प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963
15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाएगी. मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता हैं. उन्हें मातृत्व, करुणा, ममता, संरक्षण और संतान के कल्याण का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी उपासना से परिवार में सुख-शांति, सकारात्मकता और समृद्धि की कामना की जाती है.
नवरात्र के पांचवें दिन भक्त मां स्कंदमाता की आराधना कर परिवार की खुशहाली, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और जीवन में विवेक व सद्बुद्धि की प्रार्थना करते हैं. गुरुवार होने के कारण इस दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का स्मरण भी कई परंपराओं में विशेष महत्व रखता है. पूजा-पाठ के साथ जरूरतमंदों की सहायता, सेवा और सदाचार अपनाना भी इस दिन के आध्यात्मिक संदेश का हिस्सा माना जाता है.
मां स्कंदमाता की पूजा का धार्मिक महत्व
मां स्कंदमाता नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप हैं. उनके नाम में ही मातृत्व और संरक्षण का भाव समाहित है. धार्मिक चित्रण में मां स्कंदमाता को चार भुजाओं वाली देवी के रूप में दिखाया जाता है. उनकी गोद में बालरूप भगवान स्कंद विराजमान रहते हैं. उनके हाथों में कमल के पुष्प दिखाई देते हैं और उनका स्वरूप ममता, शक्ति तथा शांति का संदेश देता है. उन्हें सिंह पर विराजमान या कमल के आसन पर बैठी हुई देवी के रूप में भी दर्शाया जाता है.
मान्यता है कि मां स्कंदमाता की उपासना से भक्तों को मानसिक शांति, साहस और परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिलती है. नवरात्र के पांचवें दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर देवी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप प्रज्वलित किया जा सकता है. इसके बाद पुष्प, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित कर आरती की जाती है.
मां स्कंदमाता का मंत्र “ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः” श्रद्धापूर्वक जप किया जा सकता है. परंपरा में केले का भोग अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है. पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा, पवित्रता, संयम और सद्भाव का माना जाता है.
आज के रंग का महत्व
शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन, 15 अक्टूबर 2026 के लिए पीला रंग प्रमुख नवरात्र रंग के रूप में बताया गया है. पीले रंग को प्रसन्नता, उत्साह, ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. इस अवसर पर भक्त पीले रंग के वस्त्र, दुपट्टे या अन्य परिधान पहनकर उत्सव की परंपरा में शामिल हो सकते हैं.
रंगों का यह क्रम क्षेत्रीय परंपराओं और अलग-अलग कैलेंडरों के अनुसार बदल सकता है. इसलिए रंग को अनिवार्य नियम के रूप में लेने के बजाय श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्सव से जुड़ी परंपरा के रूप में देखना उचित है. मां स्कंदमाता की पूजा में वस्त्रों के रंग से अधिक महत्व भक्ति, अच्छे विचारों और दूसरों के प्रति करुणा का है.
आज का पंचांग 15 अक्टूबर 2026
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दिन: गुरुवार
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मास: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष
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तिथि: शुक्ल पंचमी
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नक्षत्र: ज्येष्ठा
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योग: सौभाग्य
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करण: बव
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विक्रम संवत: 2083
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ऋतु: शरद
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चंद्र राशि: वृश्चिक
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सूर्य राशि: कन्या
पंचांग गणना के अनुसार, 15 अक्टूबर को शुक्ल पंचमी तिथि रहेगी और इसके बाद 16 अक्टूबर की सुबह लगभग 3:25 बजे षष्ठी तिथि आरंभ होगी. ज्येष्ठा नक्षत्र दिन के दौरान प्रभावी रहेगा. सौभाग्य योग रात लगभग 9:14 बजे तक रहने के बाद शोभन योग आरंभ होने का उल्लेख मिलता है.
पंचांग के समय स्थान और गणना-पद्धति के अनुसार अलग हो सकते हैं. यहां दिए गए सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्त के समय नई दिल्ली के आधार पर हैं.
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
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सूर्योदय: सुबह 6:21 बजे
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सूर्यास्त: शाम 5:51 बजे
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चंद्रोदय: सुबह 10:41 बजे
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चंद्रास्त: रात 8:48 बजे
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदलते हैं. व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा.
