कार्तिक मास में 25 अक्टूबर से शुरू होगा दीपदान, कार्तिक पूर्णिमा तक रोज जलाएं दीपक, जानें 10 प्रमुख नियम

कार्तिक मास में 25 अक्टूबर से शुरू होगा दीपदान, कार्तिक पूर्णिमा तक रोज जलाएं दीपक, जानें 10 प्रमुख नियम

प्रेषित समय :18:31:38 PM / Sat, Oct 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

हिंदू धर्म में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, स्नान, दान और दीपदान के लिए विशेष महत्व वाला माना जाता है. इस महीने में दीपक जलाने की परंपरा घरों, मंदिरों और पवित्र स्थलों पर दिखाई देती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपदान को देवताओं के प्रति श्रद्धा अर्पित करने और जीवन में शुभता की कामना से जोड़कर देखा जाता है. दीपदान का अर्थ है दीपक प्रज्वलित करके देव अथवा देवस्वरूप को अर्पित करना. इस वर्ष दिए गए धार्मिक विवरण के अनुसार, दीपदान का क्रम 25 अक्टूबर 2026 से आरंभ होकर 24 नवंबर 2026, कार्तिक पूर्णिमा तक प्रतिदिन शाम को किया जाएगा. यदि आप भी इस अवधि में दीपदान करना चाहते हैं, तो पहले से मिट्टी के दीपक, तेल या घी और बाती की व्यवस्था कर सकते हैं. आइए जानते हैं दीपदान से जुड़ी परंपराएं और दस प्रमुख स्थान, जहां दीपक जलाने का विधान बताया गया है.

1. शिवलिंग के सामने दीपक जलाने की परंपरा

कार्तिक मास में प्रतिदिन मंदिर में शिवलिंग के सामने दीपक जलाने का सुझाव दिया गया है. यदि किसी कारणवश मंदिर जाना संभव न हो, तो घर में भगवान शिव के समक्ष दीपक प्रज्वलित किया जा सकता है. श्रद्धालु इस दौरान भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.

2. भगवान नारायण के समक्ष करें दीपदान

कार्तिक मास में भगवान विष्णु यानी नारायण की आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक परंपरा के अनुसार, प्रतिदिन मंदिर में भगवान नारायण के सामने दीपक जलाना चाहिए. मंदिर तक पहुंचना संभव न होने पर घर में भगवान के समक्ष दीपक जलाकर पूजा की जा सकती है.

3. तुलसी के पास प्रतिदिन जलाएं दीपक

तुलसी के पौधे को हिंदू परंपरा में पूजनीय माना गया है. कार्तिक मास में तुलसी के समीप दीपक जलाने की परंपरा है. दिए गए धार्मिक निर्देशों के अनुसार, यह दीपदान प्रतिदिन करना चाहिए, रविवार को भी. श्रद्धालु तुलसी के पास दीपक रखते समय आग से सुरक्षा का ध्यान रखें.

4. पीपल के वृक्ष के पास दीपदान

धार्मिक मान्यताओं में पीपल के वृक्ष का विशेष स्थान है. कार्तिक मास में प्रतिदिन पीपल के समीप दीपक जलाने का सुझाव दिया गया है. यदि दीपक बाहर जलाया जा रहा हो, तो उसे पेड़ की जड़ों, सूखी पत्तियों और आसपास की ज्वलनशील वस्तुओं से सुरक्षित दूरी पर रखें.

5. पितरों के निमित्त जलाएं दीपक

कार्तिक मास में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए भी दीपदान करने की परंपरा बताई गई है. धार्मिक आस्था के अनुसार, पितरों के निमित्त दीपक जलाकर उन्हें स्मरण किया जाता है. इस दौरान श्रद्धालु अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों को श्रद्धापूर्वक याद कर सकते हैं.

6. संभव हो तो वटवृक्ष के समीप करें दीपदान

वटवृक्ष को भारतीय धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण माना जाता है. दिए गए निर्देशों में कार्तिक मास के दौरान वटवृक्ष के पास प्रतिदिन दीपक जलाने का सुझाव भी शामिल है. यह व्यवस्था अपनी सुविधा और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार की जा सकती है.

7. आकाशदीप जलाने की भी है परंपरा

कार्तिक मास में आकाशदीप जलाने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, आकाशदीप श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है. यदि इसे जलाने की व्यवस्था करें, तो दीपक को सुरक्षित स्थान पर लगाएं और आग की आशंका से बचने के लिए उचित सावधानी बरतें.

8. नदी, सागर या पर्वतीय क्षेत्र में दीपदान

यदि घर के आसपास नदी, सागर या पर्वतीय क्षेत्र है, तो वहां दीपदान करने का सुझाव दिया गया है. ऐसे स्थानों पर दीपक जलाते समय पर्यावरण और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. जलाशयों में दीपक या अन्य सामग्री प्रवाहित करने के बजाय स्थानीय नियमों के अनुरूप सुरक्षित स्थान पर दीपदान करना बेहतर है.

9. गौशाला में जलाएं दीपक

कार्तिक मास में गौशाला में दीपक जलाने की परंपरा का भी उल्लेख किया गया है. यदि घर के पास गौशाला हो, तो वहां दीपदान किया जा सकता है. हालांकि, दीपक को पशुओं, सूखे चारे और अन्य ज्वलनशील सामग्री से दूर रखना चाहिए, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो.

10. आंवला वृक्ष के समीप दीपदान

आंवला वृक्ष का धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व माना जाता है. कार्तिक मास के दौरान इसके समीप प्रतिदिन दीपक जलाने का सुझाव दिया गया है. दीपदान करते समय वृक्ष को नुकसान न पहुंचे और आसपास आग फैलने का खतरा न हो, इसका ध्यान रखना चाहिए.

मिट्टी के दीपक इस्तेमाल करने से पहले रखें ध्यान

दीपदान के लिए प्रत्येक दिन मिट्टी के नए दीपक का उपयोग करने की सलाह दी गई है. उपयोग से पहले मिट्टी के दीपक को कम से कम दो घंटे पानी में भिगोने का सुझाव है. इसके विकल्प के रूप में पीतल के दीपक को अच्छी तरह धोकर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है.

दीपक जलाने के लिए स्थिर और सुरक्षित स्थान चुनें. उसे पर्दों, कपड़ों, सूखी पत्तियों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें. घर के बाहर या पेड़ों के समीप दीपदान करते समय भी आग से सुरक्षा के नियमों का पालन करें.

कार्तिक पूर्णिमा तक जारी रहेगा दीपदान

दिए गए धार्मिक विवरण के अनुसार, दीपदान की अवधि 25 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा तक चलेगी. इस दौरान श्रद्धालु अपनी सुविधा, आस्था और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार दीपदान कर सकते हैं. सभी स्थानों पर दीपक जलाना अनिवार्य मानने के बजाय अपनी परिस्थिति के अनुसार पूजा करना भी व्यावहारिक है.

कार्तिक मास में दीपदान की परंपरा श्रद्धा, संयम और भक्ति से जुड़ी है. दीपक की रोशनी धार्मिक वातावरण के साथ घर और आसपास के स्थानों को भी सुंदर बनाती है. दीपदान करते समय आस्था के साथ सुरक्षा और पर्यावरण का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-