नई दिल्ली/मुंबई: चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। याचिकाओं में तकनीकी कमियां सामने आने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि दस्तावेजों में त्रुटियां हो सकती हैं, लेकिन विपक्ष इन्हें दूर कर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।
राउत ने कहा कि वह भी इन याचिकाओं के याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्षी दल एकजुट हैं। उनका कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को अदालत के सामने उठाना चाहता है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं की प्रक्रिया पर उठे सवाल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विपक्ष की ओर से दाखिल 11 याचिकाओं में से नौ में तकनीकी खामियां पाई गईं। इन कमियों के चलते याचिकाओं की सूचीबद्धता की प्रक्रिया प्रभावित हुई। सामने आई आपत्तियों में आवश्यक कानूनी दस्तावेजों की कमी, अदालती शुल्क में अंतर और कागजात से संबंधित अन्य त्रुटियां शामिल बताई गई हैं।
रिपोर्टों में कुल 14 आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। इनमें कुछ दस्तावेजों की अस्पष्ट प्रतियां, प्रतिवादी के नाम से जुड़ी गलती, संबंधित पुराने न्यायिक फैसले की प्रति का अभाव और पृष्ठों के क्रम में गड़बड़ी जैसी समस्याएं शामिल हैं। कुछ क्षेत्रीय भाषा के दस्तावेजों के अनुवाद तथा जरूरी दस्तावेजों की प्रतियों को लेकर भी सवाल उठे।
दस्तावेजों में कमियों पर संजय राउत का जवाब
याचिकाओं में खामियों की खबर सामने आने के बाद विपक्ष को आलोचना का सामना करना पड़ा। सवाल उठे कि अनुभवी वकीलों और कानूनी सलाहकारों की मौजूदगी के बावजूद दस्तावेज दाखिल करते समय ऐसी चूक कैसे हुई।
इस पर संजय राउत ने कहा कि गलतियां संभव हैं और उन्हें दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष के रुख को दोहराते हुए कहा कि चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदाता सूची से संबंधित शिकायतें उनके लिए अहम मुद्दे हैं।
SIR और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष की मांग
विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष इस प्रक्रिया की समीक्षा और कथित तौर पर हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग कर रहा है।
हालांकि, मतदाता सूची से जुड़े आरोपों और याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की कार्यवाही और संबंधित तथ्यों के आधार पर तय होगी। फिलहाल, याचिकाओं में बताई गई तकनीकी कमियों के बीच विपक्ष के सामने दस्तावेजों को दुरुस्त करने और अपनी कानूनी दलीलों को मजबूती से रखने की चुनौती है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

