छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: स्कूल निर्माण में इस्तेमाल निजी जमीन के बदले 90 दिन में देनी होगी वैकल्पिक भूमि

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: स्कूल निर्माण में इस्तेमाल निजी जमीन के बदले 90 दिन में देनी होगी वैकल्पिक भूमि

प्रेषित समय :15:38:41 PM / Fri, Oct 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूल के निर्माण में निजी जमीन का इस्तेमाल किए जाने के मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने राज्य शासन के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को उसकी जमीन के बदले 0.15 एकड़ के बराबर उपयुक्त वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी की जाए. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के परिजन की कथित सहमति के आधार पर उसकी निजी संपत्ति का उपयोग कानूनी रूप से उचित नहीं ठहराया जा सकता.

निजी जमीन पर बना दिया स्कूल का जरूरी हिस्सा

यह मामला बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील निवासी आशीष अवस्थी से जुड़ा है. याचिकाकर्ता के नाम खसरा नंबर 66/14 की 85 डिसमिल जमीन दर्ज है. सरकारी बालक प्राथमिक शाला से लगी इस निजी जमीन के लगभग 0.15 एकड़ हिस्से का उपयोग स्कूल के शेड, रसोईघर और शौचालय के निर्माण में किया गया था.

आशीष अवस्थी ने अपनी जमीन वापस दिलाने के लिए तहसीलदार के समक्ष आवेदन दिया था. 29 दिसंबर 2022 को तहसीलदार ने कब्जा लौटाने का आदेश भी जारी किया. हालांकि, विद्यार्थियों की सुविधा को देखते हुए याचिकाकर्ता ने जमीन के बदले समान मूल्य की दूसरी सरकारी जमीन देने की मांग की.

अधिकारियों ने पिता की सहमति का दिया था हवाला

वैकल्पिक जमीन की मांग को अतिरिक्त कलेक्टर ने 27 नवंबर 2024 को खारिज कर दिया था. आदेश में तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता के पिता दुर्गा सहाय अवस्थी वर्ष 2005 से 2010 तक गांव के सरपंच थे और उस दौरान स्कूल निर्माण पर उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई थी.

इस फैसले को चुनौती देते हुए आशीष अवस्थी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

हाई कोर्ट ने कहा- कानूनी अधिकार के बिना नहीं छीनी जा सकती संपत्ति

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने कहा कि केवल कथित सहमति या आपत्ति नहीं जताने को जमीन स्वेच्छा से देने का वैधानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विद्या देवी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले का भी उल्लेख किया.

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता.

90 दिनों के भीतर करना होगा वैकल्पिक जमीन का इंतजाम

अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता की सहमति लेकर आदेश की प्रति प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर 0.15 एकड़ के बराबर उपयुक्त वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक आदेश पारित किए जाएं. इस निर्देश के साथ हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-