अनिल मिश्र / पटना-रांची. बिहार और झारखंड में लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश ने जनजीवन के साथ खेती-किसानी की व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है. तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण खेतों में पककर तैयार धान की फसल जमीन पर बिछ गई है. कई स्थानों पर कटाई का काम रुक गया है, जबकि जिन किसानों ने फसल काटकर खेतों में रखी थी, उनकी उपज भीगने से खराब होने की आशंका बढ़ गई है. सब्जियों की खेती पर भी बारिश की मार पड़ी है. खेतों में पानी भरने से गोभी, मक्का, आलू और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है. किसानों का दावा है कि कुछ इलाकों में धान की आधे से अधिक फसल प्रभावित हुई है.
मौसम की मार केवल खेतों तक सीमित नहीं रही. झारखंड में तेज हवा और बारिश से कई मकानों तथा टीन शेड को नुकसान पहुंचा है. खराब मौसम से जुड़े हादसों में दो लोगों की मौत की खबर है. दूसरी ओर, रांची एयरपोर्ट पर विमान सेवाएं प्रभावित हुईं और झारखंड, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल से होकर गुजरने वाली 70 से अधिक ट्रेनों को रद्द किए जाने की सूचना है. इससे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. झारखंड में मौसम की स्थिति को देखते हुए 28 और 29 अक्टूबर को सरकारी तथा निजी विद्यालय बंद रखने का निर्णय लिया गया था.
खेतों में बिछ गई धान की फसल, कटाई पर लगा ब्रेक
बिहार के कई जिलों में इस समय धान की फसल पककर तैयार होने की स्थिति में है. किसानों के अनुसार, नाटी मंसूरी सहित धान की प्रमुख किस्मों में बालियां निकलने और फसल पकने का महत्वपूर्ण समय चल रहा था. ऐसे में लगातार बारिश और तेज हवा ने खेतों में खड़ी फसल को गिरा दिया. कई खेतों में पौधे जमीन पर बिछ गए हैं. इससे दानों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होने की आशंका है.
पटना जिले के नौबतपुर, बिक्रम, पालीगंज और मोकामा-बाढ़ क्षेत्र के किसानों ने बड़े पैमाने पर नुकसान की बात कही है. इसके अलावा समस्तीपुर, भागलपुर, मुंगेर, आरा, औरंगाबाद, जहानाबाद, गया, सासाराम और कैमूर सहित अनेक इलाकों से भी फसलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है.
मोकामा और बाढ़ के टाल क्षेत्र में किसानों का अनुमान है कि करीब 50 से 55 प्रतिशत तक धान की फसल प्रभावित हुई है. हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन प्रशासनिक सर्वे और खेतों के निरीक्षण के बाद ही हो सकेगा. जिन किसानों ने फसल काटकर खेतों में रखी थी, उनके सामने भी मुश्किलें बढ़ गई हैं. लगातार बारिश के कारण कटी हुई फसल भीग गई है. खेतों में पानी भरने से उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी कठिन हो गया है.
सब्जियों की खेती पर भी बारिश की मार
धान के साथ सब्जी उत्पादक किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है. खेतों में पानी भरने और मिट्टी में अत्यधिक नमी के कारण गोभी, मक्का, मडुआ और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है. कई स्थानों पर सब्जियों के खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है. इससे पौधों के खराब होने और तैयार सब्जियों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है.
किसानों का कहना है कि बारिश के कारण खेतों में कीचड़ जमा हो गया है. ऐसे में सब्जियों की देखभाल, कटाई और उन्हें बाजार तक पहुंचाने का काम प्रभावित हो रहा है. जिन किसानों ने बाजार में बिक्री के लिए फसल तैयार की थी, उनके सामने अब उत्पादन बचाने के साथ उसे सुरक्षित निकालने की चुनौती है. लगातार बारिश जारी रहने से नुकसान और बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है.
