नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के बोरीवली ईस्ट में बस यार्ड के लिए निर्धारित भूखंड से अतिक्रमण नहीं हटाने पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने इस मामले में बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही, अवमानना याचिका पर फैसला होने तक आयुक्त और उनके निजी स्टाफ का वेतन जारी नहीं करने का निर्देश दिया है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया बीएमसी आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है. पीठ ने टिप्पणी की कि 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 को दिए गए आदेशों में अतिक्रमण हटाने के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं किया गया.
दरअसल, जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी को बोरीवली ईस्ट स्थित 3,400 वर्गमीटर के भूखंड से तीन महीने के भीतर कब्जा हटाने और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था. यह भूखंड बस यार्ड के लिए निर्धारित है. इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर भूखंड के मालिक मेसर्स पराग कंस्ट्रक्शन्स ने अवमानना याचिका दायर की.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि 28 जुलाई के आदेश में स्पष्ट किया गया था कि यदि सिविल कोर्ट बेदखली पर रोक नहीं लगाता है तो बीएमसी अतिक्रमण हटाने और तोड़फोड़ की कार्रवाई कर सकती है.
सुनवाई के दौरान बीएमसी ने अतिक्रमणकारियों की ओर से सिविल कोर्ट में मामला दायर किए जाने का हवाला देते हुए अनुपालन के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा. निगम की ओर से कहा गया कि सिविल कोर्ट में दाखिल दस्तावेज मराठी में हैं, जिनका अंग्रेजी अनुवाद कराने में समय लगेगा. हालांकि, पीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
बीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी भट्ट ने कहा कि आयुक्त अश्विनी भिड़े 28 जुलाई के आदेश का एक महीने के भीतर पालन करने को तैयार हैं. इस पर पीठ ने कहा कि अनुपालन की निर्धारित अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह से जानबूझकर पालन नहीं किया गया.
पीठ ने अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों के बीच मिलीभगत की आशंका जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि निगम के अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बजाय सिविल कोर्ट की कार्यवाही को अधिक महत्व दे रहे हैं. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों को यह समझना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कैसे किया जाता है. पीठ ने बीएमसी आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी कर पूछा है कि आदेशों की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-


