पहुंचने से पहले ही स्पेशल ट्रेनों का बिगड़ा शेड्यूल, कोई 18 तो कोई 9 घंटे लेट, यात्रियों की यात्रा बनी मुसीबत

पहुंचने से पहले ही स्पेशल ट्रेनों का बिगड़ा शेड्यूल, कोई 18 तो कोई 9 घंटे लेट, यात्रियों की यात्रा बनी मुसीबत

प्रेषित समय :19:23:48 PM / Sun, Nov 1st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने भले ही स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू कर राहत देने की कोशिश की हो, लेकिन इन ट्रेनों की लेटलतीफी ने यात्रियों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है. जबलपुर पहुंचने वाली कई स्पेशल ट्रेनें तीन घंटे से लेकर 18 घंटे से अधिक की देरी से चल रही हैं. स्थिति यह है कि यात्रियों को ट्रेन में सीट तो मिल रही है, लेकिन उसके आने और गंतव्य तक पहुंचने का कोई भरोसा नहीं रह गया है. स्पेशल ट्रेनों के साथ कई नियमित ट्रेनें भी घंटों विलंब से चल रही हैं. इससे यात्रियों की पूरी यात्रा योजना प्रभावित हो रही है. कई यात्रियों को मजबूरी में अपने टिकट तक रद कराने पड़ रहे हैं.

त्योहारी और अन्य व्यस्त अवधि में यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को संभालने के लिए रेलवे स्पेशल ट्रेनों का संचालन करता है. इनका उद्देश्य नियमित ट्रेनों में दबाव कम करना और यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराना होता है. लेकिन जब यही ट्रेनें कई-कई घंटे देरी से चलने लगती हैं, तो राहत की यह व्यवस्था यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन जाती है. जबलपुर स्टेशन पर पहुंचने वाली ट्रेनों की स्थिति ने भी इसी समस्या को उजागर किया है.

 नियमित ट्रेनों को दी जा रही प्राथमिकता
स्पेशल ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों का आरोप है कि रेलवे प्रशासन नियमित ट्रेनों की समय-सारिणी को प्राथमिकता देता है, जबकि स्पेशल ट्रेनों के संचालन और समय पर पहुंचने को लेकर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है. यात्रियों के मुताबिक, कई बार स्पेशल ट्रेनों को छोटे-छोटे स्टेशनों पर रोक दिया जाता है और उनके पीछे या आसपास चल रही नियमित ट्रेनों को आगे निकाल दिया जाता है.

इस प्रक्रिया में स्पेशल ट्रेनें लगातार लेट होती जाती हैं. यात्रियों का कहना है कि यदि किसी ट्रेन को पहले से ही विलंब हो रहा है, तो उसके संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जाना चाहिए. छोटे स्टेशनों पर लंबे समय तक खड़े रहने से यात्रियों को परेशानी होती है. खासकर परिवार के साथ यात्रा करने वाले बुजुर्गों, बच्चों और ऐसे यात्रियों को ज्यादा दिक्कत होती है, जिन्हें आगे की यात्रा के लिए दूसरी ट्रेन या अन्य साधन पकड़ना होता है.

18 घंटे से अधिक देरी से चल रही 
जबलपुर पहुंचने वाली विलंबित ट्रेनों में अयोध्या कैंट-एलटीटी स्पेशल सबसे अधिक प्रभावित बताई गई है. ट्रेन नंबर 01046 करीब 18 घंटे 30 मिनट की देरी से चल रही है. इतनी लंबी देरी के कारण इस ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों की यात्रा योजना पूरी तरह प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा दानापुर-एलटीटी स्पेशल ट्रेन नंबर 01114 भी करीब आठ घंटे 45 मिनट विलंब से चल रही है.

देवलाली-दानापुर स्पेशल ट्रेन नंबर 01053 लगभग छह घंटे 30 मिनट की देरी से चल रही है. उधना-मधुबनी स्पेशल ट्रेन नंबर 09047 करीब चार घंटे और उधना-हसनपुर स्पेशल ट्रेन नंबर 09041 लगभग तीन घंटे 30 मिनट विलंब से चल रही है. वहीं दानापुर-पुणे स्पेशल ट्रेन नंबर 01450 करीब तीन घंटे की देरी से चल रही है.

यात्रा का कार्यक्रम प्रभावित
ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी से यात्रियों को केवल स्टेशन पर इंतजार ही नहीं करना पड़ रहा, बल्कि उनकी आगे की यात्रा भी प्रभावित हो रही है. कई यात्रियों ने बताया कि उन्होंने ट्रेन के निर्धारित समय के अनुसार होटल बुकिंग, दूसरी ट्रेन, बस या अन्य जरूरी कार्यक्रम तय किए थे. ट्रेन के कई घंटे लेट होने से ये सभी व्यवस्थाएं बिगड़ गई हैं.

यात्रियों का कहना है कि स्पेशल ट्रेन चलाने का फायदा तभी है, जब उनका संचालन भी तय समय के आसपास हो. केवल अतिरिक्त ट्रेन उपलब्ध करा देने से समस्या का समाधान नहीं होता. यदि ट्रेन कब पहुंचेगी, इसका भरोसा ही नहीं है तो यात्रियों के लिए टिकट लेने का उद्देश्य भी प्रभावित होता है. इसी परेशानी के चलते कुछ यात्री टिकट रद कराने का विकल्प चुन रहे हैं.

स्पेशल ट्रेनों की समयबद्धता पर उठे सवाल
रेलवे की स्पेशल ट्रेनें भीड़ के समय यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प होती हैं. ऐसे में इनके संचालन में समयबद्धता बनाए रखना जरूरी है. यात्रियों की मांग है कि रेलवे प्रशासन स्पेशल ट्रेनों के ठहराव, प्राथमिकता और संचालन व्यवस्था की समीक्षा करे, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से छोटे स्टेशनों पर न रोकना पड़े. साथ ही ट्रेन की वास्तविक स्थिति और संभावित देरी की जानकारी यात्रियों तक समय पर पहुंचाई जाए.

जबलपुर पहुंचने वाली ट्रेनों की मौजूदा स्थिति ने स्पेशल ट्रेनों की उपयोगिता और समय-सारिणी के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यात्रियों को उम्मीद है कि रेलवे प्रशासन इस समस्या पर ध्यान देकर संचालन व्यवस्था में सुधार करेगा, ताकि अतिरिक्त ट्रेनें राहत देने के बजाय उनकी परेशानी का कारण न बनें.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-