प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963
शारदीय नवरात्र के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आराधना का विशेष महत्व है। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों का संयोग बन रहा है। पंचांग गणना के अनुसार सुबह लगभग 10:52 बजे तक आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि आरंभ होगी। इस कारण 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी, दोनों से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहेगा।
मां सिद्धिदात्री को सिद्धियों, ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और पूर्णता की देवी माना जाता है। मान्यता है कि उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करने से साधक को आत्मविश्वास, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। नवरात्र के इस पावन अवसर पर भक्त मां दुर्गा की आराधना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और कन्या पूजन करते हैं। कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर भोजन कराना, उपहार देना और उनका आशीर्वाद लेना इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।
मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान और चार भुजाओं वाली देवी के रूप में पूजित हैं। उनके हाथों में कमल, शंख, चक्र और गदा जैसे दिव्य आयुधों का वर्णन मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी उपासना से साधक में ज्ञान, धैर्य, विनम्रता और आत्मिक संतुलन का विकास होता है।
नवमी के दिन भक्त विशेष पूजा-अर्चना के साथ नवरात्र साधना का समापन करते हैं। कई परिवारों में अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन और हवन किया जाता है। पूजा की तिथि और समय स्थानीय पंचांग तथा परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित करना उचित रहता है।
आज के रंग का महत्व
नवरात्र के नौवें दिन के लिए कई प्रचलित रंग-सूचियों में मोरपंखी हरा रंग बताया जाता है। हरा रंग प्रकृति, संतुलन, नई ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पूजा या दिनचर्या में इस रंग को शामिल करना श्रद्धा और उत्सव की भावना से जुड़ा है। हालांकि, नवरात्र के दिन के अनुसार रंगों की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और सूचियों में भिन्न हो सकती है।
आज का पंचांग 19 अक्टूबर 2026
दिन: सोमवार
मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: अष्टमी सुबह लगभग 10:52 बजे तक, इसके बाद नवमी
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा लगभग दोपहर 3:39 बजे तक, इसके बाद श्रवण
योग: धृति
करण: बव सुबह लगभग 10:52 बजे तक, इसके बाद बालव
विक्रम संवत: 2083
ऋतु: शरद
चंद्र राशि: मकर
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
सूर्योदय: सुबह लगभग 6:24 बजे
सूर्यास्त: शाम लगभग 5:47 बजे
चंद्रोदय: दोपहर लगभग 1:45 बजे
चंद्रास्त: अगले दिन मध्यरात्रि के बाद लगभग 12:30 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 4:44 से 5:34 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
महानवमी के अवसर पर पूजा, हवन और कन्या पूजन के लिए स्थानीय परंपरा के अनुसार समय तय करें। कुछ पंचांगों में 19 अक्टूबर को नवमी तिथि के दौरान अभिजित मुहूर्त को कन्या पूजन के लिए उपयुक्त बताया गया है।
आज का राहुकाल और अन्य अशुभ समय
राहुकाल: सुबह लगभग 7:49 से 9:15 बजे तक
यमगण्ड: सुबह लगभग 10:40 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर लगभग 1:31 से 2:56 बजे तक
परंपरागत ज्योतिष में राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। नियमित पूजा, मंत्र-जाप और धार्मिक साधना अपनी श्रद्धा के अनुसार की जा सकती है।
आज का आध्यात्मिक संदेश
नवरात्र का अंतिम चरण आत्मचिंतन, साधना और सकारात्मक संकल्प का अवसर है। मां सिद्धिदात्री की आराधना हमें यह संदेश देती है कि ज्ञान के साथ विनम्रता, शक्ति के साथ करुणा और सफलता के साथ सेवा-भाव भी आवश्यक हैं। कन्या पूजन के माध्यम से बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा और शिक्षा के प्रति संकल्प लेना भी इस पर्व की भावना को सार्थक बना सकता है।
डिस्क्लेमर: पंचांग में दिए गए समय नई दिल्ली की गणना पर आधारित अनुमानित समय हैं। स्थान के अनुसार सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि और मुहूर्त में अंतर हो सकता है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग और परंपरा को प्राथमिकता दें। ज्योतिषीय मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।
पंचांग के समय और नवमी की तिथि का मिलान उपलब्ध पंचांग स्रोतों से किया गया है। अष्टमी सुबह लगभग 10:52 बजे तक और उसके बाद नवमी है; 19 अक्टूबर को नवमी की पूजा के साथ मां सिद्धिदात्री की आराधना का उल्लेख उचित है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

