आज का दिन 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार मां कात्यायनी की आराधना, नवरात्र का छठा दिन और आज का पंचांग

आज का दिन 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार मां कात्यायनी की आराधना, नवरात्र का छठा दिन और आज का पंचांग

प्रेषित समय :18:12:38 PM / Tue, Oct 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963

16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को शारदीय नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाएगी. धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को शक्ति, साहस, धर्म की रक्षा और नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक माना जाता है. उनकी आराधना कर भक्त सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं.

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. शुक्रवार होने के कारण इस दिन मां दुर्गा के साथ देवी लक्ष्मी का स्मरण भी कई परंपराओं में किया जाता है. श्रद्धालु पूजा-पाठ, मंत्र-जप और दान-पुण्य के माध्यम से भक्ति व्यक्त करते हैं.

मां कात्यायनी की पूजा का धार्मिक महत्व

मां कात्यायनी नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार, महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा. उन्हें सिंह पर सवार, चार भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है. उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र और कमल जैसे प्रतीक दिखाई देते हैं.

मां कात्यायनी की उपासना को साहस, आत्मविश्वास और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा से जोड़ा जाता है. नवरात्र के छठे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और देवी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित करें. इसके बाद पुष्प, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित कर आरती करें.

मां कात्यायनी का मंत्र “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है. पूजा में श्रद्धा, संयम, सदाचार और दूसरों के प्रति सद्भाव को विशेष महत्व दिया जाता है.

आज के रंग का महत्व

नवरात्र के छठे दिन, 16 अक्टूबर 2026 के लिए कई रंग-सूचियों में लाल रंग प्रमुख रूप से बताया जाता है. लाल रंग को ऊर्जा, शक्ति, उत्साह और साहस का प्रतीक माना जाता है. इस अवसर पर भक्त लाल रंग के वस्त्र, दुपट्टे या अन्य परिधान पहनकर उत्सव की परंपरा में शामिल हो सकते हैं.

हालांकि, नवरात्र के रंगों का क्रम क्षेत्रीय परंपराओं और अलग-अलग कैलेंडरों में भिन्न हो सकता है. इसलिए रंग को अनिवार्य नियम के रूप में लेने के बजाय श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्सव से जुड़ी परंपरा के रूप में देखना उचित है. देवी की आराधना में वस्त्रों के रंग से अधिक महत्व भक्ति, पवित्रता और अच्छे आचरण का है.

आज का पंचांग 16 अक्टूबर 2026

  • दिन: शुक्रवार

  • मास: आश्विन

  • पक्ष: शुक्ल पक्ष

  • तिथि: शुक्ल षष्ठी

  • नक्षत्र: ज्येष्ठा, इसके बाद मूल

  • योग: शोभन

  • करण: कौलव, इसके बाद तैतिल

  • विक्रम संवत: 2083

  • ऋतु: शरद

  • चंद्र राशि: वृश्चिक, इसके बाद धनु

  • सूर्य राशि: कन्या

पंचांग गणना के अनुसार, षष्ठी तिथि 17 अक्टूबर की सुबह लगभग 5:54 बजे तक रहेगी. इसके बाद शुक्ल सप्तमी आरंभ होगी. ज्येष्ठा नक्षत्र 16 अक्टूबर की सुबह लगभग 6:47 बजे तक रहेगा, जिसके बाद मूल नक्षत्र आरंभ होगा. शोभन योग रात लगभग 10:06 बजे तक रहने का उल्लेख मिलता है.

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय

  • सूर्योदय: सुबह 6:22 बजे

  • सूर्यास्त: शाम 5:51 बजे

  • चंद्रोदय: सुबह लगभग 11:39 बजे

  • चंद्रास्त: रात लगभग 9:36 बजे

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं. यहां दिए गए समय नई दिल्ली के आधार पर हैं.

आज के शुभ मुहूर्त

धार्मिक परंपराओं में कुछ समय विशेष को पूजा-पाठ, ध्यान, जप और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है. 16 अक्टूबर के लिए नई दिल्ली के आधार पर प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 4:46 से 5:34 बजे तक

  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:01 से 2:47 बजे तक

  • गोधूलि मुहूर्त: शाम लगभग 5:51 से 6:16 बजे तक

इन समयों का उपयोग पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूजा, ध्यान और संकल्प के लिए किया जाता है. किसी विशेष संस्कार या महत्वपूर्ण आयोजन के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा.

