प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963
17 अक्टूबर 2026, शनिवार को शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाएगी. मां कालरात्रि को शक्ति, निर्भयता और नकारात्मकता पर विजय का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से भय दूर करने, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और जीवन में साहस बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है.
मां कालरात्रि का स्वरूप उग्र दिखाई देता है, लेकिन उन्हें अपने भक्तों का कल्याण करने वाली देवी माना गया है. नवरात्र के सातवें दिन श्रद्धालु पूजा-पाठ, मंत्र-जप और आरती के माध्यम से देवी का स्मरण करते हैं. शनिवार होने के कारण कई परंपराओं में शनिदेव का स्मरण और जरूरतमंदों की सहायता करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
मां कालरात्रि की पूजा का धार्मिक महत्व
मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं. धार्मिक चित्रण में उनका वर्ण गहरा, केश खुले और स्वरूप तेजस्वी बताया गया है. उनकी चार भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र और अभय मुद्रा के प्रतीक दिखाई देते हैं. उनका वाहन गर्दभ यानी गधा माना जाता है. देवी का यह स्वरूप संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी साहस और विश्वास बनाए रखना चाहिए.
मान्यता है कि मां कालरात्रि की उपासना से भक्तों को भय पर नियंत्रण रखने, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है. नवरात्र के सातवें दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, देवी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित करें और पुष्प, फल तथा अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें.
मां कालरात्रि का मंत्र “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः” श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है. पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती या देवी के अन्य स्तोत्रों का पाठ भी परंपरा के अनुसार किया जाता है. पूजा में श्रद्धा, संयम और सदाचार को विशेष महत्व दिया जाता है.
आज के रंग का महत्व
शारदीय नवरात्र के सातवें दिन, 17 अक्टूबर 2026 के लिए कई पंचांगों में ग्रे यानी स्लेटी रंग बताया गया है. इस रंग को संतुलन, स्थिरता और गंभीरता का प्रतीक माना जाता है. भक्त चाहें तो स्लेटी रंग के वस्त्र, दुपट्टे या अन्य परिधान पहनकर नवरात्र की परंपरा में शामिल हो सकते हैं.
नवरात्र के रंगों का क्रम अलग-अलग क्षेत्रों और कैलेंडरों के अनुसार बदल सकता है. इसलिए रंग को अनिवार्य नियम के रूप में लेने के बजाय इसे श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्सव से जुड़ी परंपरा के रूप में देखना उचित है. मां कालरात्रि की आराधना में वस्त्रों के रंग से अधिक महत्व भक्ति, साहस और अच्छे आचरण का है.
आज का पंचांग 17 अक्टूबर 2026
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दिन: शनिवार
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मास: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष
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तिथि: शुक्ल सप्तमी
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नक्षत्र: मूल
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योग: अतिगंड
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करण: गर
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विक्रम संवत: 2083
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ऋतु: शरद
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चंद्र राशि: धनु
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सूर्य राशि: कन्या
पंचांग गणना के अनुसार, शुक्ल सप्तमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह लगभग 8:29 बजे तक रहेगी. इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ होगी. मूल नक्षत्र दिन के समय प्रभावी रहेगा. अतिगंड योग रात लगभग 11:02 बजे तक रहने का उल्लेख मिलता है.
तिथि, नक्षत्र और योग के समय स्थान तथा पंचांग गणना-पद्धति के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है. यहां दिए गए समय नई दिल्ली के आधार पर हैं.
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
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सूर्योदय: सुबह 6:27 बजे
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सूर्यास्त: शाम 5:46 बजे
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चंद्रोदय: दोपहर लगभग 12:10 बजे
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चंद्रास्त: रात लगभग 10:44 बजे
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदलते हैं. व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा.
आज के शुभ मुहूर्त
धार्मिक परंपराओं में कुछ समय विशेष को पूजा-पाठ, ध्यान, जप और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है. 17 अक्टूबर के लिए नई दिल्ली के आधार पर प्रमुख समय इस प्रकार हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 से 5:39 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर 2:00 से 2:45 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:23 से 6:09 बजे तक
इन समयों का उपयोग पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूजा, ध्यान, मंत्र-जप और संकल्प के लिए किया जाता है. किसी विशेष संस्कार या महत्वपूर्ण आयोजन के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित परंपरा के अनुसार मुहूर्त तय करना चाहिए.
