भारत को मिला AI का नया साइबर हथियार, CERT-In को Claude Mythos का एक्सेस, कमजोरियों की होगी जांच

भारत को मिला AI का नया साइबर हथियार, CERT-In को Claude Mythos का एक्सेस, कमजोरियों की होगी जांच

प्रेषित समय :21:22:38 PM / Wed, Nov 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. देश की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) को अमेरिकी AI कंपनी Anthropic के अत्याधुनिक Claude Mythos मॉडल तक पहुंच मिल गई है. इस मॉडल की मदद से एजेंसी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम में मौजूद सुरक्षा कमजोरियों की पहचान करने तथा उभरते साइबर खतरों से निपटने की अपनी क्षमता को मजबूत करने की तैयारी कर रही है. हालांकि, इस तकनीक का इस्तेमाल तत्काल व्यापक स्तर पर नहीं किया जाएगा. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, CERT-In शुरुआत में सीमित और नियंत्रित तरीके से इस मॉडल का परीक्षण करेगी. एजेंसी पहले इसकी क्षमताओं, उपयोगिता और संभावित जोखिमों को समझेगी, इसके बाद ही इसके इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने पर विचार किया जाएगा.

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दुनिया भर में साइबर अपराधी भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके अधिक जटिल साइबर हमलों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में उन्नत AI मॉडल का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है. लेकिन इसके साथ ही तकनीक के दुरुपयोग का खतरा भी उतना ही गंभीर है. यही वजह है कि भारत सरकार इस तकनीक को अपनाने में सावधानी और संतुलन की नीति पर आगे बढ़ रही है.

CERT-In को मिला Claude Mythos का एक्सेस, साइबर सुरक्षा में होगा इस्तेमाल

भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In को Anthropic के Claude Mythos मॉडल का एक्सेस मिलना तकनीकी और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस मॉडल की क्षमताओं का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों की पहचान करने और संभावित साइबर खतरों का आकलन करने के लिए किया जा सकता है.

सूत्रों के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस बात का आकलन करना चाहता है कि इस उन्नत AI मॉडल का इस्तेमाल देश की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में किस तरह किया जा सकता है. एजेंसी शुरुआत में मॉडल के साथ प्रयोग करेगी और धीरे-धीरे उन प्रणालियों को परीक्षण के लिए इसके माध्यम से जांचेगी, जिनकी सुरक्षा का मूल्यांकन करना आवश्यक होगा.

मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी नहीं की जाएगी. एजेंसी धीरे-धीरे परीक्षण का दायरा बढ़ाएगी और प्रत्येक चरण में इसके परिणामों का मूल्यांकन करेगी. सरकार का उद्देश्य ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करना है, जिससे साइबर सुरक्षा मजबूत हो, लेकिन उसके कारण कोई नया जोखिम पैदा न हो.

Claude Mythos आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं, सीमित संस्थानों को ही पहुंच

Anthropic का Claude Mythos मॉडल सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है. साइबर सुरक्षा से जुड़ी इसकी उन्नत क्षमताओं और संभावित दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए कंपनी ने इसे केवल कुछ चुनिंदा और विश्वसनीय संस्थानों तक सीमित रखा है.

इसका प्रमुख कारण यह है कि जिस तकनीक का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की सुरक्षा कमजोरियों का पता लगाने के लिए किया जा सकता है, उसी क्षमता का गलत इस्तेमाल साइबर अपराधी भी कर सकते हैं. यदि ऐसे मॉडल का अनियंत्रित उपयोग होने लगे, तो इसका इस्तेमाल डिजिटल प्रणालियों में कमजोरियां खोजने के साथ-साथ अधिक परिष्कृत साइबर हमलों की तैयारी में भी किया जा सकता है.

इसलिए Mythos जैसे मॉडल तक पहुंच को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत की CERT-In भी इसी सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण के साथ इसका इस्तेमाल शुरू करेगी. फिलहाल Anthropic की ओर से भारत के साथ इस व्यवस्था के तकनीकी और संचालन संबंधी विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

साइबर सुरक्षा में AI के दोहरे इस्तेमाल की चुनौती

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का साइबर सुरक्षा में इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण लेकिन संवेदनशील विषय बन गया है. AI आधारित मॉडल कम समय में बड़ी मात्रा में डिजिटल सूचनाओं का विश्लेषण कर सकते हैं. इससे सॉफ्टवेयर में मौजूद खामियों, सुरक्षा संबंधी कमजोरियों और संभावित जोखिमों की पहचान करने में मदद मिल सकती है.

दूसरी ओर, यही क्षमताएं गलत हाथों में पहुंचने पर साइबर अपराधियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती हैं. वे इनका इस्तेमाल डिजिटल प्रणालियों की कमजोरियां खोजने, साइबर हमलों को अधिक प्रभावी बनाने और सुरक्षा तंत्र को चुनौती देने के लिए कर सकते हैं.

केंद्रीय मंत्रालय के सूत्रों ने इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए कहा है कि तकनीक का इस्तेमाल इस तरह होना चाहिए कि समस्या का समाधान करने वाली व्यवस्था खुद समस्या न बन जाए. सरकार का दृष्टिकोण है कि साइबर सुरक्षा के लिए AI का इस्तेमाल करने से पहले उसकी सीमाओं और संभावित दुष्प्रभावों को समझना जरूरी है.

