मौत की सजा भी नहीं रोक पाएगी शेख हसीना का रास्ता! बोलीं- दिसंबर में लौटूंगी बांग्लादेश, अपनी मिट्टी पर मरना मंजूर

मौत की सजा भी नहीं रोक पाएगी शेख हसीना का रास्ता! बोलीं- दिसंबर में लौटूंगी बांग्लादेश, अपनी मिट्टी पर मरना मंजूर

प्रेषित समय :18:25:53 PM / Thu, Nov 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने वतन लौटने को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने ऐलान किया है कि वह आगामी दिसंबर में हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी. इसके लिए उन्हें गिरफ्तारी या मौत की सजा का सामना ही क्यों न करना पड़े, वह पीछे नहीं हटेंगी. समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) को ईमेल के जरिए दिए इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि वह किसी दूसरे देश में रहने के बजाय अपनी मातृभूमि और अपने लोगों के बीच आखिरी सांस लेना पसंद करेंगी.

अगस्त 2024 में छोड़ना पड़ा था बांग्लादेश

शेख हसीना बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली नेताओं में रही हैं. उन्होंने 1996 से 2001 और फिर 2009 से अगस्त 2024 तक प्रधानमंत्री पद संभाला. हालांकि, अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए व्यापक आंदोलन और हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी. इसके बाद वह बांग्लादेश से भारत आ गईं और तब से यहीं रह रही हैं.

2025 में सुनाई गई थी मौत की सजा

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शेख हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मुकदमा चलाया गया. वर्ष 2025 में विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी. उन पर आरोप था कि छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में करीब 1,400 लोगों की जान गई थी और हजारों लोग घायल हुए थे.

न्यायाधिकरण के फैसले को बताया राजनीतिक साजिश

शेख हसीना ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लगातार खारिज किया है. उन्होंने विशेष न्यायाधिकरण के फैसले को अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि बांग्लादेश लौटने का फैसला वह कर चुकी हैं और संभावित गिरफ्तारी या जान के खतरे से भी पीछे नहीं हटेंगी.

उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने की संभावना है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या शेख हसीना दिसंबर में वास्तव में अपने देश लौटती हैं और वहां की राजनीतिक परिस्थितियां उनके इस फैसले को किस तरह प्रभावित करती हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-