आज के शुभ मुहूर्त
धार्मिक परंपराओं में कुछ समय विशेष को पूजा-पाठ, ध्यान, जप और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है. 15 अक्टूबर के लिए नई दिल्ली के आधार पर प्रमुख समय इस प्रकार हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:41 से 5:31 बजे तक
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अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर लगभग 2:06 से 2:48 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम लगभग 5:27 से 6:15 बजे तक
इन समयों का उपयोग परंपरागत मान्यताओं के अनुसार पूजा, ध्यान, संकल्प और अन्य शुभ कार्यों के लिए किया जाता है. किसी विशेष संस्कार या महत्वपूर्ण आयोजन के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित परंपरा के अनुसार मुहूर्त तय करना चाहिए.
आज के अशुभ काल
पंचांग में राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल को पारंपरिक रूप से कुछ शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए टालने की सलाह दी जाती है. 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के अनुसार इनका समय इस प्रकार है:
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राहुकाल: दोपहर 1:33 से 2:59 बजे तक
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यमगंड: सुबह 6:21 से 7:48 बजे तक
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गुलिक काल: सुबह 9:14 से 10:40 बजे तक
ये समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं. इनका उल्लेख पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के आधार पर किया जाता है; इन्हें किसी कार्य की सफलता या असफलता की निश्चित भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए.
आज का चौघड़िया मुहूर्त
चौघड़िया दिन और रात को अलग-अलग समय खंडों में बांटने की पारंपरिक पद्धति है. नई दिल्ली के आधार पर दिन का अनुमानित चौघड़िया क्रम इस प्रकार है:
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चौघड़िया |
समय |
|---|---|
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शुभ |
सुबह 6:21 से 7:48 बजे |
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रोग |
सुबह 7:48 से 9:14 बजे |
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उद्वेग |
सुबह 9:14 से 10:40 बजे |
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चल |
सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 बजे |
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लाभ |
दोपहर 12:06 से 1:33 बजे |
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अमृत |
दोपहर 1:33 से 2:59 बजे |
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काल |
दोपहर 2:59 से शाम 4:25 बजे |
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शुभ |
शाम 4:25 से 5:51 बजे |
रात्रि चौघड़िया का अनुमानित क्रम:
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चौघड़िया |
समय |
|---|---|
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अमृत |
शाम 5:51 से 7:25 बजे |
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चल |
शाम 7:25 से 8:59 बजे |
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रोग |
रात 8:59 से 10:33 बजे |
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काल |
रात 10:33 से 12:07 बजे |
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लाभ |
रात 12:07 से 1:40 बजे |
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उद्वेग |
रात 1:40 से 3:14 बजे |
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शुभ |
सुबह 3:14 से 4:48 बजे |
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अमृत |
सुबह 4:48 से 6:22 बजे |
चौघड़िया के समय गणना-पद्धति और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकते हैं.
ग्रह स्थिति और दिन का ज्योतिषीय संदर्भ
15 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि और चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा. ज्योतिषीय परंपरा में कन्या राशि को व्यावहारिकता, अनुशासन और सूक्ष्म निरीक्षण से जोड़ा जाता है, जबकि वृश्चिक राशि को दृढ़ संकल्प, गहराई और भावनात्मक तीव्रता का प्रतीक माना जाता है.
गुरुवार को परंपरागत रूप से ज्ञान, शिक्षा, आध्यात्मिक चिंतन और गुरुजनों के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है. इस दिन अपने कार्यों की समीक्षा करने, महत्वपूर्ण निर्णयों पर सोच-विचार करने और परिवार के साथ समय बिताने का संकल्प लिया जा सकता है. ज्योतिषीय संकेत धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं; जीवन के वास्तविक परिणाम व्यक्ति के प्रयासों, निर्णयों और परिस्थितियों पर भी निर्भर करते हैं.
आज का आध्यात्मिक संदेश
नवरात्र का पांचवां दिन मां स्कंदमाता के मातृत्व, करुणा और संरक्षण के भाव को समर्पित है. उनकी आराधना के साथ परिवार के सदस्यों के प्रति संवेदनशील रहने, बच्चों को अच्छे संस्कार देने और जरूरतमंदों की सहायता करने का संकल्प लिया जा सकता है.
मां स्कंदमाता का स्वरूप यह संदेश देता है कि सच्ची शक्ति केवल साहस में नहीं, बल्कि प्रेम, धैर्य और जिम्मेदारी निभाने में भी होती है. दिन की शुरुआत प्रार्थना, ध्यान या मंत्र-जप से करके मन को शांत रखने और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने का प्रयास किया जा सकता है.
विशेष सूचना: इस लेख में दिए गए पंचांग और मुहूर्त के समय नई दिल्ली पर आधारित हैं. दूसरे शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और चौघड़िया के समय अलग हो सकते हैं. नवरात्र के रंगों की सूची भी क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार बदल सकती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

