Google DeepMind में इंजीनियरों की भर्ती, डिग्री अनिवार्य नहीं; 10.9 करोड़ रुपये तक के पैकेज की चर्चा

Google DeepMind में इंजीनियरों की भर्ती, डिग्री अनिवार्य नहीं; 10.9 करोड़ रुपये तक के पैकेज की चर्चा

प्रेषित समय :21:41:06 PM / Sun, Oct 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

क्या किसी बड़ी टेक कंपनी में करोड़ों रुपये की नौकरी पाने के लिए प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की डिग्री होना जरूरी है? क्या आपकी समस्या सुलझाने की क्षमता, नए विचार विकसित करने का हुनर और तकनीकी समझ आपकी शैक्षणिक योग्यता से ज्यादा अहम हो सकती है? Google DeepMind की एक भर्ती चर्चा ने इन सवालों को फिर सुर्खियों में ला दिया है. कंपनी के नए Polaris समूह के लिए इंजीनियरों की तलाश और 1.1 मिलियन डॉलर यानी करीब 10.9 करोड़ रुपये तक के बताए गए कुल मुआवजे ने तकनीकी जगत में दिलचस्पी बढ़ा दी है.

इस भर्ती की सबसे चर्चित बात सिर्फ इसका बड़ा पैकेज नहीं, बल्कि डिग्री को अनिवार्य शर्त न बनाए जाने का संदेश है. भर्ती से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि टीम ऐसे लोगों को तलाश रही है, जो कठिन समस्याओं को हल करने और तकनीकी समाधान विकसित करने में सक्षम हों. इससे एक बार फिर सवाल उठा है कि तेजी से बदलते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में प्रतिभा का आकलन डिग्री से होना चाहिए या वास्तविक कौशल से.

क्या है Google DeepMind का Polaris प्रोजेक्ट
Google DeepMind की Polaris टीम का उद्देश्य AI कोडिंग एजेंटों की क्षमताओं को परखने के लिए बेहतर परीक्षण प्रणालियां विकसित करना बताया गया है. AI कोडिंग एजेंट ऐसे सिस्टम होते हैं, जो प्रोग्राम लिखने, कोड में गलतियां पहचानने, समस्याओं का विश्लेषण करने और सॉफ्टवेयर बनाने जैसे कामों में सहायता कर सकते हैं.

इनकी क्षमताएं बढ़ने के साथ यह जानना भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि कोई AI एजेंट वास्तव में कितना अच्छा काम करता है. क्या वह जटिल प्रोग्रामिंग समस्या का सही समाधान निकाल सकता है? क्या उसका बनाया कोड सुरक्षित और भरोसेमंद है? क्या वह केवल सामान्य उदाहरणों पर अच्छा प्रदर्शन करता है या नई और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सफल हो सकता है?

ऐसे सवालों के जवाब तलाशने के लिए मजबूत परीक्षण और मूल्यांकन प्रणालियों की जरूरत होती है. Polaris से जुड़ा काम इसी दिशा में बताया गया है. इसमें इंजीनियरों को परीक्षण उपकरण विकसित करने, नए डिजाइन आजमाने और अपने निष्कर्ष साझा करने जैसे अवसर मिल सकते हैं.

यह काम केवल कोड लिखने तक सीमित नहीं होगा. इसमें यह समझना भी अहम होगा कि किसी तकनीकी सिस्टम की क्षमता को निष्पक्ष तरीके से कैसे मापा जाए और उसकी कमजोरियों की पहचान कैसे की जाए.

डिग्री से ज्यादा समस्या सुलझाने की क्षमता पर जोर
भर्ती से जुड़ी चर्चा में Google के कर्मचारी तमाय बेसिरोग्लू की सोशल मीडिया पोस्ट ने खास ध्यान खींचा. उन्होंने असाधारण इंजीनियरों को टीम से जुड़ने का आमंत्रण देते हुए कहा कि डिग्री जरूरी नहीं है. उनके संदेश का जोर उम्मीदवार की बुद्धिमत्ता और कठिन समस्याओं को हल करने की क्षमता पर था.

यह विचार तकनीकी क्षेत्र में लंबे समय से चल रही बहस को नया संदर्भ देता है. पारंपरिक भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवार की डिग्री, विश्वविद्यालय, कार्य अनुभव और पेशेवर उपलब्धियों को काफी महत्व दिया जाता है. लेकिन AI, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक कौशल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

मसलन, कोई उम्मीदवार औपचारिक कंप्यूटर साइंस डिग्री के बिना प्रोग्रामिंग सीख सकता है, ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट पर काम कर सकता है और जटिल तकनीकी समस्याओं का समाधान विकसित कर सकता है. इसके विपरीत, डिग्री रखने वाले उम्मीदवार को भी वास्तविक परिस्थितियों में अपने कौशल का प्रदर्शन करना पड़ सकता है.

हालांकि, डिग्री की अनिवार्यता हटने का अर्थ यह नहीं है कि चयन आसान हो जाएगा. यदि कंपनी कठिन तकनीकी समस्याओं को हल करने की क्षमता को प्राथमिकता देती है, तो उम्मीदवारों को अपने कौशल का मजबूत प्रमाण देना होगा.

10.9 करोड़ रुपये का पैकेज, लेकिन एक जरूरी बात
इस भर्ती से जुड़ी पोस्ट में कुल मुआवजे की सीमा 5.5 लाख डॉलर से 11 लाख डॉलर तक बताई गई है. भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 5.4 करोड़ से 10.9 करोड़ रुपये के बीच बैठती है, हालांकि वास्तविक रकम विनिमय दर के अनुसार बदल सकती है.