दूरसंचार क्षेत्र में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए TRAI का प्रस्ताव

AI के इस्तेमाल और उससे जुड़े जोखिमों को लेकर भारत में केवल साइबर सुरक्षा एजेंसी ही सक्रिय नहीं है, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के नियामक भी अपने स्तर पर नियम तैयार कर रहे हैं. इसी क्रम में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने दूरसंचार नेटवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं.

प्रस्तावित ढांचे के तहत दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को अपने बोर्ड से मंजूर AI नीतियां तैयार करनी होंगी. इसके अलावा कंपनियों को AI के संचालन, निगरानी और सुरक्षा से संबंधित विशेष समितियां गठित करने का प्रस्ताव है. AI से जुड़ी गंभीर घटनाओं की जानकारी नियामक को देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है.

TRAI का उद्देश्य दूरसंचार नेटवर्क में AI के इस्तेमाल को अधिक जवाबदेह और सुरक्षित बनाना है. चूंकि दूरसंचार व्यवस्था देश के महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे का हिस्सा है, इसलिए इसमें AI के इस्तेमाल से पैदा होने वाले जोखिमों को गंभीरता से लेने की जरूरत है.

AI नियमन पर IT मंत्रालय भी तैयार कर रहा परामर्श पत्र

दूरसंचार क्षेत्र के लिए अलग दिशानिर्देशों के साथ केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नियमन को लेकर परामर्श पत्र जारी करने की तैयारी कर रहा है.

मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित परामर्श पत्र में AI सुरक्षा, डीपफेक और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान दिया जाएगा. इसका उद्देश्य AI तकनीक के विकास और इस्तेमाल के दौरान लोगों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े पहलुओं पर विचार करना है.

डीपफेक के माध्यम से किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज या वीडियो में कृत्रिम बदलाव करके भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है. इसके कारण गलत सूचना, डिजिटल धोखाधड़ी और पहचान से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं. ऐसे में AI नियमन के तहत इस तरह की चुनौतियों से निपटने के उपायों पर विचार किया जाना महत्वपूर्ण है.

हर क्षेत्र के लिए एक जैसे नियम बनाना व्यावहारिक नहीं

AI नियमन को लेकर मंत्रालय का मानना है कि सभी क्षेत्रों के लिए एक समान और अत्यधिक सख्त नियम बनाना व्यावहारिक नहीं होगा. अलग-अलग क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल और उससे पैदा होने वाले जोखिमों की प्रकृति अलग होती है.

मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि कुछ क्षेत्र देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े हैं, जहां AI के कारण उत्पन्न होने वाले जोखिम कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं. इसलिए ऐसे क्षेत्रों में अपेक्षाकृत सख्त नियमों की आवश्यकता हो सकती है.

इसी दृष्टिकोण के तहत TRAI जैसे क्षेत्रीय नियामकों को अपने-अपने क्षेत्र के लिए दिशानिर्देश तैयार करने की भूमिका दी जा रही है. मंत्रालय का मानना है कि क्षेत्रीय नियामक अपने क्षेत्र की तकनीकी जरूरतों और जोखिमों को बेहतर ढंग से समझते हैं. इसलिए वे AI के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए अधिक व्यावहारिक नियम बना सकते हैं.

भारत की साइबर सुरक्षा रणनीति में AI की बढ़ती भूमिका

CERT-In को Claude Mythos तक पहुंच मिलना भारत की साइबर सुरक्षा रणनीति में उन्नत AI तकनीक को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है. इससे एजेंसी को यह समझने का अवसर मिलेगा कि अत्याधुनिक AI मॉडल सॉफ्टवेयर की कमजोरियों की पहचान और साइबर खतरों के आकलन में कितने प्रभावी साबित हो सकते हैं.

हालांकि, अभी यह शुरुआती परीक्षण और प्रयोग का चरण है. सरकार ने इसके व्यापक इस्तेमाल को लेकर कोई समयसीमा या अंतिम योजना सार्वजनिक नहीं की है. आगे इसका दायरा बढ़ाने का निर्णय शुरुआती प्रयोगों के परिणामों और जोखिमों के मूल्यांकन के आधार पर लिया जाएगा.

डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन लेनदेन, सरकारी पोर्टल और महत्वपूर्ण तकनीकी नेटवर्क पर निर्भरता बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में AI आधारित सुरक्षा तकनीक भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. लेकिन तकनीक की क्षमता के साथ उसके दुरुपयोग की आशंका को नियंत्रित करना भी उतना ही आवश्यक होगा.

भारत के सामने अब दोहरी चुनौती है. एक तरफ उन्नत AI का इस्तेमाल करके साइबर हमलों से पहले ही सुरक्षा कमजोरियों का पता लगाना है, वहीं दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना है कि यही तकनीक साइबर अपराधियों के हाथों में खतरनाक हथियार न बन जाए. CERT-In का Claude Mythos के साथ नियंत्रित प्रयोग इसी संतुलन की दिशा में उठाया गया शुरुआती कदम है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-