4 नवंबर 2026, बुधवार: हिंदू पंचांग के अनुसार आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है. बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह की उपासना के लिए विशेष माना जाता है. आज पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, जो अगले दिन सुबह लगभग 3:30 बजे तक प्रभावी रहेगा. ब्रह्म योग सुबह लगभग 8:01 बजे तक रहेगा, इसके बाद इंद्र योग प्रारंभ होगा. आज दशमी तिथि सुबह 11:03 बजे तक रहेगी, इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी. हालांकि रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर, गुरुवार को रखा जाएगा. आइए जानते हैं नई दिल्ली के स्थानीय समय के अनुसार आज का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी.
आज का पंचांग 4 नवंबर 2026
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दिन: बुधवार
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विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)
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शक संवत: 1948 (पराभव)
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मास: कार्तिक (पूर्णिमांत), आश्विन (अमांत)
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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तिथि: दशमी सुबह 11:03 बजे तक, इसके बाद एकादशी
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नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी अगले दिन सुबह लगभग 3:30 बजे तक, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी
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योग: ब्रह्म योग सुबह 8:01 बजे तक, इसके बाद इंद्र योग
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करण: विष्टि (भद्रा) सुबह 11:03 बजे तक, इसके बाद बव करण रात 10:46 बजे तक, फिर बालव करण
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सूर्योदय: सुबह 6:35 बजे
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सूर्यास्त: शाम 5:34 बजे
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चंद्रोदय: अगले दिन सुबह लगभग 2:47 बजे
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चंद्रास्त: दोपहर लगभग 2:31 बजे
बुधवार को भगवान गणेश की पूजा का महत्व
बुधवार का दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं. उनकी पूजा से कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.
सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश का स्मरण करें. पूजा के दौरान उन्हें दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक या लड्डू अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद गणेश चालीसा या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना शुभ माना जाता है.
बुधवार को भगवान विष्णु की पूजा और बुध ग्रह से संबंधित मंत्रों का जाप करने की भी धार्मिक परंपरा है. विद्यार्थियों और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह दिन विशेष रूप से बुद्धि, एकाग्रता और विवेक की साधना का अवसर माना जाता है.
रमा एकादशी का व्रत कल
4 नवंबर को सुबह 11:03 बजे से कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी. कार्तिक मास की इस एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है. हालांकि उदया तिथि के अनुसार रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर, गुरुवार को रखा जाएगा.
रमा एकादशी भगवान विष्णु की उपासना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत से मन की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की जाती है.
आज के शुभ मुहूर्त
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 से 5:43 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: आज उपलब्ध नहीं
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विजय मुहूर्त: दोपहर 1:54 से 2:38 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:34 से 6:00 बजे तक
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अमृत काल: रात 9:05 से 10:41 बजे तक
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निशिता मुहूर्त: रात 11:39 से 12:31 बजे तक (5 नवंबर)
इन मुहूर्तों में पूजा-पाठ, ध्यान, मंत्र जाप और आध्यात्मिक कार्य किए जा सकते हैं. बुधवार को अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है, इसलिए किसी विशेष मांगलिक कार्य के लिए अलग से शुभ समय की गणना कराएं.
आज का राहुकाल और अशुभ समय
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राहुकाल: दोपहर 12:04 से 1:27 बजे तक
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यमगंड: सुबह 7:57 से 9:20 बजे तक
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गुलिक काल: सुबह 10:42 से दोपहर 12:04 बजे तक
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दुर्मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
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वर्ज्य काल: सुबह 11:27 बजे से दोपहर 1:04 बजे तक
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भद्रा: सुबह 6:35 से 11:03 बजे तक
परंपरागत ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है. आज राहुकाल दोपहर के समय रहेगा.
आज क्या करें?
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सुबह स्नान के बाद भगवान गणेश की पूजा करें.
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गणेशजी को दूर्वा और मोदक अर्पित करें.
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गणेश चालीसा या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें.
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भगवान विष्णु का स्मरण करें और एकादशी व्रत की तैयारी करें.
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जरूरतमंद लोगों को भोजन और उपयोगी वस्तुओं का दान करें.
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विद्यार्थियों को अध्ययन में एकाग्रता और नियमितता बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए.
आज का आध्यात्मिक संदेश
"बुद्धि, विवेक और धैर्य से लिया गया निर्णय जीवन की कठिनाइयों को आसान बना सकता है."
बुधवार का दिन ज्ञान, समझदारी और सकारात्मक सोच को विकसित करने का संदेश देता है. भगवान गणेश की आराधना के साथ अपने कार्यों में अनुशासन बनाए रखें. एकादशी तिथि के आगमन पर भगवान विष्णु का स्मरण करें और मन में सेवा, सद्भाव तथा संयम की भावना विकसित करें.
नोट: पंचांग में दिए गए सभी समय नई दिल्ली के स्थानीय समय (IST) के अनुसार हैं. दूसरे शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और शुभ-अशुभ मुहूर्त में अंतर हो सकता है. व्रत, पूजा और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

