25 अक्टूबर 2026, रविवार:हिंदू पंचांग के अनुसार आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है. सुबह चतुर्दशी तिथि रहेगी, जो लगभग 11:56 बजे तक है. इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी. रविवार का दिन सूर्यदेव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है. वहीं, पूर्णिमा तिथि शुरू होने के कारण शाम और रात्रि में चंद्रमा की पूजा तथा शरद पूर्णिमा से जुड़ी परंपराओं का भी धार्मिक महत्व रहेगा. पंचांग के समय नई दिल्ली के अनुसार दिए गए हैं.
आज का पंचांग: 25 अक्टूबर 2026
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दिन: रविवार
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विक्रम संवत: 2083
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शक संवत: 1948
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मास: आश्विन
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पक्ष: शुक्ल पक्ष
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तिथि: चतुर्दशी सुबह लगभग 11:56 बजे तक, इसके बाद पूर्णिमा
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नक्षत्र: रेवती शाम लगभग 7:22 बजे तक, फिर अश्विनी
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योग: हर्षण शाम लगभग 5:22 बजे तक, इसके बाद वज्र
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करण: वणिज सुबह लगभग 11:56 बजे तक, इसके बाद विष्टि (भद्रा)
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सूर्योदय: सुबह 6:28 बजे
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सूर्यास्त: शाम 5:42 बजे
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चंद्रोदय: शाम लगभग 5 बजे
रविवार को सूर्यदेव की पूजा का महत्व
रविवार को सूर्यदेव की उपासना करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करना, मंत्र जाप करना और दिन की शुरुआत सकारात्मक संकल्प के साथ करना शुभ माना जाता है.
सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय तांबे के पात्र में स्वच्छ जल लेकर उसमें लाल फूल या अक्षत डाल सकते हैं. अर्घ्य देते समय सूर्यदेव का ध्यान करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें. पूजा के साथ नियमितता, अनुशासन और अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी रखने का संकल्प भी लें.
आज के शुभ मुहूर्त
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:46 से 5:37 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
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विजय मुहूर्त: लगभग दोपहर 1:57 से 2:42 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: लगभग शाम 5:42 से 6:07 बजे तक
शुभ मुहूर्त का उपयोग परंपरागत रूप से पूजा-पाठ, ध्यान और शुभ कार्यों के लिए किया जाता है. किसी बड़े संस्कार या महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित परंपरा के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा.
आज का राहुकाल और अशुभ समय
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राहुकाल: शाम 4:18 से 5:42 बजे तक
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यमगंड: दोपहर 12:05 से 1:29 बजे तक
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गुलिक काल: दोपहर 2:54 से शाम 4:18 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं में राहुकाल के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है. हालांकि, यह परंपरागत ज्योतिषीय मान्यता है; इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नियम नहीं माना जाना चाहिए.
रविवार का दिन कैसे बनाएं बेहतर?
आज सुबह समय निकालकर सूर्यदेव को जल अर्पित करें. घर में साफ-सफाई रखें, जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें और परिवार के साथ समय बिताएं. दिनभर अपने काम व्यवस्थित तरीके से करें और क्रोध या जल्दबाजी से बचने का प्रयास करें.
पूर्णिमा तिथि शुरू होने के बाद चंद्रमा की पूजा और ध्यान करना भी कई परिवारों की धार्मिक परंपरा का हिस्सा है. शरद पूर्णिमा से जुड़ी पूजा और व्रत के लिए अपने क्षेत्र की परंपरा के अनुसार समय का पालन करें.
आज का आध्यात्मिक संदेश
“अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच से जीवन में नई दिशा मिलती है.”
रविवार का दिन आत्मचिंतन करने, अपनी जिम्मेदारियों को समझने और नए सप्ताह की तैयारी करने का अवसर भी है. दूसरों के प्रति सम्मान रखें और अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखें.
नोट: पंचांग में दिए गए समय नई दिल्ली के स्थानीय गणना-आधारित समय हैं. दूसरे शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्त में अंतर हो सकता है. अलग-अलग पंचांगों और धार्मिक परंपराओं में कुछ समय भिन्न मिल सकते हैं.