जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट में नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की सहायक फोरमैन ग्रेड-सी भर्ती परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई है. परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों ने याचिका दायर कर पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने को अनुचित बताया है.
जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एनसीएल प्रबंधन को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है. कोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुद्दों और अंतरिम राहत के संबंध में भी जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी.
270 पदों के लिए निकली थी भर्ती, चयन के बाद रद्द हुई परीक्षा-
याचिका के मुताबिक एनसीएल ने 9 फरवरी 2026 को सहायक फोरमैन (प्रशिक्षु) ग्रेड-सी के इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और ईएंडटी ट्रेड के 270 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था. 8 अगस्त 2026 को रिजल्ट घोषित किया गया, जिसमें याचिकाकर्ताओं का चयन हुआ और दस्तावेज सत्यापन की तारीख तय की गई. इसी बीच कुछ परीक्षा केंद्रों पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं. इसके बाद हृष्टरु ने 13 अगस्त को सूचना जारी कर दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया आगामी आदेश तक स्थगित कर दी. फिर 10 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर पूरी चयन परीक्षा निरस्त कर दी और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब गड़बड़ी करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान हो चुकी है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पूरी परीक्षा निरस्त करना उचित नहीं है. इससे उन अभ्यर्थियों को भी दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिन्होंने मेहनत और योग्यता के आधार पर अच्छे अंक हासिल किए हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला-
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और काजल विश्वकर्मा ने पक्ष रखा. उन्होंने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार, यदि परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान कर ली गई है, तो सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत हो सकता है. यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 के तहत मिले अधिकारों का भी उल्लंघन है.
बिहार, राजस्थान, झारखंड समेत पांच राज्यों के अभ्यर्थी-
याचिका बिहार निवासी विवेक कुमार तिवारी, राजस्थान के लोक कुमार सैनी, झारखंड के रविकुमार, उत्तराखंड के विकास कुमार और प्रत्यूष कुमार सिंह तथा तेलंगाना के पीयूष कर्णपाल ने संयुक्त रूप से दायर की है. उनका कहना है कि वे मेधावी अभ्यर्थी हैं और अपनी मेहनत से दस्तावेज सत्यापन की सूची में जगह बनाने में सफल हुए थे. कुछ अभ्यर्थियों की गड़बड़ी के कारण पूरी परीक्षा रद्द करना उनके साथ अन्याय है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

