प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963 14 अक्टूबर 2026, बुधवार को शारदीय नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने वाली आदिशक्ति मानी जाती हैं। उनकी उपासना से ऊर्जा, सकारात्मकता, साहस और समृद्धि की कामना की जाती है।
नवरात्र के प्रत्येक दिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा का विधान है। चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना करते हुए भक्त सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। बुधवार का दिन होने के कारण इस दिन गणेशजी की पूजा और मंत्र स्मरण भी परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है।
मां कूष्मांडा की पूजा का धार्मिक महत्व
मां कूष्मांडा को सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक चित्रण में उन्हें अष्टभुजा देवी के रूप में दर्शाया जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला जैसे प्रतीक दिखाई देते हैं। उनका वाहन सिंह है, जो शक्ति, निर्भीकता और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि मां कूष्मांडा की उपासना से जीवन में उत्साह, मानसिक शक्ति और सकारात्मक सोच का संचार होता है। नवरात्र के चौथे दिन भक्त सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर देवी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित करते हैं। इसके बाद पुष्प, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करते हैं।
मां कूष्मांडा का मंत्र “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः” श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण भाव श्रद्धा, संयम और सदाचार का है।
आज के रंग का महत्व
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन, 14 अक्टूबर 2026 के लिए कई रंग-सूचियों में रॉयल ब्लू यानी गहरा नीला रंग बताया गया है। यह रंग आत्मविश्वास, स्थिरता और गरिमा का प्रतीक माना जाता है। भक्त चाहें तो नीले रंग के वस्त्र, दुपट्टे या अन्य परिधानों को अपने पहनावे में शामिल कर सकते हैं।
हालांकि, नवरात्र के रंगों की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार बदल सकती है। इसलिए रंग को अनिवार्य नियम की तरह लेने के बजाय इसे उत्सव और श्रद्धा से जुड़ी परंपरा के रूप में देखना उचित है। मां की पूजा में वस्त्रों के रंग से अधिक महत्व भक्ति, स्वच्छता और अच्छे आचरण का है।
आज का पंचांग 14 अक्टूबर 2026
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दिन: बुधवार
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मास: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष
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तिथि: शुक्ल चतुर्थी
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नक्षत्र: अनुराधा
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योग: आयुष्मान
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करण: वणिज
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विक्रम संवत: 2083
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ऋतु: शरद
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चंद्र राशि: वृश्चिक
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सूर्य राशि: कन्या
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 14 अक्टूबर की रात लगभग 1:13 बजे तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि आरंभ होगी। अनुराधा नक्षत्र 15 अक्टूबर की सुबह लगभग 4:03 बजे तक रहने का अनुमान है। आयुष्मान योग रात लगभग 8:38 बजे तक रह सकता है।
पंचांग की गणना में स्थान के अनुसार अंतर संभव है। यहां दिए गए समय नई दिल्ली के आधार पर हैं।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
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सूर्योदय: सुबह 6:21 बजे
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सूर्यास्त: शाम 5:52 बजे
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चंद्रोदय: सुबह लगभग 9:44 बजे
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चंद्रास्त: रात लगभग 8:01 बजे
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदलते हैं। पूजा, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
आज के शुभ मुहूर्त
धार्मिक परंपराओं में कुछ समय विशेष को शुभ कार्यों, पूजा-पाठ और ध्यान के लिए अनुकूल माना जाता है। 14 अक्टूबर के लिए नई दिल्ली के आधार पर प्रमुख समय इस प्रकार हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:41 से 5:31 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर लगभग 2:07 से 2:49 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम लगभग 5:28 से 6:16 बजे तक
इन समयों का उपयोग पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूजा, ध्यान, संकल्प और अन्य शुभ कार्यों के लिए किया जाता है। किसी विशेष संस्कार या महत्वपूर्ण आयोजन के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित परंपरा के अनुसार मुहूर्त तय करना चाहिए।
आज के अशुभ काल
पंचांग में राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल को पारंपरिक रूप से कुछ शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए टालने की सलाह दी जाती है। 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के अनुसार इनका समय इस प्रकार है:
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राहुकाल: दोपहर 12:07 से 1:33 बजे तक
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यमगंड: सुबह 7:47 से 9:14 बजे तक
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गुलिक काल: सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक
ये समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। इनका उल्लेख धार्मिक पंचांग परंपरा के आधार पर किया जाता है; इन्हें किसी कार्य की सफलता या असफलता की निश्चित भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए।
आज का चौघड़िया मुहूर्त
चौघड़िया दिन को अलग-अलग समय खंडों में बांटने की पारंपरिक पद्धति है। नई दिल्ली के आधार पर दिन के चौघड़िया का अनुमानित क्रम इस प्रकार है:
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चौघड़िया |
समय |
|---|---|
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लाभ |
सुबह 6:21 से 7:47 बजे |
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अमृत |
सुबह 7:47 से 9:14 बजे |
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काल |
सुबह 9:14 से 10:40 बजे |
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शुभ |
सुबह 10:40 से दोपहर 12:07 बजे |
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रोग |
दोपहर 12:07 से 1:33 बजे |
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उद्वेग |
दोपहर 1:33 से 2:59 बजे |
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चर |
दोपहर 2:59 से शाम 4:26 बजे |
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लाभ |
शाम 4:26 से 5:52 बजे |
रात्रि चौघड़िया का अनुमानित क्रम:
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चौघड़िया |
समय |
|---|---|
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उद्वेग |
शाम 5:52 से 7:26 बजे |
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शुभ |
शाम 7:26 से रात 9:00 बजे |
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अमृत |
रात 9:00 से 10:33 बजे |
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चर |
रात 10:33 से 12:07 बजे |
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रोग |
रात 12:07 से 1:40 बजे |
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काल |
रात 1:40 से 3:14 बजे |
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लाभ |
रात 3:14 से 4:48 बजे |
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उद्वेग |
सुबह 4:48 से 6:21 बजे |
चौघड़िया के समय गणना-पद्धति और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकते हैं।
ग्रह स्थिति और दिन का ज्योतिषीय संदर्भ
14 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि और चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में कन्या राशि को व्यवहारिकता, व्यवस्था और सूक्ष्म निरीक्षण से जोड़ा जाता है, जबकि वृश्चिक राशि को गहराई, दृढ़ संकल्प और भावनात्मक तीव्रता का प्रतीक माना जाता है।
इन पारंपरिक संकेतों को आत्मचिंतन, अनुशासन और अपने कार्यों की समीक्षा के अवसर के रूप में लिया जा सकता है। किसी व्यक्ति के जीवन में वास्तविक परिणाम उसके निर्णयों, परिस्थितियों और प्रयासों सहित अनेक कारकों पर निर्भर करते हैं।
आज का आध्यात्मिक संदेश
नवरात्र का चौथा दिन हमें सृजनशीलता, ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टिकोण का महत्व समझाता है। मां कूष्मांडा की आराधना के साथ अपने भीतर उत्साह बनाए रखने, परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाने और दूसरों के प्रति सहयोगपूर्ण व्यवहार अपनाने का संकल्प लिया जा सकता है।
दिन की शुरुआत प्रार्थना, ध्यान या कुछ समय मौन में बिताने से मन को एकाग्र करने में सहायता मिल सकती है। धार्मिक आस्था के साथ अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना भी आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विशेष सूचना: इस लेख में दिए गए पंचांग और मुहूर्त के समय नई दिल्ली पर आधारित हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और चौघड़िया के समय अलग हो सकते हैं। नवरात्र के रंगों की सूची भी क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार बदल सकती है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

