यह तरीका जोखिम पैदा कर सकता है। यदि एक सीढ़ी बाकी सीढ़ियों से बहुत छोटी या ऊंची हो, तो पैर रखते समय संतुलन बिगड़ सकता है और ठोकर लगने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए केवल गिनती बदलने के लिए एक इंच का अलग स्टेप जोड़ना सामान्य तौर पर उचित समाधान नहीं है।
यदि वास्तु की मान्यता के अनुसार 20 के बजाय 21 राइजर रखना जरूरी समझा जा रहा है, तो बदलाव पूरे डिजाइन में संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए। इंजीनियर या आर्किटेक्ट से सलाह लेकर सभी राइजर की ऊंचाई और ट्रेड की चौड़ाई को एकसमान तथा सुरक्षित रखा जाना चाहिए। यदि ऐसा करना संभव न हो, तो केवल संख्या बदलने के लिए जोखिम भरा निर्माण नहीं करना चाहिए।
वास्तु के साथ सुरक्षा को भी दें प्राथमिकता
सीढ़ियां घर का ऐसा हिस्सा हैं, जिनका इस्तेमाल परिवार के सदस्य रोजाना करते हैं। बच्चे, बुजुर्ग और चलने-फिरने में परेशानी महसूस करने वाले लोगों के लिए सीढ़ियों की बनावट विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। इसलिए सीढ़ियों का डिजाइन बनाते समय एकसमान ऊंचाई, पर्याप्त चौड़ाई, मजबूत रेलिंग, उचित रोशनी और फिसलन से बचाव जैसे पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए।
सीढ़ियों की कुल ऊंचाई और चौड़ाई स्थानीय भवन उपनियमों तथा लागू निर्माण मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि सीढ़ियां चढ़ते समय सिर के ऊपर पर्याप्त जगह हो और रास्ते में कोई बाधा न आए। भवन के प्रकार और स्थानीय नियमों के अनुसार तकनीकी आवश्यकताएं बदल सकती हैं, इसलिए अंतिम डिजाइन योग्य आर्किटेक्ट या स्ट्रक्चरल इंजीनियर से जांच कराना बेहतर है।
वास्तु की मान्यताओं का पालन करने वाले परिवार अपने सलाहकार के साथ सीढ़ियों की संख्या पर चर्चा कर सकते हैं। लेकिन डिजाइन में ऐसा कोई बदलाव नहीं करना चाहिए, जिससे सीढ़ियों की सुरक्षा या उपयोगिता कम हो जाए।
मकान बनवाने वालों के लिए जरूरी सलाह
सीढ़ियों की संख्या तय करने से पहले वास्तुविद, आर्किटेक्ट और इंजीनियर के बीच स्पष्ट तालमेल होना चाहिए। वास्तु सलाहकार पारंपरिक मान्यताओं के अनुरूप विकल्प सुझा सकते हैं, जबकि आर्किटेक्ट और इंजीनियर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि डिजाइन तकनीकी रूप से सही और सुरक्षित हो।
यदि मकान का नक्शा शुरुआती चरण में है, तो विषम संख्या के विकल्प पर विचार करना आसान हो सकता है। लेकिन यदि निर्माण काफी आगे बढ़ चुका है, तो केवल संख्या बदलने के लिए सीढ़ियों को तोड़ना या उनमें असमान स्टेप जोड़ना जरूरी नहीं है। पहले यह आकलन करना चाहिए कि बदलाव से कितना लाभ होगा और उससे कोई व्यावहारिक समस्या तो पैदा नहीं होगी।
वास्तु की लोकप्रिय मान्यताओं में सीढ़ियों की विषम संख्या को शुभ माना जाता है। 15, 17, 19 और 21 जैसी संख्याओं का इसी कारण उल्लेख होता है, जबकि 3n+1 का नियम एक अलग गणना पर आधारित है। हालांकि, इन मान्यताओं को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित सार्वभौमिक नियम नहीं माना जा सकता।
घर बनवाते समय सबसे समझदारी भरा रास्ता यही है कि परंपरागत पसंद और आधुनिक निर्माण सुरक्षा के बीच संतुलन रखा जाए। सीढ़ियों की संख्या चाहे विषम हो या सम, उनका सुरक्षित, सुविधाजनक और मानकों के अनुरूप होना सबसे जरूरी है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

