वडोदरा में 130 साल पुराने इमली के पेड़ ने रोकी सड़क की चौड़ाई, नया पुल बनने के बाद हादसों का खतरा बढ़ा

वडोदरा में 130 साल पुराने इमली के पेड़ ने रोकी सड़क की चौड़ाई, नया पुल बनने के बाद हादसों का खतरा बढ़ा

प्रेषित समय :22:00:58 PM / Fri, Oct 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

वडोदरा. विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. गुजरात के वडोदरा में कामतीबाग के पास विश्वामित्री नदी पर पुराने पुल के बगल में नया पुल बनाया गया है. इस पुल का निर्माण क्षेत्र में बढ़ते यातायात और पुराने पुल पर लगने वाले जाम की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से किया गया. हालांकि, पुल के पास मौजूद करीब 130 साल पुराने इमली के पेड़ को बचाने के फैसले के बाद अब सड़क की चौड़ाई और वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. पर्यावरण प्रेमियों के विरोध और मांग के बाद नगर निगम ने पेड़ को काटने के बजाय उसके आसपास से सड़क निकालने का रास्ता चुना. इससे एक ऐतिहासिक पेड़ तो बच गया, लेकिन सड़क का एक हिस्सा संकरा हो गया है. अब निगम के सामने पेड़ की सुरक्षा के साथ-साथ यातायात को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने की चुनौती है.

पुराने पुल पर बढ़ते यातायात के कारण बनाया गया नया पुल

वडोदरा में कामतीबाग काशीबा चिल्ड्रेन हॉस्पिटल से कल्याणनगर की ओर जाने वाली सड़क पर बाल भवन सोसाइटी के निकट विश्वामित्री नदी पर पुराना पुल स्थित है. समय के साथ इस मार्ग पर वाहनों की संख्या बढ़ने लगी, जिससे पुराने पुल पर यातायात का दबाव बढ़ गया. इसके चलते वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी होने लगी और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने लगी.

इस समस्या के समाधान के लिए नगर निगम ने पुराने पुल के बगल में नया पुल बनाने का निर्णय लिया. पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. उम्मीद थी कि नया पुल बनने से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही आसान होगी और पुराने पुल पर यातायात का दबाव कम होगा. लेकिन पुल के पास मौजूद दशकों पुराने इमली के पेड़ को बचाने के फैसले के बाद सड़क की चौड़ाई का मुद्दा सामने आ गया है.

130 साल पुराने पेड़ को काटने की आशंका से शुरू हुआ विवाद

नए पुल का निर्माण लगभग पूरा होने के दौरान उसके पास मौजूद इमली के पेड़ को काटे जाने की संभावना को लेकर विवाद शुरू हुआ. पर्यावरण प्रेमियों को आशंका थी कि विकास कार्य के चलते इस पुराने पेड़ को नुकसान पहुंचाया जा सकता है या इसे पूरी तरह काट दिया जाएगा.

इसके विरोध में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप करने और पेड़ को बचाने की मांग की. उनका कहना था कि विकास कार्य के लिए इतने पुराने पेड़ को काटना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से इसे सुरक्षित रखा जा सकता है.

पर्यावरण प्रेमियों के अनुसार, यह पेड़ पुल से लगभग आठ मीटर की दूरी पर स्थित है. उनका दावा था कि पेड़ सड़क निर्माण या यातायात की आवाजाही में ऐसी बाधा नहीं बन रहा था, जिसके कारण इसे काटना अनिवार्य हो.

370 सेंटीमीटर बताया गया पेड़ के तने का व्यास

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इमली के पेड़ की उम्र लगभग 130 वर्ष और उसके तने का व्यास करीब 370 सेंटीमीटर बताया. इतने पुराने पेड़ को स्थानीय पर्यावरण और प्राकृतिक विरासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की कि पेड़ को केवल एक सामान्य वृक्ष के रूप में देखने के बजाय उसकी ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्ता को भी ध्यान में रखा जाए. उन्होंने इसे हेरिटेज यानी विरासत वृक्ष घोषित करने और इसके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की.