आज के अशुभ काल

पंचांग परंपरा में राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल को कुछ शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए टालने की सलाह दी जाती है. 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के अनुसार इनका समय इस प्रकार है:

  • राहुकाल: सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक

  • यमगंड: दोपहर 2:58 से 4:24 बजे तक

  • गुलिक काल: सुबह 7:48 से 9:14 बजे तक

ये समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार बदल सकते हैं. इन्हें पारंपरिक पंचांग मान्यता के रूप में देखा जाना चाहिए, किसी कार्य की सफलता या असफलता की निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं.

आज का चौघड़िया मुहूर्त

चौघड़िया दिन और रात को अलग-अलग समय खंडों में बांटने की पारंपरिक पद्धति है. नई दिल्ली के आधार पर दिन का अनुमानित चौघड़िया क्रम इस प्रकार है:

चौघड़िया

समय

चर

सुबह 6:22 से 7:48 बजे

लाभ

सुबह 7:48 से 9:14 बजे

अमृत

सुबह 9:14 से 10:40 बजे

काल

सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 बजे

शुभ

दोपहर 12:06 से 1:33 बजे

रोग

दोपहर 1:33 से 2:59 बजे

उद्वेग

दोपहर 2:59 से शाम 4:25 बजे

चर

शाम 4:25 से 5:51 बजे

रात्रि चौघड़िया का अनुमानित क्रम:

चौघड़िया

समय

उद्वेग

शाम 5:51 से 7:25 बजे

शुभ

शाम 7:25 से 8:59 बजे

अमृत

रात 8:59 से 10:33 बजे

चर

रात 10:33 से 12:07 बजे

रोग

रात 12:07 से 1:40 बजे

काल

रात 1:40 से 3:14 बजे

लाभ

रात 3:14 से 4:48 बजे

उद्वेग

सुबह 4:48 से 6:22 बजे

चौघड़िया के समय गणना-पद्धति और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकते हैं.

ग्रह स्थिति और दिन का ज्योतिषीय संदर्भ

16 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि में रहेगा. चंद्रमा सुबह लगभग 6:47 बजे तक वृश्चिक राशि में रहने के बाद धनु राशि में प्रवेश करेगा. ज्योतिषीय परंपरा में कन्या राशि को व्यावहारिकता और अनुशासन से, वृश्चिक राशि को दृढ़ संकल्प से तथा धनु राशि को ज्ञान, विस्तार और आशावादी दृष्टिकोण से जोड़ा जाता है.

शुक्रवार को परंपरागत रूप से देवी उपासना, सौंदर्य, सुख-सुविधाओं और पारिवारिक सौहार्द से संबंधित माना जाता है. इस दिन अपने व्यवहार में विनम्रता, कार्यों में अनुशासन और संबंधों में संतुलन बनाए रखने का संकल्प लिया जा सकता है. ज्योतिषीय संकेत धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं; जीवन के परिणाम व्यक्ति के प्रयासों, निर्णयों और परिस्थितियों पर भी निर्भर करते हैं.

आज का आध्यात्मिक संदेश

नवरात्र का छठा दिन मां कात्यायनी की शक्ति और साहस का स्मरण कराता है. उनकी आराधना के साथ अन्याय का विरोध करने, सही निर्णय लेने और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने का संकल्प लिया जा सकता है.

आध्यात्मिकता का अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार में करुणा, सत्य और जिम्मेदारी को स्थान देना भी है. दिन की शुरुआत प्रार्थना या मंत्र-जप से करें और दूसरों के प्रति सहयोगपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास करें.

विशेष सूचना: इस लेख में दिए गए पंचांग और मुहूर्त के समय नई दिल्ली पर आधारित हैं. दूसरे शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और चौघड़िया के समय अलग हो सकते हैं. नवरात्र के रंगों की सूची भी क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार बदल सकती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-