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. कुल मुआवजा यानी टोटल कंपनसेशन और सालाना बेस सैलरी एक ही चीज नहीं हैं. किसी बड़े टेक पैकेज में मूल वेतन के साथ बोनस, कंपनी के शेयर या अन्य लाभ शामिल हो सकते हैं. इसलिए 10.9 करोड़ रुपये तक के बताए गए पैकेज को सीधे हाथ में मिलने वाला वेतन समझना सही नहीं होगा.

पोस्ट पर वेतन को लेकर सवाल उठने के बाद बेसिरोग्लू ने स्पष्ट किया कि बताए गए आंकड़े सही हैं, लेकिन उनमें इक्विटी यानी शेयर आधारित मुआवजे को शामिल नहीं किया गया है. इस स्पष्टीकरण ने वेतन के आंकड़ों को लेकर हुई चर्चा को और दिलचस्प बना दिया.

फिर भी, किसी उम्मीदवार को वास्तविक रूप से कितना भुगतान मिलेगा, यह पद की शर्तों, नियुक्ति के स्थान, मुआवजे के स्वरूप और अन्य विवरणों पर निर्भर करेगा. इसलिए अधिकतम राशि को हर चयनित उम्मीदवार के लिए निश्चित वेतन मानना उचित नहीं है.

सोशल मीडिया पर दो तरह की राय
भर्ती की चर्चा सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रहीं. कुछ लोगों ने इस दृष्टिकोण का समर्थन किया कि कंपनियों को उम्मीदवार की वास्तविक क्षमता को उसकी डिग्री से ऊपर महत्व देना चाहिए. उनके अनुसार, प्रतिभाशाली लोग कई बार पारंपरिक शैक्षणिक रास्ते से अलग तरीके से सीखते हैं और अपनी योग्यता साबित करते हैं.

दूसरी ओर, कुछ लोगों ने भर्ती और वेतन से जुड़े दावों की स्पष्टता पर सवाल उठाए. चर्चा में यह भी पूछा गया कि बताए गए आंकड़ों में मुआवजे के कौन-कौन से हिस्से शामिल हैं और क्या पूरी राशि को नियमित वेतन समझा जा सकता है.

यह प्रतिक्रिया बताती है कि बड़ी टेक कंपनियों की भर्ती में पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी आकर्षक सैलरी और योग्यता की शर्तें. उम्मीदवारों के लिए पद की जिम्मेदारियों, चयन प्रक्रिया और मुआवजे के विवरण को समझना जरूरी है.

क्या बदल रहा है नौकरी पाने का तरीका
AI के बढ़ते इस्तेमाल ने तकनीकी नौकरियों की प्रकृति को तेजी से बदला है. अब केवल प्रोग्रामिंग भाषा जानना ही पर्याप्त नहीं माना जाता. जटिल समस्याओं को समझना, सिस्टम की सीमाओं की पहचान करना, सुरक्षित समाधान विकसित करना और नए टूल का प्रभावी इस्तेमाल करना भी अहम हो गया है.

ऐसे माहौल में कंपनियां उम्मीदवारों के मूल्यांकन के लिए प्रोजेक्ट, तकनीकी इंटरव्यू, कोडिंग टेस्ट और व्यावहारिक समस्या-समाधान जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर सकती हैं. इससे उन उम्मीदवारों को अवसर मिल सकता है, जिन्होंने औपचारिक डिग्री के बजाय स्वतंत्र अध्ययन, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों या वास्तविक प्रोजेक्ट के जरिए कौशल विकसित किया है.

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि डिग्रियों का महत्व खत्म हो गया है. कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की औपचारिक शिक्षा बुनियादी सिद्धांत, गणितीय समझ और व्यवस्थित प्रशिक्षण प्रदान करती है. कई विशेष भूमिकाओं में ये आधार बेहद उपयोगी होते हैं. बेहतर भर्ती व्यवस्था वह होगी, जो पद की जरूरत के अनुसार शिक्षा और व्यावहारिक कौशल दोनों का उचित मूल्यांकन करे.

युवाओं के लिए क्या है सीख
Google DeepMind की Polaris भर्ती से जुड़ी चर्चा का सबसे उपयोगी संदेश यह है कि तकनीकी क्षेत्र में सीखने और अपनी क्षमता साबित करने के रास्ते एक से अधिक हो सकते हैं. डिग्री हासिल कर रहे विद्यार्थियों के लिए भी प्रोजेक्ट पर काम करना, प्रोग्रामिंग की बुनियादी समझ मजबूत करना और वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करना उपयोगी है.

जो युवा पारंपरिक डिग्री के बिना तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए ओपन-सोर्स योगदान, पोर्टफोलियो, स्वतंत्र प्रोजेक्ट और कौशल आधारित मूल्यांकन अपनी क्षमता दिखाने के साधन बन सकते हैं. हालांकि, केवल ऑनलाइन प्रमाणपत्र या कुछ छोटे प्रोजेक्ट करोड़ों के पैकेज वाली नौकरी की गारंटी नहीं देते. ऐसे पदों के लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता और चयन प्रक्रिया में मजबूत प्रदर्शन की जरूरत हो सकती है.

 Polaris भर्ती की चर्चा डिग्री बनाम कौशल की बहस को नया आयाम देती है. बड़ी टेक कंपनियों में असाधारण तकनीकी क्षमता की मांग बनी हुई है और कुछ भूमिकाओं में औपचारिक डिग्री की अनिवार्यता के बिना भी अवसर तलाशे जा सकते हैं. लेकिन असली कसौटी वही रहेगी—उम्मीदवार कठिन समस्याओं को कितनी अच्छी तरह समझता है, कितने भरोसेमंद समाधान बनाता है और अपने काम से किस तरह का परिणाम दे सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-