मुंबई. बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस की जांच में एक नया पहलू सामने आया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वारदात के बाद फरार आरोपियों को उनके कथित मददगार मीडिया में प्रसारित खबरों और घटनाक्रम पर नजर रखते हुए लगातार अपडेट दे रहे थे. जांच एजेंसियों को संदेह है कि हमले से जुड़े आरोपियों को पुलिस की कार्रवाई, मोटरसाइकिल बरामद होने और उनकी यात्रा से संबंधित जानकारियां मिल रही थीं. इन सूचनाओं के आधार पर आरोपियों ने कथित तौर पर अपने सफर का तरीका बदला, ताकि गिरफ्तारी से बच सकें.
18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी हुई थी. रिपोर्ट के अनुसार, दो हमलावरों ने अभिनेता की कार पर कई राउंड गोलियां चलाई थीं. घटना में टाइगर श्रॉफ अपेक्षाकृत सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर और एक व्लॉगर को चोटें आईं. घटना के बाद पुलिस ने कई राज्यों में जांच शुरू की. इस मामले में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से दस लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है.
मीडिया में खबरें प्रसारित होते ही आरोपियों को मिल रहे थे संदेश
हिंदुस्तान टाइम्स की 24 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस बात की जांच कर रही है कि वारदात के बाद आरोपियों को उनके कथित हैंडलर्स किस तरह जानकारी दे रहे थे. पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि जैसे ही टेलीविजन चैनलों पर गोलीबारी से जुड़े दृश्य प्रसारित हुए, एक संदिग्ध को तत्काल वहां से निकलने का संदेश मिला.
रिपोर्ट में उद्धृत संदेश के अनुसार, आरोपी से कहा गया, “तुम्हारे चेहरे आ गए हैं, निकल जाओ वहां से.” इस कथित संदेश से जांचकर्ताओं को आशंका है कि हमले में शामिल लोगों को मीडिया कवरेज के जरिए अपनी पहचान उजागर होने की जानकारी मिल रही थी.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों को मोटरसाइकिल बरामद होने और उनकी आगे की यात्रा से संबंधित घटनाक्रम के बारे में भी जानकारी मिल रही थी. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये अपडेट किन लोगों ने भेजे और आरोपियों के साथ उनका संपर्क किस माध्यम से बना हुआ था.
मोटरसाइकिल से ट्रेन और कैब तक बदला सफर
पुलिस के अनुसार, फरार आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए यात्रा के दौरान परिवहन के कई साधन बदले. रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि आरोपी पहले मोटरसाइकिल से निकले, फिर ट्रेन से यात्रा की और इसके बाद कैब का इस्तेमाल किया. आगे सूरत से बस में सवार होने की योजना भी बनाई गई थी.
हालांकि, सूरत बस टर्मिनल पर देरी होने के कारण उन्हें दूसरी ट्रेन से यात्रा करनी पड़ी. इसी दौरान मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस को सूचना दी. इसके बाद कोटा पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया.
जांच एजेंसियों को संदेह है कि मीडिया में सामने आ रही खबरों के आधार पर आरोपियों को अपनी स्थिति और पुलिस की कार्रवाई का अंदाजा मिल रहा था. इसी वजह से उन्होंने बार-बार यात्रा का तरीका बदला. पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान किसने किसे जानकारी दी थी.
कोटा में पकड़े गए तीन प्रमुख आरोपी
रिपोर्ट के मुताबिक, कोटा पुलिस ने 19 अक्टूबर को राजस्थान में तीन प्रमुख आरोपियों को पकड़ा था. उनकी पहचान फूल सिंह (18), रेहान रहीसुद्दीन अंसारी (18) और रितिक महतो (22) के रूप में बताई गई है. रिपोर्ट प्रकाशित होने के समय तीनों 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में थे.
पुलिस इस मामले में कथित हमलावरों के अलावा उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्होंने उन्हें कथित तौर पर लॉजिस्टिक सहायता या फरारी के दौरान जानकारी उपलब्ध कराई. इस मामले में कई राज्यों तक फैली जांच के चलते अलग-अलग स्थानों पर गिरफ्तारियां की गई हैं.
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में गिरफ्तार किए गए सभी दस लोगों की भूमिका का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है. इसलिए प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका और उसके खिलाफ मौजूद साक्ष्यों के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
Signal और Zangi जैसे ऐप भी जांच के दायरे में
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं को संकेत मिले हैं कि रेहान इंटरनेट आधारित वॉयस और मैसेजिंग सेवाओं के जरिए अन्य लोगों के संपर्क में था. इसी कारण Signal और Zangi जैसे ऐप के इस्तेमाल की पड़ताल की जा रही है.
पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने कथित योजना बनाने, आपस में संपर्क बनाए रखने या गिरफ्तारी से बचने के लिए किन डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया. इंटरनेट आधारित संचार सेवाओं के जरिए किए गए संपर्कों की जांच से मामले में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है.
हालांकि, रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं की गई है कि हमले की योजना बनाने के लिए निश्चित रूप से किसी एक विशेष ऐप का ही इस्तेमाल हुआ था. फिलहाल इन ऐप के संभावित इस्तेमाल को जांच के एक पहलू के रूप में देखा जा रहा है.
अनिल पंडित को बताया गया वांछित आरोपी
इस मामले में मुंबई पुलिस ने गैंगस्टर अनिल पंडित को वांछित आरोपी बताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पंडित को लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का कथित सहयोगी माना जा रहा है और उसके अमेरिका में होने की आशंका जताई गई है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 18 अक्टूबर की गोलीबारी के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था. पुलिस इस दावे और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
हालांकि, किसी सोशल मीडिया पोस्ट में जिम्मेदारी लेने का दावा अपने आप में अपराध में संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं होता. जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्यों, संपर्कों और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की पुष्टि करनी होगी.
जांच का केंद्र अब डिजिटल संपर्क और फरारी की कड़ियां
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में अब जांच केवल गोलीबारी की घटना तक सीमित नहीं है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों को कथित तौर पर किसने निर्देश दिए, मीडिया कवरेज से उन्हें जानकारी कैसे मिली और फरारी के दौरान उन्हें किस तरह मदद मिली.
इसके साथ ही डिजिटल संचार, परिवहन के साधनों में बार-बार बदलाव और विभिन्न राज्यों में आरोपियों की गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है. जांच एजेंसियां इन कड़ियों को जोड़कर कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट करना चाहती हैं.
फिलहाल इस मामले में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पुलिस की जांच को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. आगे की कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि गोलीबारी की योजना किसने बनाई, कथित तौर पर किसने सहायता की और फरारी के दौरान सूचना उपलब्ध कराने वालों की भूमिका क्या थी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

