शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को पापांकुशा एकादशी व्रत के पारण का दिन है। आश्विन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि में श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार एकादशी व्रत का पारण करेंगे। धार्मिक मान्यताओं में एकादशी व्रत के बाद उचित समय पर पारण करने को महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ मां लक्ष्मी की आराधना भी की जा सकती है।
शुक्रवार का दिन परंपरागत रूप से मां लक्ष्मी की पूजा और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है। ऐसे में श्रद्धालु पूजा-पाठ, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता के माध्यम से दिन को आध्यात्मिक रूप से सार्थक बना सकते हैं। व्रत का पारण करते समय द्वादशी तिथि, हरि वासर की समाप्ति और स्थानीय सूर्योदय के आधार पर निर्धारित समय का ध्यान रखना जरूरी है।
पापांकुशा एकादशी के पारण का महत्व
पापांकुशा एकादशी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास, मंत्र-जप और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत के बाद द्वादशी तिथि में पारण किया जाता है।
पारण का अर्थ है व्रत को विधिपूर्वक समाप्त करना। इसके लिए अपने क्षेत्र के पंचांग में दिए गए समय का पालन करना चाहिए। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और तिथि के समय में अंतर होने के कारण पारण का समय भी बदल सकता है।
पारण करते समय ध्यान रखें
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अपने शहर के पंचांग में पारण का समय जांचें।
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व्रत खोलने से पहले भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा करें।
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अपनी परंपरा के अनुसार सात्विक भोजन से पारण करें।
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स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास से बचें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा का महत्व
शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन घर में स्वच्छता रखने, दीप जलाने, पुष्प अर्पित करने और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करने जैसे अनुष्ठान करते हैं।
पूजा के साथ जरूरतमंदों की सहायता, भोजन दान और अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखना भी दिन को सार्थक बनाने के तरीके हैं। पूजा-विधि परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
आज का पंचांग 23 अक्टूबर 2026
दिन: शुक्रवार
मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: द्वादशी, स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करें
नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपदा से उत्तराभाद्रपदा में परिवर्तन संभव, सटीक समय स्थानीय पंचांग से जांचें
योग: पंचांग गणना के अनुसार पुष्टि करें
करण: स्थानीय पंचांग के अनुसार
विक्रम संवत: 2083
ऋतु: शरद
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
जबलपुर के लिए अनुमानित समय:
सूर्योदय: सुबह लगभग 6:11 बजे
सूर्यास्त: शाम लगभग 5:38 बजे
चंद्रोदय और चंद्रास्त के समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें, क्योंकि ये समय स्थान और चंद्र स्थिति के अनुसार बदलते हैं।
आज के शुभ मुहूर्त
शुक्रवार को पूजा-पाठ, ध्यान और दान-पुण्य के लिए अपनी परंपरा के अनुसार समय चुना जा सकता है। अभिजित मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त और अन्य शुभ समयों की सटीक जानकारी के लिए जबलपुर के स्थानीय पंचांग को देखना उचित रहेगा।
पूजा के लिए सरल तरीका
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सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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पूजा स्थल की सफाई कर दीप प्रज्वलित करें।
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भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का स्मरण करें।
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अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र-जप या धार्मिक पाठ करें।
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जरूरतमंदों को भोजन या उपयोगी वस्तुओं का दान करें।
आज का राहुकाल और अन्य अशुभ समय
राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल के समय स्थान के अनुसार बदलते हैं। शुक्रवार के इन समयों की सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग की सहायता लें। परंपरागत ज्योतिष में इन अवधियों के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। यह धार्मिक मान्यता है।
आज का आध्यात्मिक संदेश
एकादशी व्रत के पारण का दिन संयम, कृतज्ञता और सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का अवसर है। मां लक्ष्मी की पूजा हमें केवल धन-संपत्ति ही नहीं, बल्कि घर में सद्भाव, संतोष और जिम्मेदारी के महत्व की भी याद दिलाती है।
इस दिन संकल्प लें कि अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करेंगे, परिवार के साथ सद्भाव बनाए रखेंगे और अपने काम ईमानदारी से करेंगे। धार्मिक परंपराओं का वास्तविक संदेश जीवन में अच्छे आचरण और सेवा की भावना को अपनाना है।
डिस्क्लेमर: पंचांग के तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्त के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। व्रत के पारण और पूजा के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग तथा पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

