इंदौर में गावस्कर बोले क्रिकेट की सेवा सिर्फ बल्लेबाजी-गेंदबाजी नहीं, संजय जगदाले असली ऑलराउंडर

इंदौर में गावस्कर बोले क्रिकेट की सेवा सिर्फ बल्लेबाजी-गेंदबाजी नहीं, संजय जगदाले असली ऑलराउंडर

प्रेषित समय :18:08:45 PM / Sun, Oct 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंदौर. भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 मुकाबले से पहले रविवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर इंदौर पहुंचे. यहां उन्होंने मध्य प्रदेश क्रिकेट से लंबे समय तक जुड़े रहे संजय जगदाले पर आधारित पुस्तक ‘रग रग में क्रिकेट’ का विमोचन किया. इस अवसर पर गावस्कर ने क्रिकेट में योगदान की व्यापक भूमिका पर बात करते हुए कहा कि खेल की सेवा केवल बल्लेबाजी, गेंदबाजी या मैदान पर उतरकर खेलने तक सीमित नहीं है. चयन, कोचिंग, प्रशासन और खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने जैसे काम भी क्रिकेट को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.

गावस्कर ने संजय जगदाले के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें क्रिकेट का सच्चा सेवक बताया. उनके अनुसार, जगदाले ने अपने क्रिकेट जीवन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं और खेल के प्रति उनका समर्पण उन्हें विशिष्ट बनाता है. कार्यक्रम में क्रिकेट से जुड़े पुराने अनुभवों और भारतीय क्रिकेट के विकास में विभिन्न भूमिकाओं के महत्व पर भी चर्चा हुई.

क्रिकेट की सेवा के लिए मैदान पर उतरना ही जरूरी नहीं

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में सुनील गावस्कर ने कहा कि क्रिकेट में योगदान देने के कई तरीके हैं. किसी खिलाड़ी का प्रदर्शन जितना महत्वपूर्ण होता है, उतना ही जरूरी खेल की व्यवस्था को बेहतर बनाने में जुटे लोगों का काम भी होता है.

उन्होंने संजय जगदाले के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने खिलाड़ी, कोच, चयनकर्ता और प्रशासक सहित विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है. इस तरह किसी व्यक्ति का योगदान केवल उसके खेल प्रदर्शन से नहीं, बल्कि खेल के विकास के लिए निभाई गई जिम्मेदारियों से भी आंका जाना चाहिए.

गावस्कर के इस विचार में क्रिकेट की उस व्यवस्था की अहमियत सामने आई, जिसमें खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों, चयनकर्ताओं और प्रशासकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है. खिलाड़ियों को अवसर देना, प्रतिभाओं की पहचान करना, प्रशिक्षण की व्यवस्था करना और टीम के भीतर समन्वय बनाए रखना खेल की निरंतरता के लिए जरूरी है.

पुरानी दोस्ती और क्रिकेट के दिनों को किया याद

सुनील गावस्कर ने संजय जगदाले के साथ अपने पुराने संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि दोनों ने एक दौर में साथ क्रिकेट खेला था और वह लंबे समय से जगदाले के क्रिकेट के प्रति योगदान को देखते आए हैं.

गावस्कर ने पुराने दिनों को याद करते हुए जगदाले के शुरुआती जीवन से जुड़ा एक प्रसंग भी साझा किया. उन्होंने बताया कि स्कूल के दिनों में जगदाले की लंबाई कम थी, लेकिन बाद में उनकी लंबाई बढ़ी और उन्हें दौड़ने में भी मेहनत करनी पड़ती थी. इसके बावजूद क्रिकेट के प्रति उनका समर्पण कम नहीं हुआ.

गावस्कर ने जगदाले के अनुभव और खेल के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें वास्तविक अर्थों में ऑलराउंडर बताया. उनके अनुसार, किसी खेल में अलग-अलग जिम्मेदारियों को समझना और उन्हें पूरी निष्ठा से निभाना भी एक बड़ी उपलब्धि है.

टीम के भीतर मतभेद सुलझाने में भी अहम भूमिका

गावस्कर ने क्रिकेट में प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ टीम के भीतर संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बात की. उन्होंने कहा कि कई बार टीम या क्रिकेट संगठन में मतभेद और तनाव की स्थिति बन जाती है. ऐसे समय में अनुभवी लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, जो परिस्थितियों को समझकर संवाद के माध्यम से समाधान निकालने में मदद कर सकते हैं.