उनका तर्क था कि शहरी विकास के दौरान सड़क, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण जरूरी है, लेकिन इसके लिए पुराने पेड़ों को काटना ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए. योजना बनाते समय पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

पेड़ बचाने के लिए उसके आसपास से निकाली गई सड़क

पर्यावरण प्रेमियों की मांग और विरोध के बाद नगर निगम ने पेड़ को काटने के बजाय उसे सुरक्षित रखने का रास्ता अपनाया. इसके लिए सड़क को पेड़ के आसपास से निकालने की व्यवस्था की गई. इस फैसले से करीब 130 साल पुराने इमली के पेड़ को बचाने में सफलता मिली.

हालांकि, पेड़ को यथावत रखने के कारण सड़क के एक हिस्से की चौड़ाई कम हो गई है. इससे अब वाहन चालकों के सामने आवागमन से जुड़ी नई चुनौती खड़ी हो गई है. विशेष रूप से जब एक ही स्थान से अलग-अलग आकार के वाहन गुजरते हैं, तब सड़क की वास्तविक चौड़ाई और वाहनों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है.

इस स्थिति में यह देखना जरूरी होगा कि सड़क से गुजरने वाले वाहनों को पर्याप्त जगह मिल रही है या नहीं और क्या मौजूदा व्यवस्था यातायात के बढ़ते दबाव को संभालने में सक्षम है.

वाहन चालकों को हादसों का डर, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

सड़क का हिस्सा संकरा होने से वाहन चालकों में दुर्घटनाओं की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है. हालांकि, इस स्थान पर दुर्घटनाओं की संख्या या किसी हादसे की पुष्टि संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन सड़क की कम चौड़ाई को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था का आकलन जरूरी हो गया है.

नगर निगम के सामने अब यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि पेड़ के आसपास से गुजरने वाले वाहनों को पर्याप्त जगह मिले. इसके लिए सड़क की वास्तविक चौड़ाई, यातायात का दबाव, वाहनों की आवाजाही की दिशा और मौके पर उपलब्ध सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण महत्वपूर्ण होगा.

यदि जरूरत महसूस होती है, तो संबंधित विभाग को यातायात प्रबंधन में बदलाव, उचित संकेतक लगाने और वाहन चालकों को पहले से सतर्क करने जैसे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है. हालांकि, ऐसे किसी उपाय को लागू करने से पहले स्थल की वास्तविक स्थिति का तकनीकी आकलन जरूरी होगा.

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की परीक्षा

वडोदरा का यह मामला शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की जरूरत को सामने लाता है. एक ओर बढ़ते यातायात को देखते हुए नए पुल और बेहतर सड़कों का निर्माण जरूरी है, तो दूसरी ओर पुराने पेड़ों को बचाना भी पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है.

नगर निगम के फैसले से एक पुराने पेड़ को कटने से बचाया गया है, लेकिन अब यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि इससे नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित न हो. पर्यावरण संरक्षण और यातायात व्यवस्था को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा करने के बजाय ऐसा समाधान तलाशना होगा, जिससे दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा सके.

अब निगम के अगले कदम पर टिकी निगाहें

नए पुल के निर्माण के बाद इस मार्ग पर यातायात की वास्तविक स्थिति और संकरी सड़क से उत्पन्न होने वाली समस्याओं का आकलन अहम होगा. यह भी देखना होगा कि मौजूदा व्यवस्था लंबे समय तक सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित कर पाती है या इसमें किसी तकनीकी बदलाव की जरूरत पड़ती है.

फिलहाल, 130 साल पुराने इमली के पेड़ का बचना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. लेकिन इस फैसले की सफलता तभी पूरी मानी जाएगी, जब पेड़ की सुरक्षा के साथ वाहन चालकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके. अब वडोदरा नगर निगम के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है कि विकास कार्य, प्राकृतिक विरासत और नागरिकों की सुरक्षा के बीच व्यावहारिक संतुलन कैसे कायम किया जाए.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-