इंदौर. केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज की चौड़ाई को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई. मामले में राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और तीन सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए. अब इस मामले में 14 दिसंबर को अंतिम बहस होगी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से निर्माणाधीन ओवरब्रिज के आसपास की कॉलोनियों के रहवासी संघों के समर्थन पत्र भी अदालत में पेश किए गए. याचिकाकर्ता का दावा है कि क्षेत्र के हजारों परिवार इस ब्रिज को फोरलेन बनाने के पक्ष में हैं. इसके साथ ही यातायात विशेषज्ञ की रिपोर्ट भी कोर्ट के सामने रखी गई.
सड़क फोरलेन, लेकिन ओवरब्रिज सिर्फ टू-लेन
यह जनहित याचिका डॉ. संजय कामले की ओर से दायर की गई है. याचिका में बताया गया है कि केसरबाग रोड पर बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए सड़क को फोरलेन बनाया गया है, लेकिन रेलवे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज केवल टू-लेन बनाया जा रहा है.
याचिकाकर्ता का कहना है कि सड़क और ब्रिज की चौड़ाई में अंतर होने से भविष्य में यातायात की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. वर्तमान में भी केसरबाग रोड से जुड़ने वाली सड़कों पर वाहनों का काफी दबाव रहता है. ऐसे में जब पूरा यातायात संकरे ओवरब्रिज से गुजरेगा तो जाम की स्थिति बन सकती है.
अगले 50 साल की जरूरतों के हिसाब से निर्माण की मांग
याचिका में तर्क दिया गया है कि किसी भी बड़े सड़क और पुल निर्माण की योजना तैयार करते समय अगले 50 वर्षों की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए. याचिकाकर्ता का मानना है कि अभी टू-लेन ब्रिज बनाने से भविष्य में दोबारा विस्तार की जरूरत पड़ सकती है, जिससे सरकारी खर्च और आम लोगों की परेशानी दोनों बढ़ेंगे.
बाणगंगा ब्रिज का उदाहरण भी दिया
अपनी मांग के समर्थन में याचिकाकर्ता ने बाणगंगा ब्रिज का उदाहरण दिया. उनका कहना है कि पहले इस ब्रिज का निर्माण टू-लेन के रूप में किया गया था, लेकिन यातायात का दबाव बढ़ने के बाद इसे फोरलेन करना पड़ा. ऐसे में केसरबाग ओवरब्रिज के निर्माण में पहले से ही भविष्य की जरूरतों का आकलन करना जरूरी है.
याचिकाकर्ता ने विशेषज्ञ की उस योजना का भी हवाला दिया, जिसके आधार पर राजस्थान के कोटा शहर में यातायात व्यवस्था को सिग्नल मुक्त बनाने में मदद मिली.
अब सरकार के जवाब पर टिकी निगाहें
मंगलवार की सुनवाई में शासन की ओर से जवाब नहीं आने पर हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह की मोहलत देते हुए समय सीमा में जवाब प्रस्तुत करने को कहा है. मामले में 14 दिसंबर को अंतिम बहस निर्धारित की गई है. अब देखना होगा कि सरकार ओवरब्रिज की प्रस्तावित चौड़ाई और यातायात संबंधी आपत्तियों पर अदालत के सामने क्या पक्ष रखती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

