आज का दिन 12 अक्टूबर 2026, सोमवार मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, सफेद रंग का महत्व और आज का पंचांग

आज का दिन 12 अक्टूबर 2026, सोमवार मां ब्रह्मचारिणी की आराधना, सफेद रंग का महत्व और आज का पंचांग

प्रेषित समय :22:21:58 PM / Sun, Oct 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्र का दूसरा दिन मनाया जाएगा। आश्विन शुक्ल द्वितीया के अवसर पर मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र के इस दिन को तप, संयम, साधना और दृढ़ संकल्प से जोड़कर देखा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ श्रद्धालु आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मबल का संकल्प लेते हैं।

नवरात्र के दूसरे दिन सफेद रंग का विशेष महत्व माना जाता है। सफेद रंग शांति, पवित्रता, सादगी और मन की स्थिरता का प्रतीक है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार सफेद वस्त्र धारण कर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कर सकते हैं। शारदीय नवरात्र का यह दिन भक्ति के साथ अपने विचारों और व्यवहार में संयम लाने की प्रेरणा भी देता है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व

मां ब्रह्मचारिणी को मां दुर्गा का तपस्विनी स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनका स्वरूप तपस्या, त्याग, धैर्य और साधना का संदेश देता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल दर्शाया जाता है। यह स्वरूप साधना और आत्मसंयम के महत्व को रेखांकित करता है।

नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, मंत्र-जप, दुर्गा पाठ और आरती करते हैं। कई परंपराओं में मां को फल, मिश्री और अन्य सात्त्विक भोग अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान स्वच्छता, एकाग्रता और श्रद्धा को विशेष महत्व दिया जाता है।

आज का पंचांग

  • दिन: सोमवार

  • मास: आश्विन

  • पक्ष: शुक्ल पक्ष

  • तिथि: द्वितीया, रात लगभग 10:13 से 10:14 बजे तक; इसके बाद तृतीया

  • नक्षत्र: स्वाती, रात लगभग 11:52 बजे तक; इसके बाद विशाखा

  • योग: विष्कुम्भ, रात लगभग 8:30 बजे तक; इसके बाद प्रीति

  • करण: बव, सुबह लगभग 9:48 बजे तक; इसके बाद कौलव

  • सूर्योदय: सुबह लगभग 6:20 बजे

  • सूर्यास्त: शाम लगभग 5:54 बजे

  • चंद्रोदय: सुबह लगभग 7:45 से 7:46 बजे के आसपास

  • चंद्रास्त: शाम लगभग 6:40 से 6:41 बजे के आसपास

ये समय नई दिल्ली के संदर्भ में विभिन्न पंचांग स्रोतों पर आधारित हैं। स्थान और गणना-पद्धति के अनुसार सूर्योदय, सूर्यास्त तथा कुछ पंचांग विवरणों में अंतर हो सकता है।

 

ग्रह गोचर और ज्योतिषीय संदर्भ

12 अक्टूबर के पंचांग विवरण के अनुसार सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा तुला राशि में रहेगा। चंद्रमा स्वाती नक्षत्र में संचार करेगा, जो रात लगभग 11:52 बजे के बाद विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

 

पारंपरिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं से, जबकि तुला राशि को संतुलन, सामंजस्य और संबंधों से जोड़कर देखा जाता है। इन मान्यताओं के आधार पर दिन को विचारों में संतुलन बनाए रखने, संवाद में संयम रखने और महत्वपूर्ण निर्णयों पर शांत मन से विचार करने की प्रेरणा के रूप में देखा जा सकता है।

हालांकि, ग्रहों की स्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति के जीवन में निश्चित परिणाम होने का दावा नहीं किया जा सकता। दैनिक निर्णय लेते समय व्यावहारिक परिस्थितियों, विवेक और उपलब्ध जानकारी को प्राथमिकता देना उचित है।

शुभ और अशुभ समय

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, सोमवार 12 अक्टूबर के प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 4:44 से 5:32 बजे तक

  • अभिजित मुहूर्त: सुबह लगभग 11:43 से दोपहर 12:31 बजे तक

  • विजय मुहूर्त: दोपहर लगभग 2:07 से 2:49 बजे तक

  • राहुकाल: सुबह लगभग 7:46 से 9:13 बजे तक

  • यमगण्ड: सुबह लगभग 10:40 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक

  • गुलिक काल: दोपहर लगभग 1:34 से 3:01 बजे तक

इन समयों में अलग-अलग पंचांग स्रोतों के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

 

परंपरागत मान्यता के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त को ध्यान, जप और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए उपयुक्त माना जाता है। अभिजित मुहूर्त को भी कई परंपराओं में शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय समझा जाता है। वहीं, राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल में कुछ लोग नए मांगलिक कार्य आरंभ करने से बचते हैं। पूजा या किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।

सोमवार का चौघड़िया

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ समय खंडों में बांटने की पारंपरिक पद्धति है। इसका उपयोग कई लोग दैनिक गतिविधियों और धार्मिक कार्यों के समय के चयन में करते हैं।

दिन का चौघड़िया

सोमवार के पारंपरिक क्रम में दिन की शुरुआत अमृत चौघड़िया से मानी जाती है, जिसके बाद काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर, लाभ और अमृत के क्रम आते हैं।

रात का चौघड़िया

रात्रि के पारंपरिक क्रम में चर, रोग, काल, लाभ, उद्वेग, शुभ, अमृत और चर के समय खंड माने जाते हैं।

चौघड़िया के सटीक आरंभ और समाप्ति समय की गणना स्थानीय सूर्योदय तथा सूर्यास्त के आधार पर की जाती है। इसलिए किसी विशिष्ट समय पर पूजा या अन्य कार्य करने से पहले अपने शहर के पंचांग में समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

आज का आध्यात्मिक संदेश

शारदीय नवरात्र का दूसरा दिन आत्मसंयम, धैर्य और साधना की प्रेरणा देता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप यह संदेश देता है कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास, अनुशासन और दृढ़ संकल्प महत्वपूर्ण हैं।

सफेद रंग की प्रतीकात्मकता भी इसी भाव को आगे बढ़ाती है। शांति, सरलता और पवित्र विचारों के साथ दिन की शुरुआत करना, परिवार और समाज के प्रति अपने दायित्व निभाना तथा जरूरतमंदों की सहायता करना इस अवसर को सार्थक बना सकता है।

नवरात्र के इन दिनों में पूजा-पाठ के साथ अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प भी लिया जा सकता है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना श्रद्धालुओं को धैर्य, आत्मबल और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।

नोट: पंचांग और मुहूर्त के समय नई दिल्ली के संदर्भ में दिए गए हैं। दूसरे शहरों में समय अलग हो सकता है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-