नई दिल्ली. भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने शुक्रवार को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की. उन्होंने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा कर अपने फैसले की जानकारी दी. इसके साथ ही क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में उनके 13 साल के सफर का अंत हो गया.
शमी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब उन्होंने पहली बार भारत की टेस्ट जर्सी पहनी थी, तब उनका सपना देश के लिए कुछ खास करने का था. टेस्ट क्रिकेट उनके लिए महज एक खेल नहीं, बल्कि जिंदगी का अहम हिस्सा रहा है. उन्होंने अपने करियर के दौरान मिले अनुभवों, विकेटों, संघर्षों, चोटों और वापसी को याद करते हुए भारतीय टीम के साथियों, कोच, परिवार और प्रशंसकों का आभार जताया.
बीसीसीआई और बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन को कहा धन्यवाद
शमी ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) का भी आभार जताया. उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं ने उनकी प्रतिभा पर भरोसा किया और करियर को आगे बढ़ाने के अवसर दिए. शमी ने भावुक संदेश में कहा कि टेस्ट क्रिकेट में भले ही उनकी आखिरी गेंद फेंकी जा चुकी है, लेकिन भारत के लिए खेलने का गर्व हमेशा उनके साथ रहेगा.
ऐसा रहा शमी का टेस्ट करियर
मोहम्मद शमी ने नवंबर 2013 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट पदार्पण किया था. उन्होंने भारतीय टीम के लिए 64 टेस्ट मैच खेले और 27.71 की औसत से 229 विकेट हासिल किए. इस दौरान उन्होंने छह बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लिए. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 56 रन देकर छह विकेट रहा, जो उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ किया था.
शमी अपनी तेज रफ्तार, रिवर्स स्विंग और पुरानी गेंद से बल्लेबाजों को परेशान करने की क्षमता के लिए पहचाने जाते रहे. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उन्होंने कई यादगार प्रदर्शन किए. जसप्रीत बुमराह के साथ उनकी तेज गेंदबाजी जोड़ी ने भारतीय टीम को कई अहम मौकों पर सफलता दिलाई.
टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के साथ शमी के अंतरराष्ट्रीय करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है. उनके प्रदर्शन, संघर्ष और चोटों से उबरकर मैदान पर वापसी की कहानियां लंबे समय तक क्रिकेट प्रशंसकों के जेहन में रहेंगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

