ग्वालियर में PWD का 27 लाख रुपये का घोटाला उजागर, तत्कालीन सब इंजीनियर को 5 साल की जेल

ग्वालियर में PWD का 27 लाख रुपये का घोटाला उजागर, तत्कालीन सब इंजीनियर को 5 साल की जेल

प्रेषित समय :18:40:12 PM / Tue, Nov 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. मध्य प्रदेश के ग्वालियर में लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े करीब 27 लाख रुपये के भ्रष्टाचार मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने विभाग के तत्कालीन उपयंत्री माधौ सिंह कुशवाह को सरकारी राशि के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और ठेकेदारों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने का दोषी पाया है. अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में अधिकतम पांच साल के सश्रम कारावास के साथ कुल 1 लाख 2 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है.

बिना काम कराए कागजों में दिखा दिया निर्माण

यह मामला वित्तीय वर्ष 1999-2000 का है. उस दौरान लोक निर्माण विभाग के डबरा उपसंभाग में कई सड़कों के निर्माण, मरम्मत, गड्ढे भरने और मुरम डालने के कार्य स्वीकृत किए गए थे. इनमें हरसी-भितरवार, चितौली-रानीघाटी, चीनौर-करैहिया और मस्तूरा मार्ग सहित अन्य सड़कें शामिल थीं.

जांच में सामने आया कि तत्कालीन उपयंत्री माधौ सिंह कुशवाह ने कई कार्यों को मौके पर कराए बिना ही सरकारी रिकॉर्ड में पूरा दर्शा दिया. इसके लिए माप पुस्तिकाओं में कथित तौर पर फर्जी माप दर्ज किए गए और उन्हीं के आधार पर भुगतान के बिल तैयार कराए गए.

ठेकेदारों को पहुंचाया गया लाखों का अनुचित लाभ

फर्जी माप पुस्तिकाओं और बिलों के आधार पर सरकारी राशि का भुगतान कराया गया. इससे शासन को करीब 27 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई और संबंधित ठेकेदारों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचा. मामले की जांच और न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आरोपी की भूमिका सामने आई.

बचाव पक्ष की दलीलें अदालत ने की खारिज

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जांच प्रक्रिया और अभियोजन पक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए. हालांकि, अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार नहीं किया. न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई.

भ्रष्टाचार पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

फैसले में विशेष न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने कहा कि सरकारी सेवकों का भ्रष्टाचार में शामिल होना समाज के लिए गंभीर समस्या है. ऐसे मामलों का सीधा असर सरकारी धन और आम जनता के हितों पर पड़ता है. भ्रष्टाचार जैसी गतिविधियों को रोकने और हतोत्साहित करने के लिए दोषियों को दंडित करना जरूरी है.

अदालत के इस फैसले को सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-