उन्होंने संजय जगदाले के बारे में कहा कि वह क्रिकेट से जुड़े अंदरूनी तनाव और परिस्थितियों को अच्छी तरह समझते हैं. उनके साथ बातचीत करना इसलिए भी उपयोगी रहा, क्योंकि वह खेल को केवल मैदान पर होने वाली गतिविधियों तक सीमित करके नहीं देखते.

क्रिकेट में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के अलावा चयन, टीम संयोजन, प्रशासनिक निर्णय और आपसी तालमेल भी महत्वपूर्ण होते हैं. इन सभी क्षेत्रों में अनुभव रखने वाले लोगों की भूमिका खेल के सुचारु संचालन में मदद कर सकती है.

‘रग रग में क्रिकेट’ में जगदाले के योगदान का उल्लेख

संजय जगदाले पर आधारित पुस्तक ‘रग रग में क्रिकेट’ क्रिकेट के प्रति उनके योगदान और विभिन्न भूमिकाओं को सामने लाने के उद्देश्य से लिखी गई है. पुस्तक के लेखक क्रिकेट प्रशंसक किरण वाईकर और डॉ. सुनील दुधाले हैं.

पुस्तक विमोचन के दौरान गावस्कर ने जगदाले के क्रिकेट जीवन और खेल के प्रति उनके योगदान की चर्चा की. उन्होंने इस तरह के कार्यों को क्रिकेट के इतिहास और उससे जुड़े लोगों के अनुभवों को संरक्षित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया.

खेल साहित्य खिलाड़ियों के आंकड़ों और उपलब्धियों से आगे बढ़कर उन लोगों के योगदान को दर्ज करने का माध्यम भी बन सकता है, जिन्होंने प्रशिक्षण, चयन और प्रशासन के जरिए क्रिकेट की व्यवस्था को आगे बढ़ाया. संजय जगदाले का उदाहरण इसी व्यापक भूमिका को रेखांकित करता है.

गावस्कर और सचिन तेंदुलकर से प्रभावित रहे जगदाले

कार्यक्रम में संजय जगदाले ने भी अपने क्रिकेट जीवन के अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि युवा अवस्था में सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर ने उन्हें काफी प्रभावित किया था.

जगदाले ने गावस्कर की बल्लेबाजी को करीब से देखने का अनुभव याद किया. उन्होंने बताया कि जब वह स्लिप में फील्डिंग करते थे, तब गावस्कर को बल्लेबाजी करते हुए ध्यान से देखते थे. इससे उन्हें खेल की बारीकियों को समझने का अवसर मिलता था.

उन्होंने सचिन तेंदुलकर से जुड़ा एक पुराना प्रसंग भी साझा किया. जगदाले के अनुसार, सचिन जब 15 वर्ष के थे, तब वह इंदौर में आयोजित एक क्रिकेट शिविर में आए थे. उन्हें खेलते हुए देखकर जगदाले को अंदाजा हो गया था कि वह आगे चलकर बड़ी पहचान बना सकते हैं.

इन अनुभवों से भारतीय क्रिकेट की विभिन्न पीढ़ियों के बीच सीखने और प्रेरणा का संबंध भी सामने आता है. अनुभवी खिलाड़ियों का खेल युवा क्रिकेटरों के लिए तकनीक, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा को समझने का माध्यम रहा है.

भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले से पहले क्रिकेट गतिविधियों के बीच आयोजन

सुनील गावस्कर का इंदौर दौरा भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाले टी20 मुकाबले से पहले हुआ. इस दौरान पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में क्रिकेट के खेल पक्ष के साथ उसके प्रशासनिक और संगठनात्मक पहलुओं पर भी चर्चा हुई.

इंदौर लंबे समय से मध्य प्रदेश में क्रिकेट गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है. ऐसे में क्रिकेट से जुड़े पुराने अनुभवों और खेल के विकास में योगदान देने वाले लोगों की भूमिका पर चर्चा का विशेष संदर्भ बनता है.

गावस्कर के विचारों का मुख्य संदेश यही रहा कि क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए केवल मैदान पर प्रदर्शन पर्याप्त नहीं है. खिलाड़ियों को तैयार करने, प्रतिभाओं को अवसर देने, चयन प्रक्रिया में योगदान करने और खेल से जुड़े संस्थागत कार्यों को संभालने वाले लोग भी इसकी मजबूती में योगदान देते हैं.

संजय जगदाले के क्रिकेट जीवन पर आधारित पुस्तक के विमोचन के दौरान सामने आए अनुभवों ने इसी पहलू को रेखांकित किया कि किसी खेल की विरासत खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ-साथ उन लोगों के काम से भी बनती है, जो लंबे समय तक उसके विकास के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में सक्रिय रहते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-