नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का शंखनाद, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया ध्वजारोहण; जुलाई 2028 तक चलेगा आयोजन

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का शंखनाद, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया ध्वजारोहण; जुलाई 2028 तक चलेगा आयोजन

प्रेषित समय :16:34:13 PM / Sat, Oct 31st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नासिक. महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेले का शनिवार, 31 अक्टूबर को विधिवत शुभारंभ हो गया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नासिक के रामकुंड में पूजा-अर्चना के बाद धर्मध्वज फहराकर इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत की. वहीं त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ध्वजारोहण किया. दोपहर 12:02 बजे हुए इस आयोजन के साथ ही करीब 12 साल बाद आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ की धार्मिक गतिविधियों का औपचारिक आगाज हो गया.

यह आयोजन जुलाई 2028 तक चलेगा. इस दौरान देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के नासिक और त्र्यंबकेश्वर पहुंचने की संभावना है. कुंभ के प्रमुख अमृत स्नान अगस्त और सितंबर 2027 में आयोजित होंगे.

रामकुंड और कुशावर्त तीर्थ पर एक साथ ध्वजारोहण

कुंभ मेले की शुरुआत के अवसर पर नासिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रामकुंड में पूजा-अर्चना कर धर्मध्वज फहराया. इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे.

त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ध्वजारोहण किया. इससे पहले शुक्रवार को नासिक में महाध्वज ग्राम परिक्रमा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हुए.

12 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

महाराष्ट्र सरकार और कुंभ मेला प्राधिकरण की तैयारियों के बीच इस आयोजन में करीब 12 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. नासिक और त्र्यंबकेश्वर दोनों ही इस धार्मिक आयोजन के प्रमुख केंद्र होंगे.

नासिक में गोदावरी नदी के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त तीर्थ पर श्रद्धालु पवित्र स्नान करेंगे. इस कुंभ की विशेषता यह है कि वैष्णव और शैव अखाड़ों के स्नान अलग-अलग तीर्थस्थलों पर आयोजित होते हैं.

अगस्त-सितंबर 2027 में होंगे प्रमुख अमृत स्नान

सिंहस्थ कुंभ के दौरान कई महत्वपूर्ण स्नान मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं. इनमें अगस्त और सितंबर 2027 के अमृत स्नान सबसे महत्वपूर्ण होंगे. इन अवसरों पर साधु-संतों, अखाड़ों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भागीदारी होने की उम्मीद है.

मुख्य स्नान पर्वों के दौरान नासिक और त्र्यंबकेश्वर में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात, सुरक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं.

आखिर नासिक के कुंभ को क्यों कहते हैं सिंहस्थ?

नासिक-त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले कुंभ को सिंहस्थ कहा जाता है. इसके पीछे ज्योतिषीय मान्यता है. परंपरा के अनुसार, जब बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करता है, तब इस कुंभ का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है.

इस आयोजन की तिथियां ग्रहों की स्थिति, धार्मिक परंपराओं और अखाड़ों की सहमति के आधार पर निर्धारित होती हैं. नासिक का सिंहस्थ कुंभ हर 12 वर्ष में आयोजित किया जाता है.

समुद्र मंथन और अमृत की बूंदों से जुड़ी है मान्यता

हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ था. मान्यता है कि इस दौरान अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं.

इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर इन चारों स्थानों पर कुंभ मेले की परंपरा चली आ रही है. नासिक और त्र्यंबकेश्वर का सिंहस्थ कुंभ इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-