एसआईआर पर संसद में चर्चा को तैयार सरकार, विपक्ष सदन चलने दे : गृह मंत्री अमित शाह

एसआईआर पर संसद में चर्चा को तैयार सरकार, विपक्ष सदन चलने दे : गृह मंत्री अमित शाह

प्रेषित समय :20:05:57 PM / Tue, Nov 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रायपुर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के मुद्दे पर विपक्ष को संसद में चर्चा की चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को संसद की कार्यवाही बाधित करने के बजाय सदन चलने देना चाहिए.

शाह मंगलवार को छत्तीसगढ़ के राज्योत्सव के समापन समारोह में शामिल होने अटल नगर-नवा रायपुर पहुंचे थे. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे. इस दौरान शाह ने राज्य के गठन, विकास, नक्सलवाद के खात्मे और सांस्कृतिक विरासत पर बात रखी.

उन्होंने छत्तीसगढ़ के गठन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को देते हुए कहा कि वर्ष 2000 में राज्य की स्थापना कर उन्होंने छत्तीसगढ़ को अलग पहचान दी. उस समय क्षेत्र का विकास ठहर गया था और इसके साथ अन्याय हो रहा था. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य को विकास की दिशा में आगे बढ़ाया गया है. आज छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्ति की ओर बढ़ते हुए विकास के नए रास्ते पर अग्रसर है.

नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों के योगदान की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ और नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने में सुरक्षा बलों की भूमिका अहम है.

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि पार्टी ने असंवैधानिक सरकारों और सांसदों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में निर्वाचित सरकार नहीं थी, वहां नक्सलियों ने अपना गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री तक बना रखा था. शाह ने सवाल उठाया कि उन्हें ऐसी व्यवस्था चलाने का अधिकार किस संविधान ने दिया था. उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलियों ने पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों सहित कई निर्दोष लोगों की हत्या की. राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वे संसद में ऐसी व्यवस्थाओं का समर्थन करते हैं.

शाह ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु घासीदास और गुरु नानक देव के संदेशों में निहित समानता, सेवा और सत्य के मूल्य प्रदेश की परंपरा का हिस्सा हैं. उन्होंने छत्तीसगढ़ पंडुम, बस्तर ओलंपिक, पंथी, पंडवानी, राउत नाचा, करमा और सैला नृत्य जैसी लोक परंपराओं के संरक्षण के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की.

उन्होंने ढोकरा कला, बेल मेटल, कास्ट क्राफ्ट और कोसा को छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान बताते हुए कहा कि 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरे की अनूठी परंपरा को भी राज्य सरकार ने नई पहचान दी है.

गृह मंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा देकर उसकी पहचान स्थापित की थी. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-