प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को देशभर में दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई, अन्याय पर न्याय और अहंकार पर मर्यादा की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। इसी अवसर पर मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की स्मृति भी मनाई जाती है।
इस वर्ष 20 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि दोपहर लगभग 12:50 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि आरंभ होगी। विजयादशमी के प्रमुख अनुष्ठानों के लिए दोपहर का समय विशेष महत्व रखता है। नई शुरुआत, शस्त्र पूजन, शमी पूजन और रावण दहन जैसी परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी रीति के अनुसार निभाई जाती हैं।
विजयादशमी का धार्मिक महत्व
विजयादशमी का संदेश केवल एक धार्मिक कथा तक सीमित नहीं है। यह दिन व्यक्ति को अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मकता पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्य, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।
परंपरागत रूप से इस दिन भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और अपने आराध्य देव की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर शस्त्र पूजन, वाहन पूजन, शमी वृक्ष की पूजा और रावण दहन आयोजित किया जाता है। व्यापारी वर्ग नए कार्यों की शुरुआत और अपने प्रतिष्ठान में पूजा-अर्चना को शुभ मानता है।
दशहरा और विजय मुहूर्त का महत्व
विजयादशमी पर विजय मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जाता है। नई योजनाओं की शुरुआत, शस्त्र पूजन और अन्य शुभ कार्यों के लिए इस समय का उपयोग करने की परंपरा है।
विजय मुहूर्त: दोपहर लगभग 1:59 बजे से 2:45 बजे तक।
यह समय नई दिल्ली की पंचांग गणना पर आधारित है। अन्य शहरों में मुहूर्त में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
आज के रंग का महत्व
दशहरा के लिए पूरे देश में कोई एक अनिवार्य रंग निर्धारित नहीं है। इस दिन कई लोग लाल, पीले या केसरिया रंग को शुभ मानकर वस्त्र धारण करते हैं। लाल रंग शक्ति और साहस, पीला रंग ज्ञान और मंगलभाव तथा केसरिया रंग त्याग और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। रंग का चयन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
आज का पंचांग 20 अक्टूबर 2026
दिन: मंगलवार
मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: नवमी दोपहर लगभग 12:50 बजे तक, इसके बाद दशमी
नक्षत्र: श्रवण शाम लगभग 6:02 बजे तक, इसके बाद धनिष्ठा
योग: शूल
करण: कौलव दोपहर लगभग 12:50 बजे तक, इसके बाद तैतिल
विक्रम संवत: 2083
ऋतु: शरद
चंद्र राशि: मकर
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
सूर्योदय: सुबह लगभग 6:24 बजे
सूर्यास्त: शाम लगभग 5:46 बजे
चंद्रोदय: दोपहर लगभग 2:17 बजे
चंद्रास्त: अगले दिन मध्यरात्रि के बाद लगभग 12:29 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 4:44 से 5:34 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
विजयादशमी पर शमी पूजन, शस्त्र पूजन और अन्य पारंपरिक अनुष्ठानों के लिए स्थानीय रीति और पंचांग के अनुसार समय निर्धारित करें।
आज का राहुकाल और अन्य अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर लगभग 2:56 से शाम 4:21 बजे तक
यमगण्ड: सुबह लगभग 9:15 से 10:41 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर लगभग 12:06 से 1:31 बजे तक
परंपरागत ज्योतिष में राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। इन समयों को लेकर मान्यताएं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं।
आज का आध्यात्मिक संदेश
विजयादशमी हमें याद दिलाती है कि सच्ची विजय केवल किसी दूसरे पर जीत हासिल करना नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों पर नियंत्रण पाना भी है। सत्य, करुणा, अनुशासन और न्याय के रास्ते पर चलकर ही जीवन में स्थायी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
इस दशहरे पर संकल्प लें कि हम अहंकार के स्थान पर विनम्रता, क्रोध के स्थान पर धैर्य और भेदभाव के स्थान पर सद्भाव को अपनाएंगे। यही विजयादशमी के पर्व की वास्तविक भावना है।
डिस्क्लेमर: पंचांग में दिए गए समय नई दिल्ली की गणना पर आधारित अनुमानित समय हैं। स्थान के अनुसार सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि और मुहूर्त में अंतर हो सकता है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग और परंपरा को प्राथमिकता दें। ज्योतिषीय मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

