समुद्री ताकत बढ़ाएगी नौसेना, 40 हजार करोड़ से बनेंगे आठ कॉर्वेट, केंद्र सरकार ने मंजूरी दी

समुद्री ताकत बढ़ाएगी नौसेना, 40 हजार करोड़ से बनेंगे आठ कॉर्वेट, केंद्र सरकार ने मंजूरी दी

प्रेषित समय :11:32:30 AM / Sat, Oct 31st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ाने के लिए 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आठ नेक्स्ट-जेनरेशन कॉर्वेट बनाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई. इन युद्धपोतों का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में किया जाएगा.

यह हाल के वर्षों में मंजूर की गई बड़ी रक्षा परियोजनाओं में से एक है. सभी आठ युद्धपोतों का निर्माण देश में ही होगा, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन और जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा. दोनों शिपयार्ड के साथ निर्माण अनुबंध जल्द किए जाने की उम्मीद है.

छोटे आकार में बड़ी युद्ध क्षमता

कॉर्वेट आकार में फ्रिगेट और डिस्ट्रॉयर से छोटे, लेकिन तेज गति और आधुनिक हथियारों से लैस युद्धपोत होते हैं. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से तटीय सुरक्षा, निगरानी और समुद्री गश्त के लिए किया जाता है. भारतीय नौसेना के लिए प्रस्तावित कॉर्वेट का वजन करीब 2,000 टन और अधिकतम गति लगभग 30 नॉट्स होगी. इनका डिजाइन नौसेना ने स्वदेशी स्तर पर तैयार किया है. आधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस इन युद्धपोतों को मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जाएगा. ये दुश्मन के सतही जहाजों, पनडुब्बियों और हवाई खतरों से निपटने में सक्षम होंगे. अत्याधुनिक सेंसर, हथियार और बेहतर संचालन क्षमता से नौसेना की समुद्री युद्धक क्षमता मजबूत होगी.

70 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

परियोजना में 70 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा. इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के इस ऑर्डर को जीआरएसई और गोवा शिपयार्ड के बीच बांटा जाएगा. इससे दोनों शिपयार्ड को लंबे समय तक काम मिलेगा. साथ ही, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करने वाले एमएसएमई सहित विभिन्न क्षेत्रों में हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है. यह परियोजना भारत के सागर (SAGAR- Security and Growth for All in the Region) विजन को भी मजबूती देगी.

2030 तक नौसेना को मिलेगा पहला युद्धपोत

परियोजना की मंजूरी के करीब एक साल के भीतर पहले कॉर्वेट का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है. लक्ष्य है कि पहला युद्धपोत 2030 तक भारतीय नौसेना को सौंप दिया जाए. हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच नौसेना अपने बेड़े के आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है. आठ नए कॉर्वेट शामिल होने से समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा और बहुआयामी सैन्य अभियानों में नौसेना की क्षमता बढ़ेगी. यह परियोजना नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स, नेक्स्ट-जेनरेशन डिस्ट्रॉयर्स और फ्लीट सपोर्ट शिप्स सहित नौसेना के अन्य युद्धपोत निर्माण कार्यक्रमों को भी गति देगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-