सालभर की मेहनत पर संकट, मुआवजे की मांग
किसानों के लिए यह नुकसान केवल एक मौसम की फसल खराब होने का मामला नहीं है. खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च होती है. कई परिवार अपनी जमा-पूंजी खेती में लगा देते हैं. फसल अच्छी होने पर उन्हें बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और दूसरे जरूरी खर्चों को पूरा करने की उम्मीद रहती है. लेकिन खेतों में तैयार फसल गिरने से उनकी सालभर की मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है.
किसानों का कहना है कि लगातार प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती की लागत निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है. बिहार के प्रभावित किसानों ने राज्य सरकार से नुकसान का आकलन कराकर राहत देने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिली तो अगली फसल की तैयारी करना भी कठिन हो जाएगा.
किसानों ने केंद्र और बिहार तथा झारखंड सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वे कराने की मांग की है. उनका कहना है कि फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कर पात्र किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें.
झारखंड में दो मौतें, 70 से अधिक मकानों को नुकसान
झारखंड में भी बारिश और तेज हवाओं का असर व्यापक रूप से दिखाई दिया. जमशेदपुर, घाटशिला, रांची, रामगढ़ और जामताड़ा सहित कई जिलों में धान की खड़ी और कटी हुई फसल को नुकसान पहुंचने की खबर है. आलू की खेती पर भी संकट मंडराने लगा है. लगातार बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने और जलभराव से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
ग्रामीण क्षेत्रों में तेज हवा और बारिश के कारण मकानों तथा टीन शेड को भी नुकसान पहुंचा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 70 से अधिक घरों और टीन शेड के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है. वहीं, खराब मौसम से जुड़े हादसों में अब तक दो लोगों की मौत की खबर सामने आई है. राज्य सरकार ने फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराने के लिए सर्वे के निर्देश दिए हैं. प्रशासनिक टीमों के निरीक्षण के बाद ही प्रभावित किसानों और परिवारों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
मौसम की स्थिति को देखते हुए झारखंड में 28 और 29 अक्टूबर को सरकारी तथा निजी विद्यालय बंद रखे गए थे. प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम के अनुरूप सावधानी बरतने की सलाह दी गई.
रांची एयरपोर्ट पर उड़ानों में देरी, रेलवे यातायात भी प्रभावित
बारिश और तेज हवाओं का असर हवाई यातायात पर भी पड़ा. रांची एयरपोर्ट पर खराब मौसम के कारण विमान सेवाएं प्रभावित हुईं. मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से आने वाली कुछ उड़ानों के करीब एक घंटे तक विलंब से पहुंचने की जानकारी दी गई. उड़ानों में देरी के कारण यात्रियों को एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा और उनकी आगे की यात्रा योजनाएं भी प्रभावित हुईं.
खराब मौसम का असर रेलवे यातायात पर भी दिखाई दिया. झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरने वाली 70 से अधिक ट्रेनों को रद्द किए जाने की सूचना है. इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. यात्रियों को स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि करने की जरूरत है, ताकि रद्द या प्रभावित ट्रेन के कारण अनावश्यक परेशानी न हो.
सर्वे और राहत पर टिकी किसानों की निगाहें
बिहार और झारखंड में लगातार बारिश से पैदा हुई स्थिति ने एक बार फिर खेती को मौसम की अनिश्चितता के सामने खड़ा कर दिया है. किसानों के सामने तत्काल चुनौती खेतों से बची हुई फसल निकालने, कटी उपज को सुरक्षित रखने और अगली बुवाई की तैयारी करने की है. वहीं, सरकार और प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी है.
झारखंड में सर्वे के निर्देश जारी होने के बाद किसानों को रिपोर्ट और सहायता का इंतजार है. बिहार के प्रभावित किसानों ने भी जल्द सर्वे और मुआवजे की मांग उठाई है. किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा में उनकी मेहनत और पूंजी दोनों प्रभावित हुई हैं. ऐसे समय में राहत केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि नुकसान के अनुपात में सहायता समय पर मिलनी चाहिए. खेतों में बिछी धान की फसल और बारिश में भीगी उपज के बीच अब किसानों की उम्मीद सरकारी सर्वे और मुआवजे पर टिकी है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