आज के अशुभ काल
पंचांग परंपरा में राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल को कुछ शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए टालने की सलाह दी जाती है. 17 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के अनुसार इनका समय इस प्रकार है:
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राहुकाल: सुबह 9:17 से 10:42 बजे तक
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यमगंड: दोपहर 1:31 से 2:56 बजे तक
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गुलिक काल: सुबह 6:27 से 7:52 बजे तक
ये समय स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार बदल सकते हैं. इन्हें पारंपरिक पंचांग मान्यता के रूप में देखा जाना चाहिए, किसी कार्य की सफलता या असफलता की निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं.
आज का चौघड़िया मुहूर्त
चौघड़िया दिन और रात को अलग-अलग समय खंडों में बांटने की पारंपरिक पद्धति है. नई दिल्ली के सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर दिन का अनुमानित चौघड़िया क्रम इस प्रकार है:
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चौघड़िया |
समय |
|---|---|
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काल |
सुबह 6:27 से 7:52 बजे |
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शुभ |
सुबह 7:52 से 9:17 बजे |
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रोग |
सुबह 9:17 से 10:42 बजे |
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उद्वेग |
सुबह 10:42 से दोपहर 12:07 बजे |
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चर |
दोपहर 12:07 से 1:31 बजे |
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लाभ |
दोपहर 1:31 से 2:56 बजे |
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अमृत |
दोपहर 2:56 से शाम 4:21 बजे |
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काल |
शाम 4:21 से 5:46 बजे |
रात्रि चौघड़िया का अनुमानित क्रम:
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चौघड़िया |
समय |
|---|---|
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लाभ |
शाम 5:46 से 7:21 बजे |
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उद्वेग |
शाम 7:21 से 8:56 बजे |
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शुभ |
रात 8:56 से 10:31 बजे |
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अमृत |
रात 10:31 से 12:06 बजे |
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चर |
रात 12:06 से 1:41 बजे |
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रोग |
रात 1:41 से 3:16 बजे |
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काल |
रात 3:16 से 4:51 बजे |
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लाभ |
सुबह 4:51 से 6:27 बजे |
चौघड़िया के समय गणना-पद्धति और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकते हैं.
ग्रह स्थिति और दिन का ज्योतिषीय संदर्भ
17 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा धनु राशि में रहेगा. ज्योतिषीय परंपरा में कन्या राशि को अनुशासन, व्यावहारिकता और बारीकियों पर ध्यान देने से जोड़ा जाता है, जबकि धनु राशि को ज्ञान, आशावाद और व्यापक दृष्टिकोण का प्रतीक माना जाता है.
शनिवार को परंपरागत रूप से शनिदेव के स्मरण, सेवा, दान और जिम्मेदारी निभाने से जोड़ा जाता है. इस दिन अपने कार्यों में ईमानदारी, व्यवहार में धैर्य और जरूरतमंदों के प्रति सहयोग की भावना बनाए रखने का संकल्प लिया जा सकता है. ज्योतिषीय संकेत धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं; जीवन के परिणाम व्यक्ति के प्रयासों, निर्णयों और परिस्थितियों पर भी निर्भर करते हैं.
आज का आध्यात्मिक संदेश
नवरात्र का सातवां दिन मां कालरात्रि की शक्ति और निर्भयता का स्मरण कराता है. उनकी आराधना के साथ अपने भीतर के भय, क्रोध और नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण रखने तथा कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य से करने का संकल्प लिया जा सकता है.
सच्चा साहस केवल चुनौतियों का सामना करने में नहीं, बल्कि सही रास्ते पर बने रहने और दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने में भी है. दिन की शुरुआत प्रार्थना, ध्यान या मंत्र-जप से करें और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने का प्रयास करें.
विशेष सूचना: इस लेख में दिए गए पंचांग और मुहूर्त के समय नई दिल्ली पर आधारित हैं. दूसरे शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और चौघड़िया के समय अलग हो सकते हैं. नवरात्र के रंगों की सूची भी क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार बदल सकती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

