अहमदाबाद. गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री और भंडारण पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है. राज्य सरकार के इस फैसले को सात रेस्टोरेंट संचालकों ने गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी है. उनका कहना है कि लंबे समय से वैध लाइसेंस के साथ कारोबार कर रहे प्रतिष्ठानों पर इस तरह की रोक लगाना उनके व्यापार और आजीविका के अधिकार को प्रभावित करता है.
मंदिर के 500 मीटर दायरे में लगाया गया था प्रतिबंध
गुजरात सरकार ने अगस्त 2026 में अधिसूचना जारी कर सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे और मंदिर तक पहुंचने वाले छह प्रमुख मार्गों पर मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री, भंडारण और तैयारी पर रोक लगाई थी.
इस फैसले के खिलाफ सात भोजनालय संचालक अदालत पहुंचे. उनका तर्क है कि उनके प्रतिष्ठान पिछले 20 से 25 वर्षों से संचालित हो रहे हैं और उनके पास कारोबार के लिए जरूरी लाइसेंस भी मौजूद हैं.
व्यापार के मौलिक अधिकार का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को वैध व्यवसाय करने का अधिकार है. उनके मुताबिक, जिला प्रशासन ने गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 33(1)(w) का इस्तेमाल करते हुए अपनी कानूनी शक्तियों से आगे जाकर प्रतिबंध लगाया है.
रेस्टोरेंट संचालकों का यह भी आरोप है कि कुछ कारोबारियों पर नॉनवेज बेचना बंद करने के लिए दबाव बनाया गया और उनसे भविष्य में ऐसा कारोबार नहीं करने संबंधी लिखित सहमति ली गई.
गुजरात सरकार ने अदालत में रखा अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि सोमनाथ केवल एक व्यावसायिक क्षेत्र नहीं, बल्कि देश के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है. यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
सरकार ने बताया कि जनवरी से सितंबर 2026 के बीच सोमनाथ मंदिर में लगभग 1.16 करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. सरकार के अनुसार, प्रतिबंध का उद्देश्य धार्मिक स्थल और श्रद्धालुओं के आवागमन वाले मार्गों की गरिमा बनाए रखना है. सरकार ने यह भी कहा कि संबंधित रेस्टोरेंट शाकाहारी भोजन बेचकर अपना कारोबार जारी रख सकते हैं.
हाई कोर्ट ने 30 अक्टूबर के लिए फैसला रखा था सुरक्षित
मामले की सुनवाई जस्टिस निशा एम. ठाकोर की पीठ ने की. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 30 अक्टूबर 2026 के लिए अपना आदेश सुरक्षित रखा था.
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन को किसी वैध व्यवसाय पर इस तरह का प्रतिबंध लगाने का अधिकार है और धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से लगाए गए प्रतिबंध कानूनी कसौटी पर खरे उतरते हैं.
अदालत के अंतिम आदेश से ही स्पष्ट होगा कि सोमनाथ में मांसाहारी भोजन की बिक्री पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा या उसमें बदलाव होगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

