सऊदी अरब हूती विद्रोहियों को 1 अरब डॉलर देगा, ईरान की मध्यस्थता में युद्धविराम की कोशिश

सऊदी अरब हूती विद्रोहियों को 1 अरब डॉलर देगा, ईरान की मध्यस्थता में युद्धविराम की कोशिश

प्रेषित समय :13:12:53 PM / Tue, Oct 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रियाद. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच युद्धविराम कराने की कोशिशें तेज होने की खबरें सामने आई हैं. इजरायली मीडिया की एक रिपोर्ट में खाड़ी क्षेत्र के राजनयिक सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने हूती समूह को 1 अरब डॉलर देने की पेशकश की है. बताया जा रहा है कि ईरान की मध्यस्थता में इस प्रस्ताव पर विचार किया गया, ताकि हूती विद्रोहियों के हमले रुक सकें और क्षेत्र में तनाव कम किया जा सके. हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इस रकम के हस्तांतरण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान संभावित युद्धविराम पर बातचीत के लिए एक प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे थे. दावा किया गया कि हूती विद्रोहियों को आर्थिक सहायता देने की योजना ईरान के माध्यम से तैयार की गई है. कुछ राजनयिक सूत्रों ने यहां तक दावा किया कि सऊदी मंत्री अपने साथ हरक्यूलिस सैन्य परिवहन विमान में यह धनराशि लेकर पहुंचे थे. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सऊदी अधिकारियों ने रकम सीधे भेजे जाने की बात स्वीकार नहीं की है.

इस कथित कूटनीतिक पहल के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और तनाव कम करने के मुद्दे पर कई देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी की खबरें हैं. रिपोर्टों में तुर्किए के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर का नाम भी शामिल है. इनके अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े अधिकारियों की मौजूदगी का दावा किया गया है.

सऊदी रक्षा मंत्री और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी इस पहल का हिस्सा बताया गया है. सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, तेहरान दौरे का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना, बातचीत को बढ़ावा देना और कतर तथा पाकिस्तान की मध्यस्थता कोशिशों को समर्थन देना है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच विवाद की एक प्रमुख वजह पहले हुए समझौते की शर्तें हैं. इस व्यवस्था के तहत सऊदी अरब को हूती नियंत्रण वाले इलाकों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और नागरिक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता देनी थी. इसके बदले हूती विद्रोहियों से हमले पूरी तरह बंद करने की अपेक्षा थी.

हूती विद्रोहियों का आरोप है कि रियाद ने समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं. दूसरी ओर, सऊदी अरब का रुख बताया जा रहा है कि वह सैन्य दबाव या धमकियों के आगे झुककर आर्थिक सहायता देने को तैयार नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद चाहता है कि हूती विद्रोही पहले यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार से छीने गए महत्वपूर्ण क्षेत्रों को वापस सौंपें.

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संभावित समझौते की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब क्षेत्रीय हमलों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं. रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों से उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमलों और तेल परिवहन में बाधाओं ने खाड़ी क्षेत्र की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है.

ऐसे हालात में ईरान की ओर से सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच मध्यस्थता की पेशकश को क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, किसी भी संभावित समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष हमले रोकने, आर्थिक सहायता और क्षेत्रीय नियंत्रण से जुड़े विवादों पर किस हद तक सहमत होते हैं.

यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में सामने आई है, जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. ईरान क्षेत्रीय देशों की भागीदारी वाले सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संभावित युद्धविराम न केवल यमन के संघर्ष को प्रभावित कर सकता है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी इसका असर पड़ सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-